टेस्ट के वो 6 बल्लेबाज…जिन्होंने उम्र को दी मात, रनों कि की बरसात, 97 साल पुराना विश्व कीर्तिमान आज भी कायम

होमखेलक्रिकेट

टेस्ट के 6 बल्लेबाज, 40 के पार भी थमा नहीं जिनका बल्ला, बना डाला इतिहास

Last Updated:

6 Oldest player to score a hundred in Test: क्रिकेट सिर्फ युवाओं का खेल नहीं, बल्कि धैर्य और अनुभव की परीक्षा भी है. सर जैक हॉब्स (46 वर्ष) से लेकर मॉडर्न युग के मिस्बाह-उल-हक (42 वर्ष) तक, इन ‘टाइमलेस टाइटन्स’ ने ढलती उम्र में शतक जड़कर दुनिया को हैरान कर दिया. यह कहानी उन क्रिकेट दिग्गजों की है जिन्होंने सफेद बालों और शारीरिक चुनौतियों के बावजूद अपनी तकनीक और फौलादी जज्बे से मैदान पर इतिहास रचा और साबित किया कि रिकॉर्ड बनाने की कोई उम्र नहीं होती.

उम्र को मात, रनों की बरसात टेस्ट क्रिकेट के वो 5 ‘बूढ़े शेर’.

नई दिल्ली. क्रिकेट को अक्सर युवाओं का खेल कहा जाता है. जहां फुर्ती, तेज रिफ्लेक्स और जोश को प्राथमिकता दी जाती है. लेकिन टेस्ट क्रिकेट के इतिहास के पन्नों को पलटें, तो हमें कुछ ऐसे ‘बूढ़े शेरों’ की दहाड़ सुनाई देती है, जिन्होंने सफेद बालों और ढलती उम्र के बावजूद दुनिया के बेहतरीन गेंदबाजों के पसीने छुड़ा दिए. यह कहानी उन योद्धाओं की है जिन्होंने 40 की उम्र पार करने के बाद भी क्रीज पर अपनी बादशाहत कायम रखी. सबसे ऊपर लिस्ट में नाम आता है ‘द मास्टर’ सर जैक हॉब्स का. 8 मार्च 1929 का दिन था, मेलबर्न का ऐतिहासिक मैदान और सामने थी चिर-प्रतिद्वंद्वी ऑस्ट्रेलियाई टीम. हॉब्स उस समय 46 साल और 82 दिन के थे. जहां लोग इस उम्र में कोचिंग या रिटायरमेंट की योजना बनाते हैं, वहां हॉब्स ने 142 रनों की शानदार पारी खेलकर इतिहास रच दिया. वह आज भी टेस्ट क्रिकेट में शतक बनाने वाले दुनिया के सबसे उम्रदराज खिलाड़ी हैं. उनकी यह पारी संयम और तकनीक का बेजोड़ नमूना थी, जिसने यह सिद्ध कर दिया कि क्लास कभी खत्म नहीं होती.

हेंड्रेन और वूली का दबदबा
इंग्लैंड के ही पैट्सी हेंड्रेन ने 1934 में मैनचेस्टर की गीली पिचों पर ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ 45 साल और 151 दिन की उम्र में 132 रन बनाए.उनके ठीक बाद फ्रैंक वूली का नाम आता है, जिन्होंने 1929 में दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ 154 रनों की आतिशी पारी खेली थी.इन खिलाड़ियों ने दिखाया कि क्रिकेट केवल शारीरिक ताकत नहीं, बल्कि मानसिक दृढ़ता का खेल है.

उम्र को मात, रनों की बरसात टेस्ट क्रिकेट के वो 5 ‘बूढ़े शेर’.

वॉरेन बार्डस्ले का लॉर्ड्स पर नाबाद शौर्य
ऑस्ट्रेलिया के वॉरेन बार्डस्ले की कहानी भी कम रोमांचक नहीं है. 1926 में लॉर्ड्स के ‘मक्का’ कहे जाने वाले मैदान पर, 43 साल और 202 दिन की उम्र में उन्होंने इंग्लैंड के खिलाफ 193 रनों की नाबाद पारी खेली. थकान उनके करीब तक नहीं फटक पाई और उन्होंने अंत तक अपना विकेट सुरक्षित रखा. जोहान्सबर्ग की उछाल भरी पिचों पर 1921 में दक्षिण अफ्रीका के आर्थर नर्स ने ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ 42 साल और 291 दिन की उम्र में 111 रन जोड़े. यह उस दौर की बात है जब सुरक्षा उपकरण (हेलमेट आदि) नहीं होते थे, फिर भी इन दिग्गजों का साहस कम नहीं हुआ.

मॉडर्न एरा के’पुश-अप’ किंग मिस्बाह-उल-हक
इस लिस्ट में सबसे हालिया और सबसे चर्चित नाम है पाकिस्तान के पूर्व कप्तान मिस्बाह-उल-हक का. 14 जुलाई 2016 को लॉर्ड्स के ऐतिहासिक मैदान पर जब मिस्बाह बल्लेबाजी करने उतरे, तो उनकी उम्र 42 साल और 47 दिन थी. इंग्लैंड के घातक तेज गेंदबाजों के सामने मिस्बाह अडिग खड़े रहे और 114 रनों की कप्तानी पारी खेली. शतक पूरा करने के बाद मिस्बाह ने जो किया, वह क्रिकेट इतिहास के सबसे यादगार पलों में दर्ज हो गया. उन्होंने मैदान पर ही पुश-अप्स लगाए. यह उन आलोचकों को करारा जवाब था जो उनकी उम्र पर सवाल उठा रहे थे. मिस्बाह ने साबित किया कि अगर फिटनेस और जज्बा साथ हो, तो आधुनिक क्रिकेट में भी उम्र को मात दी जा सकती है.

About the Author

Kamlesh Raiचीफ सब एडिटर

करीब 15 साल से पत्रकारिता में सक्रिय. दिल्ली यूनिवर्सिटी से पढ़ाई. खेलों में खासकर क्रिकेट, बैडमिंटन, बॉक्सिंग और कुश्ती में दिलचस्पी. IPL, कॉमनवेल्थ गेम्स और प्रो रेसलिंग लीग इवेंट्स कवर किए हैं. फरवरी 2022 से…और पढ़ें

Source link

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *