Last Updated:
5 fastest bowlers all time: क्रिकेट के इतिहास में रफ्तार के कुछ ऐसे सौदागर हुए हैं जिन्होंने अपनी खौफनाक तेजी से मैदान पर तहलका मचा दिया. शोएब अख्तर ने 2003 में सबसे तेज गेंद फेंककर दुनिया के सबसे तेज गेंदबाज बनने का अटूट रिकॉर्ड बनाया. ऑस्ट्रेलियाई दिग्गज ब्रेट ली और शॉन टैट ने भी स्पीड से कहर बरपाया, तो जेफ थॉमसन और मिचेल स्टार्क ने भी अपनी कातिलाना गेंदबाजी से बल्लेबाजों को बेबस कर दिया. दुनिया के ऑलटाइम पांच सबसे तेज गेंदबाज के बारे में जानते हैं.
दुनिया के 5 सबसे तेज गेंदबाज.
नई दिल्ली. क्रिकेट की पिच पर जब एक तेज गेंदबाज अपनी पूरी ताकत से दौड़ता हुआ आता है, तो केवल गेंद ही नहीं छूटती, बल्कि बल्लेबाज की सांसें भी थम जाती हैं. 140 या 150 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से आती हुई लेदर की गेंद किसी जलते हुए तोप के गोले से कम नहीं लगती. लेकिन क्रिकेट के इतिहास में कुछ ऐसे अद्भुत क्षण भी आए हैं, जब इन गेंदबाजों ने स्पीड के सभी पैमानों को तोड़ते हुए इतिहास के पन्नों में अपना नाम दर्ज करा लिया. 5 क्रिकेट के मैदान पर रफ्तार के उन सौदागरों के बारे में जानते हैं, जिन्होंने अपनी खौफनाक स्पीड से बल्लेबाजों के दिलों में दहशत भर दी.
पाकिस्तान और इंग्लैंड की टीमें साल 2003 के विश्व कप में दक्षिण अफ्रीका में आमने-सामने थीं. पूरे स्टेडियम में एक अलग ही बेचैनी थी, क्योंकि हर किसी की नजरें पाकिस्तान के स्टार गेंदबाज शोएब अख्तर (Shoaib Akhtar) पर टिकी थीं. ‘रावलपिंडी एक्सप्रेस’ के नाम से मशहूर शोएब जब अपने लंबे और रौबदार रन-अप से दौड़ना शुरू करते थे, तो मैदान पर एक अजीब सा सन्नाटा छा जाता था. उस दिन शोएब के सिर पर रफ्तार का भूत सवार था. उन्होंने अपने लंबे कदमों से दौड़ते हुए गेंद फेंकी और जब वो गेंद बल्लेबाज निक नाइट को छकाती हुई निकली, तो स्पीडोमीटर पर आंकड़े देखकर हर कोई दंग रह गया. गेंद की रफ्तार 161.3 किलोमीटर प्रति घंटा दर्ज की गई. यह क्रिकेट इतिहास की सबसे तेज गेंद बन गई. इस ऐतिहासिक गेंद के साथ ही शोएब अख्तर दुनिया के सबसे तेज गेंदबाज बन गए और उनका यह रिकॉर्ड आज भी अटूट बना हुआ है.
दुनिया के 5 सबसे तेज गेंदबाज.
कंगारू धरती से उठे रफ्तार के तूफान
रफ्तार की इस अंतहीन दौड़ में ऑस्ट्रेलियाई गेंदबाजों का दबदबा हमेशा से रहा है. अगर हम थोड़ा पीछे मुड़कर देखें, तो 1970 के दशक में ऑस्ट्रेलियाई पेसर जेफ थॉमसन (Jeoff Thomson) ने अपनी अपरंपरागत और अनपेक्षित गेंदबाजी एक्शन से पूरी दुनिया में खौफ पैदा कर दिया था. उस दौर में जब सुरक्षा उपकरण और आधुनिक हेलमेट नाममात्र के थे, तब जेफ थॉमसन ने 160.6 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से गेंद फेंककर दुनिया भर के बल्लेबाजों को परेशानी में डाल दिया था. उनकी उछाल लेती और सीधी आती तेज गेंदों का सामना करना किसी बुरे सपने जैसा था.
समय बदला, दौर बदला, लेकिन ऑस्ट्रेलिया से रफ्तार के सौदागरों का निकलना जारी रहा. 21वीं सदी की शुरुआत में ब्रेट ली (Brett Lee) के रूप में एक ऐसा गेंदबाज आया, जिसकी आक्रामकता और तीखी मुस्कान के पीछे खौफनाक तेजी छिपी थी. अपने जमाने के सबसे खौफनाक पेसर्स में शुमार ब्रेट ली ने साल 2005 में न्यूजीलैंड के खिलाफ अपनी पूरी ताकत झोंक दी. जब उनकी गेंद पिच पर पड़कर निकली, तो स्पीडोमीटर ने 161.1 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार दर्ज की.
ताकत और स्विंग का खौफनाक मेल
ब्रेट ली के इस कारनामे के कुछ ही सालों बाद, ऑस्ट्रेलिया के ही एक और खूंखार तेज गेंदबाज शॉन टैट ने दुनिया को अपनी कच्ची रफ्तार का जलवा दिखाया. 2010 में इंग्लैंड के खिलाफ खेले गए एक मुकाबले में शॉन टैट (Shuan Tait) ने ठीक उसी रफ्तार को दोहराया, जो ब्रेट ली ने हासिल की थी. टैट की 161.1 किलोमीटर प्रति घंटे की स्पीड वाली इस गेंद ने उन्हें इतिहास में दूसरा सबसे तेज गेंद फेंकने वाला गेंदबाज बना दिया. उनकी सीधी और जानलेवा रफ्तार के सामने इंग्लैंड के बल्लेबाज बेबस नजर आए.
लेकिन ऑस्ट्रेलियाई पेस बैटरी यहीं नहीं रुकी. रफ्तार के इस कारवां को आगे बढ़ाया बाएं हाथ के खतरनाक गेंदबाज मिचेल स्टार्क (Mitchell Starc) ने. साल 2015 में न्यूजीलैंड के खिलाफ एक टेस्ट मैच में स्टार्क ने अपने यॉर्कर और स्विंग के साथ रफ्तार का ऐसा तड़का लगाया कि हर कोई हैरान रह गया. उन्होंने 160.4 किलोमीटर प्रति घंटे की गति से गेंद फेंककर यह साबित कर दिया कि आधुनिक क्रिकेट में भी रफ्तार का जलवा कायम है. स्टार्क की गति और हवा में स्विंग होती गेंदों का कॉम्बिनेशन दुनिया के सर्वश्रेष्ठ बल्लेबाजों के लिए आज भी एक पहेली बना हुआ है.
About the Author
कमलेश कुमार राय नेटवर्क18 ग्रुप में बतौर चीफ सब एडिटर जिम्मेदारी संभाल रहे हैं. वह बीते 15 सालों से खेल पत्रकारिता की पिच पर डटे हुए हैं. हिंदी स्पोर्ट्स सेक्शन में वह खेल कंटेंट की गहरी समझ, सटीक विश्लेषण और ब…
और पढ़ें
