लोदी काल के मकबरों का ऐसा हाल… सुप्रीम कोर्ट ने ASI और MCD को लगाई फटकार, अफसरों से हाजिर होने को कहा

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लोदी काल के मकबरों का ऐसा हाल… सुप्रीम कोर्ट ने ASI और MCD को लगाई फटकार

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Supreme Court ASI MCD News: दिल्ली में ऐतिहासिक धरोहरों की दुर्दशा और उनके आसपास बढ़ते अवैध अतिक्रमण को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने कड़ा रुख अपनाया है. जस्टिस अहसानुद्दीन अमानुल्लाह और जस्टिस एन. कोटिश्वर सिंह की बेंच ने एएसआई और एमसीडी को ‘घोर लापरवाही’ और ‘तथ्य छिपाने’ के लिए जमकर फटकार लगाई. दक्षिण दिल्ली के जामरूदपुर में लोदी काल के ऐतिहासिक मकबरों पर हुए अवैध कब्जों की मीडिया रिपोर्टों का संज्ञान लेते हुए कोर्ट ने नाराजगी जताई.

दिल्ली में ऐतिहासिक विरासतों की हालत पर सुप्रीम कोर्ट ने नाराजगी जताई. (फाइल फोटो)

नई दिल्ली. राष्ट्रीय राजधानी में विरासत स्मारकों की स्थिति पर गंभीर चिंता जताते हुए सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली नगर निगम (एमसीडी) और भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) को मामले में ‘पूरी तरह लापरवाही बरतने’ और तथ्यों को दबाने के लिए कड़ी फटकार लगाई. जस्टिस अहसानुद्दीन अमानुल्लाह और जस्टिस एन. कोटिस्वर सिंह की पीठ ने सोमवार को दोनों एजेंसियों के वरिष्ठ अधिकारियों को अदालत के समक्ष पेश होने का निर्देश दिया और मामले की अगली सुनवाई सात अक्टूबर को तय की. पीठ की ये कड़ी टिप्पणियां उस समय आईं, जब उसे मीडिया में आयी खबरों के जरिए दक्षिण दिल्ली के जामरूदपुर इलाके में लोदी काल के मकबरों की खराब स्थिति और बड़े पैमाने पर हुए अतिक्रमण की जानकारी दी गई.

दिल्ली की ऐतिहासिक विरासत वाली इमारतों के संरक्षण और रखरखाव से जुड़ी याचिका पर सुनवाई करते हुए पीठ ने कहा, “हमारे पास अब इसके अलावा कोई विकल्प नहीं है कि एमसीडी के अतिरिक्त आयुक्त और एएसआई के महानिदेशक को व्यक्तिगत रूप से अदालत में पेश होने का निर्देश दिया जाए और हलफनामे के माध्यम से यह बताने को कहा जाए कि अदालत को इस तरह के आचरण का गंभीरता से संज्ञान लेकर उचित आदेश क्यों नहीं देना चाहिए.” इन मीडिया रिपोर्टों का हवाला दिल्ली निवासी राजीव सूरी की ओर से दायर एक आवेदन में दिया गया था. उनकी याचिका के माध्यम से ही सुप्रीम कोर्ट राष्ट्रीय राजधानी में ऐतिहासिक विरासत वाली इमारतों और स्थलों के संरक्षण की निगरानी कर रहा है.

सुप्रीम कोर्ट को बताया गया कि एमसीडी ने 10 अप्रैल को दाखिल अपनी स्थिति रिपोर्ट में कहा था कि जामरूदपुर के पांच मकबरों का सर्वे किया गया. इनमें से एक संरचना की स्थिति संतोषजनक पाई गई, जबकि तीन अन्य के आसपास अतिक्रमण और कूड़ा-कचरा पाया गया. अदालत द्वारा नियुक्त आयुक्तों ने भी पीठ को जानकारी दी कि जामरूदपुर में एमसीडी के अधीन ग्रेड-1 श्रेणी की पांच विरासत इमारतें हैं, जिनमें से एक का पता ही नहीं लगाया जा सकता. सुप्रीम कोर्ट ने कहा, “एमसीडी की ओर से पूरी तरह लापरवाही बरती गई और तथ्यों को दबाया गया है. यह बात सामने आई है कि एमसीडी ने स्पष्ट रूप से यह रुख अपनाया था कि ऐसी संरचना अतिक्रमण से मुक्त है.”

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Rakesh Ranjan Kumar

राकेश रंजन कुमार को डिजिटल पत्रकारिता में 10 साल से अधिक का अनुभव है. न्यूज़18 के साथ जुड़ने से पहले उन्होंने लाइव हिन्दुस्तान, दैनिक जागरण, ज़ी न्यूज़, जनसत्ता और दैनिक भास्कर में काम किया है. वर्तमान में वह h…

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