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आईआईटी दिल्ली के एमएससी छात्र ऋषिकेश कुमार की असामयिक मौत के बाद पूरे कैंपस में शोक का माहौल है. संस्थान ने मामले की गहराई से पड़ताल के लिए एक स्वतंत्र बाहरी जांच कमेटी गठित करने का निर्णय लिया है. छात्रों की शिकायतों के समाधान के लिए एक्सटर्नल ओम्बड्सपर्सन नियुक्त किया जाएगा. छात्र का लंबे समय से इलाज चल रहा था और उनका सेमेस्टर ड्रॉप भी हुआ था. संस्थान पीड़ित परिवार को आर्थिक मदद दे रहा है.
IIT दिल्ली के होनहार छात्र ऋषिकेश कुमार की संदिग्ध मौत. (File Photo : PTI)
नई दिल्ली: आईआईटी दिल्ली के एक होनहार एमएससी छात्र ऋषिकेश कुमार की दुखद मौत ने पूरे संस्थान को गहरे सदमे में डाल दिया है. इस घटना के बाद कैंपस में शोक सभा का आयोजन किया गया, जिसमें प्रोफेसर्स और छात्रों ने दिवंगत छात्र को श्रद्धांजलि दी. संस्थान ने पीड़ित परिवार को आर्थिक संबल देने के लिए फैकल्टी और छात्रों के सहयोग से फंड जुटाने की पहल शुरू की है. ऋषिकेश पिछले कई महीनों से गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं से जूझ रहे थे, जिसके चलते उन्हें अस्पताल में भर्ती भी कराना पड़ा था. इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच के लिए अब एक हाई लेवल बाहरी कमेटी गठित की जा रही है.
होली के बाद हॉस्टल में अचानक क्या हुआ था ऋषिकेश के साथ?
ऋषिकेश कुमार ने जुलाई 2025 में आईआईटी दिल्ली में एडमिशन लिया था और वह कैंपस हॉस्टल में रह रहे थे. पढ़ाई में बेहद तेज होने के बावजूद इस साल होली के तुरंत बाद उनकी तबीयत अचानक बिगड़ने लगी थी. साथी छात्रों की चिंता जताने पर प्रशासन ने तुरंत एंबुलेंस से उन्हें आईआईटी अस्पताल पहुंचाया. वहां मौजूद साइकियाट्रिस्ट ने उनकी जांच की और प्राथमिक मेडिकल सपोर्ट दिया. इसके बाद परिवार की सहमति से उन्हें एक बड़े स्पेशलाइज्ड अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां वह लगभग एक महीने तक एडमिट रहे.
अस्पताल से डिस्चार्ज होने के बाद डॉक्टरों ने ऋषिकेश को परिजनों की सीधी देखरेख में रहने की सलाह दी थी. इसके चलते उन्होंने जनवरी से मई 2026 वाले दूसरे सेमेस्टर से अपना नाम वापस लेने की अपील की, जिसे संस्थान ने मंजूरी दे दी. जुलाई 2026 में मेडिकल रिकॉर्ड्स के दोबारा रिव्यू के दौरान भी डॉक्टरों ने उन्हें पैरेंट्स की निगरानी में रहने को कहा. जुलाई और अगस्त में भी उन्हें लगातार काउंसलिंग और इलाज दिया जा रहा था. स्वास्थ्य कारणों से छात्र को तीसरे सेमेस्टर से भी विड्रॉल लेना पड़ा था.
कैंपस में मेंटल हेल्थ सपोर्ट के बावजूद क्यों बैठी बाहरी जांच?
आईआईटी दिल्ली प्रशासन का कहना है कि छात्रों की मानसिक सेहत के लिए कैंपस में मजबूत व्यवस्था बनाई गई है. संस्थान में 15 काउंसलर्स के अलावा एम्स और विमहंस जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों के साइकियाट्रिस्ट भी सेवाएं दे रहे हैं. इन सभी मेडिकल सुविधाओं का पूरा खर्च खुद संस्थान उठाता है. इसके बावजूद छात्र की मौत से जुड़े हर पहलू की बारीकी से पड़ताल के लिए एक स्वतंत्र बाहरी जांच कमेटी बनाई जा रही है. यह कमेटी देखेगी कि छात्र सपोर्ट सिस्टम को और कैसे मजबूत किया जाए.
छात्रों की शिकायतों के लिए क्या नया कदम उठा रहा है प्रशासन?
संस्थान ने छात्रों की अनसुलझी समस्याओं के त्वरित समाधान के लिए एक बाहरी ओम्बड्सपर्सन नियुक्त करने का फैसला किया है. इसका मकसद छात्रों को एक ऐसा प्लेटफॉर्म देना है, जहां वे बिना किसी डर के अपनी शिकायतें दर्ज करा सकें. प्रशासन ने सभी छात्रों से कैंपस के माहौल को ज्यादा सुरक्षित और सहयोगी बनाने के लिए सुझाव भी मांगे हैं. संस्थान का कहना है कि छात्रों की मानसिक भलाई और उनकी सुरक्षा ही उनकी सबसे बड़ी प्राथमिकता है.
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दीपक वर्मा की गिनती डिजिटल मीडिया के सबसे तेज और उभरते हुए चेहरों में होती है. वह न्यूज18 हिंदी के साथ डिप्टी न्यूज एडिटर के तौर पर जुड़े हैं. दीपक ने अपने करियर में कई बड़े मुकाम हासिल किए हैं…
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