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Noida Youth Financial Crunch Issues Ground Report : नोएडा में नौकरीपेशा युवाओं के लिए सर्वाइव करना मुश्किल है. किराया, खाना और अन्य खर्चों के बाद सैलरी का बड़ा हिस्सा खत्म हो जाता है. यहां रहने वाले मयंक सिंह के अनुसार, 15 तारीख के बाद लोग किश्तों पर जीते हैं. अतुल यादव बताते हैं कि आज नोएडा में महीने एंड तक हमे ये पता नहीं चलता कि सैलरी गई कहां. ऐसे ही ना जाने कितने युवाओं का दर्द है, जो हर महीने इसी तरह सर्वाइव करते हैं. देखिए इस रिपोर्ट में
नोएडा : नौकरी और बेहतर भविष्य की तलाश में देश के अलग-अलग हिस्सों से युवा नोएडा आते तो हैं, लेकिन यहां रहकर सर्वाइव करना उनके लिए आसान नहीं होता. किराया, खाना, आने-जाने का खर्च, किसी पर लोन और परिवार को भेजी जाने वाली रकम के बाद महीने की सैलरी का बड़ा हिस्सा खत्म हो जाता है. ऐसे में सवाल है कि नोएडा में नौकरी करने वाले युवा आखिर कितना पैसा बचा पाते हैं? वो कैसे गुजर बसर करते हैं. लोकल 18 ने बाहर से आए युवाओं से उनकी कमाई, खर्च और बचत की पूरी कहानी जानने की कोशिश की. आइये जानते हैं…
15 तारीख के बाद किश्तों की जिंदगी
मूलरूप से बिहार के रहने वाले मयंक सिंह ने लोकल 18 से बात करते हुए कहा कि ‘कॉर्पोरेट नौकरी करने वाला हर आदमी 15 तारीख के बाद ऑटोमेटिक गरीब हो जाता है. 15 के बाद उसे किश्तों पर बाकी महीना गुजारना पड़ता है. मान लो 1 तारीख को किसी की सैलरी आती है तो मुश्किल से 15 तक तो सही चलेगा, फिर 15 के बाद किश्तों की तरह हर रोज काटना पड़ता है और बहुत मुश्किल हो जाता है. ये उन लोगों के लिए है जो नोएडा में 15- 40 हजार रुपए कमा रहे हैं.
किश्तों पर छोटे-छोटे सामान खरीदकर छोटी खुशियों में हैं खुश
मूलरूप से बिहार निवासी विकास झा जो बीते करीब 15 साल से नोएडा में रह रहे हैं, उनका कहना है कि मिडिल क्लास और गरीब आदमी को नोएडा में ये समझ नहीं आ रहा है कि महीने के आखिर तक आते-आते पैसा गया कहां? खाने-पीने से लेकर पेट्रोल डीजल या कहें गैस के दाम जो बढ़े वो कम नहीं हुए, जेब पर बहुत असर डालते हैं. नोएडा या बड़े शरों में मंहगाई के चलते फ्लैट, मकान या प्रॉपर्टी तो खरीद नहीं पा रहे है, लेकिन किश्तों पर आईफोन जरूर खरीद लेंगे. रहने के लिए घर नहीं है, लेकिन लोन पर गाड़ी खरीद लेंगे. कह सकते हैं कि बड़ी खुशी मिल नहीं रही और छोटी-छोटी खुशियों में लोग खुश हैं. नोएडा में अगर आज का आंकड़ा देखें तो बहुत कम लोग FD करा रहे हैं.
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सुबह उठने से लेकर सोने तक मंहगाई से हो रहा सामना
नोएडा निवासी अतुल यादव ने बताया कि आज नोएडा में महीने एंड तक हमें ये पता नहीं चलता कि सैलरी गई कहां? वो इसलिए क्योंकि सुबह उठने से लेकर रात को घर वापस पहुंचने और सोने तक बिना पैसे के जिंदगी का गुजारा नहीं है. चीनी 65 रुपये हो गई है. सरसों का तेल 200 रुपए है. आटा 40 रुपए है. पेट्रोल-डीजल अलग रिकॉर्ड तोड़ रहा है. आम आदमी या कहें मिडिल क्लास और गरीब लोगों की एक तरह से मंहगाई के चलते अर्थी सी निकली हुई है. गरीब वर्ग के लोगों को फिर भी राशन मिल जाता है, लेकिन मिडिल क्लास का आदमी कहां जाएं. उसे तो अपना 15-20-30 हजार की नौकरी में घर चलाना है. नोएडा में कही भी रेंट सेपरेट रूम 10 हजार से नीचे नहीं है तो सोचिए क्या होगा?
पांच साल में इतनी मंहगाई जितनी 15 साल में नहीं हुई
बिहार के ही रहने वाले सुधीर रॉय ने बताया कि हम यहां नोएडा में कई सालों से रह रहे हैं. महंगाई इतनी बढ़ी है कि 30-40 हजार कमाने वाला हर व्यक्ति महीने आखिर तक खाली हो जाता है. इसका कारण है महंगे शौक. कमाई आधी भी नहीं, लोअर मिडिल क्लास और मिडिल क्लास के लिए बहुत समस्या है. जिस चीज के रेट बढ़ जाते है वो कम नहीं होते और इसी वजह से महीने के एंड तक पैसों का क्राइसेस हो जाता है. बीते चार से पांच सालों के इतनी मंहगाई हुई है, जितनी बीते 15 साल में नहीं हुई.
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Rajnish Kumar Yadav is a digital journalist and content publisher with over seven years of experience in print and digital media. He is currently working with News18 Digital (Local18) as a Content Publisher, wh…
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