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Kiwi Plant Ghar Par Kaise Lagaye : हर फल में पोषक तत्व होते हैं लेकिन कुछ फल ऐसे होते हैं जिन्हें गुणों का खजाना कहा जाता है. ये फल दुर्लभ प्रजाति के होते हैं. बाजार में बहुत ही ऊंचे दाम में मिलते हैं. इन फलों के खाने से रोगी बहुत जल्दी बीमारी से रिकवर कर जाते हैं. ऐसा ही एक फल कीवी होता है. डेंगू-टाइफाइड के रोगियों को इस फल को खाने की सलाह दी जाती है. यह फल बहुत महंगा होता है लेकिन आप चाहें तो इसे किचन गार्डन में या घर की छत पर आसानी से उगा सकते हैं. इसकी कई वेरायटी होती हैं. इस फल के पौधे को गमले पर कैसे उगाएं, मिट्टी कैसे तैयार की जाती है, कौन सी खाद डालते हैं, फल कितने समय बाद आते हैं, आइये जानते हैं इन सभी सवालों के जवाब….
कीवी एक गुणकारी फल है. विटामिन-सी, विटामिन-के, फाइबर और एंटीऑक्सीडेंट्स का बेहतरीन स्रोत है. यह फल शरीर में रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाता है. डेंगू जैसी बीमारियों में प्लेटलेट्स बढ़ाने के लिए जाना जाता है. इसमें हाई फाइबर और नेचुरल एंजाइम होता है जिससे पेट ठीक रहता है. इसमें पोटेशियम होता है जो ब्लड प्रेशर और कोलेस्ट्रॉल नियंत्रित रखने में मदद करता है. यह एक दुर्लभ प्रजाति का फल है, इसलिए बाजार में बहुत महंगा बिकता है. इस फल को गमले में आसानी से उगाया जा सकता है. इसकी हाइब्रिड वेराइटी बहुत जल्दी फल देती है. कीवी के पौधे को घर पर कैसे उगाएं, आइये सिलसिलेवार ढंग से जानते हैं.
बारिश का मौसम चल रहा है. कीवी का पौधा लगाने का सबसे सही समय है. कीवी के पौधे को साल में दो बार जनवरी से फरवरी (सर्दियों के अंत में) या फिर जुलाई से अगस्त (बरसात के मौसम) के दौरान लगाया जा सकता है. अगर आप घर पर कीवी का पौधा लगाना चाहते हैं तो प्रमाणित नर्सरी से पौधे लाएं. हाइब्रिड वेरायटी के पौधे में जल्दी फल आते हैं. ये पौधे ग्राफ्टेड मेथड से तैयार किए जाते हैं. कीवी के पौधे में लौकी-कद्दू के पौधे के तरह बेल उगती है. सबसे जरूरी बात यह है कि कीवी का केवल एक पौधा लगाना पर्याप्त नहीं. इसमें नर और मादा दोनों प्रकार के पौधे लगाए जाते हैं, ताकि परागण सही तरीके से हो सके. यानी 6-8 मादा पौधों के बीच एक नर पौधा लगाया जाता है. यदि केवल मादा पौधे लगाए जाएंगे तो फल नहीं लग पाएंगे.
कीवी का पौधा पहाड़ी इलाकों में लगाया जाता है. पहाड़ों की जलवायु इसके लिए अनुकूल होती है. अगर आप इस पौधे को मैदानी इलाके में छत पर लगाना चाहते हैं तो पौधे को वातावरण वैसा ही देना होगा. कीवी पौधे की देसी वेरायटी भी लगाई जा सकती है लेकिन इसमें फल 4-5 साल बाद आएंगे. अगर सही अनुपात में नर और मादा पौधे लगाएंगे तो पैदावार बेहतर मिलेगी. नर्सरी से पौधा ऐसा लाएं जो फ्लावरिंग स्टेज पर हो. इससे उसकी ग्रोथ का पता लगाना आसान होगा.गमले में हल्की मिट्टी लें. यानी मिट्टी में कुछ पत्थर, पेड़ों की सड़ी पत्तियां (पोरस मिट्टी) होनी चाहिए. मिट्टी में कैल्शियम पावडर (500 ग्राम) और नीम की खली (250 ग्राम) धान की भूसी और लीफ कंपोस्ट मिला लें. कीवी पौधे को लगाने के लिए गमला कम से कम 18 इंची हो. पौधा लगाने के बाद उसमें दो मुट्ठी ऑर्ग्रेनिक फ्रूटिंग मिक्स फर्टिलाइजर डाल सकते हैं. इससे पौधे को अच्छी ग्रोथ मिलेगी. बाद में पानी डाल दें.
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कीवी के पौधे की समय-समय पर प्रूनिंग (कटाई-छंटाई) करते रहें. महीने में एक बार गोबर की सड़ी खाद, वर्मी कम्पोस्ट और अन्य जैविक खाद डालें. इससे उर्वरता बनी रहेगी. कीवी के पौधे को पानी की बहुत ज्यादा जरूरत नहीं होती. गर्मियों में मिट्टी की नमी बनाए रखें. गमले की गुड़ाई करें, फिर खाद डालें और पानी दें. खाद देने से पहले गुड़ाई जरूर करें. कीवी का पौधा 15-25 डिग्री तापमान में ही जिंदा रहता है. अगर टेंपरेचर अनुकूल नहीं होगा तो पौधा सर्वाइव नहीं कर पाएगा. कीवी का पौधा बेल जैसा होता है. इसीलिए पौधे के ऊपर नेट लगाएं. ध्यान रहें कि बेल मुड़ने ना पाए. या तो बेल को काट दें या फिर उसे नेट पर चढ़ा दें.
कीवी के पौधे में स्केल कीट, लीफ रोलर (पत्ती मोड़क), थ्रिप्स और माइटी जैसे कीटों का अटैक होता है. ऐसे में पौधे की निगरानी करते रहें. जो पत्तियां खराब हो गई हों, उन्हें हटा दें. कीटों से बचाव के लिए नीम के तेल का छिड़काव करें. सबसे ज्यादा ध्यान इस बात पर देना है कि पौधे एक साल तक डेढ़ा नहीं होना चाहिए. यानी पौधे के चारों ओर इस तरह से बांस या नेट लगाएं कि पौधे की बेल सीधी रहे. पांच गमले अगर मादा पौधे के होंगे तो एक गमला नर पौधे का होगा. ढाई साल पौधे में शूटिंग शुरू होगी. शुरू के तीन साल यह पौधा सबसे ज्यादा मेहनत चाहता है, फिर अगले 50 साल फल देता है. एक पौधे में एक साल में 10 किलो फल आते हैं.
कीवी के सबसे अच्छे पौधे शिमला यूनिवर्सिटी में मिलते हैं. एक पौधे की कीमत 200 से 250 रुपये के करीब होती है. इसके फल अक्टूबर से दिसंबर के महीनों में पककर तैयार होते हैं. इसलिए दिसंबर में मादा बेलों की गहन छंटाई करें. जून के अंत में फूल आने के बाद नर बेलों की छंटाई करना चाहिए. फल पके हैं या नहीं, इसकी पहचान करना थोड़ा मुश्किल काम होता है. अगर पौधे में ज्यादा फल चाहिए हो तो कई प्रकार के अनाजों की खली गमले में डालें. किचन वेस्ट कंपोस्ट समय-समय पर डालते रहें. छाछ को भी समय-समय पर पौधे पर डालें.
