अगर आपको लगता है कि भारत में सरकारी सिस्टम में शिकायत करने पर कोई कार्रवाई नहीं होती, या उसकी सुनवाई होने में महीनों लग जाते हैं तो आप अपनी जानकारी को दुरुस्त कर लीजिए. सरकारी शिकायत का मतलब विभागों के चक्कर लगाना, जवाब का इंतजार करना और बार-बार फॉलोअप करना ही नहीं रह गया है, नरेंद्र मोदी सरकार के तहत सरकार का केंद्रीय शिकायत निवारण प्लेटफॉर्म दिखा रहा है कि ऐसी शिकायतों को संभालने के तरीके में साफ बदलाव आ रहा है. ज्यादा मामले निपटाए जा रहे हैं, औसत समाधान का समय कम हो रहा है और यह सिस्टम ग्रामीण भारत तक पहुंच रहा है.
केंद्रीकृत पब्लिक ग्रिवेंस रिड्रेस एंड मॉनिटरिंग सिस्टम (सीपीग्राम्स) अब हर साल करीब 22 लाख शिकायतें संभाल रहा है. केंद्रीय सरकार के स्तर पर जून 2026 में शिकायत निपटाने का औसत समय 14 दिन रह गया है, जबकि 2019 में यह 28 दिन था. यह आंकड़ा सीएनएन-न्यूज18 को विशेष रूप से मिला है. इसका मतलब है कि शिकायतें औसतन छह साल पहले की तुलना में करीब दो हफ्ते पहले बंद हो रही हैं.
सिस्टम का पैमाना तब और साफ होता है जब मासिक आंकड़ों को देखा जाए.
जून 2026 में केंद्रीय सचिवालय ने करीब दो लाख शिकायतें निपटाईं. यह लगातार 48वां महीना था जब मासिक निपटान एक लाख के आंकड़े को पार कर गया.
यह लगातार तेज रफ्तार इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि शिकायतें दर्ज होने की संख्या भी बढ़ती जा रही है.
2019 से अब तक केंद्रीय मंत्रालयों और विभागों को सीपीग्राम्स पोर्टल के जरिए एक करोड़ से ज्यादा शिकायतें मिली हैं. जून 2026 के अंत तक केंद्रीय सरकार के पास कुल 78,793 शिकायतें लंबित थीं.
राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में भी इस सिस्टम के जरिए काफी शिकायतें आई हैं. 2019 से उन्हें 50 लाख से ज्यादा शिकायतें मिली हैं, जिनमें से हालिया अवधि के अंत तक करीब 2 लाख मामले लंबित थे.
केंद्र, राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को मिलाकर सीपीग्राम्स ने 2019 से अब तक 1.5 करोड़ से ज्यादा शिकायतें संभाली हैं.
एक और महत्वपूर्ण संकेतक सिर्फ लंबित मामलों की संख्या नहीं, बल्कि लंबित मामलों की उम्र है.
जून 2026 तक केंद्रीय सचिवालय में लंबित शिकायतों में से 68 प्रतिशत 21 दिन से कम पुरानी थीं. यानी ज्यादातर शिकायतें जो निपटान का इंतजार कर रही थीं, वे सिस्टम में हाल ही में आई थीं, न कि लंबे समय से अनसुलझी पड़ी हुई थीं.
यह शिकायत निवारण को समयबद्ध बनाने के व्यापक प्रयास का हिस्सा है. औसत निपटान समय में कमी – 2019 में 28 दिन से 2025 में 15 दिन – इस बदलाव का सबसे साफ संकेतक है.
सीपीग्राम्स की पहुंच उसके निपटान क्षमता के साथ-साथ बढ़ रही है.
2025 में पोर्टल पर कुल 7,43,533 नए यूजर्स ने रजिस्ट्रेशन करवाया. सिर्फ जून महीने में 83,544 नए रजिस्ट्रेशन हुए. 2026 में भी यह बढ़ोतरी जारी है, अब तक दो लाख से ज्यादा यूजर्स ने सीपीग्राम्स पर रजिस्ट्रेशन करवाया है.
लेकिन किसी भी डिजिटल पब्लिक सर्विस के लिए चुनौती यह है कि पहुंच सिर्फ उन लोगों तक सीमित न रहे जो ऑनलाइन प्लेटफॉर्म आसानी से इस्तेमाल कर सकते हैं. यहां कॉमन सर्विस सेंटर नेटवर्क काम आता है.
सिर्फ जून 2026 में सीएससी के जरिए 6,262 शिकायतें दर्ज हुईं. यह नेटवर्क नागरिकों, खासकर ग्रामीण और कम डिजिटल कनेक्टिविटी वाले इलाकों के लोगों को शिकायत सिस्टम तक पहुंचने का एक और रास्ता देता है.
सरकार शिकायत को हल बताए जाने के बाद क्या होता है, इस पर भी ज्यादा जोर दे रही है.
2025 में सीपीग्राम्स ने नागरिकों से 10.7 लाख से ज्यादा फीडबैक रिस्पॉन्स दर्ज किए. फीडबैक कॉल सेंटर ने इनमें से करीब दो-तिहाई रिस्पॉन्स दिए.
फीडबैक पर ध्यान इसलिए जरूरी है क्योंकि कागजों पर शिकायत बंद करना और नागरिक की समस्या वाकई हल होना एक जैसी चीज नहीं है. नागरिक फीडबैक यह अतिरिक्त मापदंड देता है कि विभाग का जवाब संतोषजनक था या नहीं.
कुल मिलाकर, प्लेटफॉर्म से 1.5 करोड़ से ज्यादा शिकायतें गुजरी हैं, केंद्रीय स्तर पर निपटान का समय लगभग आधा रह गया है, और मासिक निपटान करीब चार साल से एक लाख से ऊपर बना हुआ है.
