Last Updated:
दिल्ली सरकार की आगामी EV पॉलिसी 2026-2030 का भविष्य फिलहाल 30 लाख रुपए तक की स्ट्रॉन्ग हाइब्रिड कारों को 50 प्रतिशत रोड टैक्स रिबेट देने के प्रस्ताव पर टिक गया है, जिस पर 15 जुलाई 2026 को अंतिम फैसला आ सकता है. सरकार का एक पक्ष जहां सीधे ‘फुल EV मॉडल’ अपनाने के हक में है, वहीं दूसरा पक्ष सीमित चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर के चलते हाइब्रिड को एक जरूरी ‘ट्रांजिशन व्हीकल’ मान रहा है, जिसके लिए शुरुआती दो साल छूट देकर इसे धीरे-धीरे खत्म करने के फॉर्मूले पर मंथन जारी है. करीब 3,954 करोड़ रुपए के बजट वाली इस नीति में इलेक्ट्रिक वाहनों पर भारी सब्सिडी और पुराने वाहनों की स्क्रैपिंग पर अतिरिक्त लाभ देने के साथ-साथ जनवरी 2027 से नए पेट्रोल-डीजल थ्री-व्हीलर और अप्रैल 2028 से नए पेट्रोल टू-व्हीलर के रजिस्ट्रेशन पर पूरी तरह रोक लगाने जैसे कड़े प्रावधान शामिल हैं.
इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा देने के लिए सरकार इस नई नीति में खजाना खोलने को तैयार है. (AI)
नई दिल्ली. दिल्ली की बहुप्रतीक्षित नई इलेक्ट्रिक व्हीकल (EV) पॉलिसी 2026-2030 लगभग पूरी तरह तैयार हो चुकी है, लेकिन इसकी औपचारिक घोषणा फिलहाल एक बड़े नीतिगत सवाल पर आकर अटक गई है. सरकार के सामने सबसे बड़ा पेंच यह फंसा है कि क्या पूरी तरह से इलेक्ट्रिक वाहनों के साथ-साथ हाइब्रिड गाड़ियों को भी रोड टैक्स में 50 प्रतिशत की बड़ी राहत दी जानी चाहिए या नहीं. करीब 3,954 करोड़ रुपए के अनुमानित बजट वाली यह महत्वाकांक्षी पॉलिसी साल 2030 तक लागू रहनी है, मगर 30 लाख रुपए तक की स्ट्रॉन्ग हाइब्रिड कारों को टैक्स रिबेट देने के प्रस्ताव ने सरकारी विभागों और नीति निर्माताओं के बीच बहस छेड़ दी है.
इस ड्राफ्ट पॉलिसी को लेकर स्टेकहोल्डर्स से लगातार सुझाव मांगे जा रहे हैं और माना जा रहा है कि 15 जुलाई 2026 को सरकार इस पर कोई अंतिम और बड़ा फैसला ले सकती है. फिलहाल सरकार के भीतर दो अलग-अलग राय देखने को मिल रही हैं, जहां एक धड़ा दिल्ली को सीधे ‘फुल EV मॉडल’ पर ले जाने की वकालत कर रहा है, तो वहीं दूसरा पक्ष हाइब्रिड गाड़ियों को इलेक्ट्रिक वाहनों की तरफ बढ़ने का एक व्यावहारिक और जरूरी माध्यम मान रहा है. सूत्रों की मानें तो इस गतिरोध को दूर करने के लिए सरकार हाइब्रिड गाड़ियों को शुरुआती दो साल के लिए 50 प्रतिशत रोड टैक्स रिबेट देने और बाद में इसे धीरे-धीरे खत्म करने के फॉर्मूले पर भी गंभीरता से विचार कर रही है.
हाइब्रिड को ‘ट्रांजिशन व्हीकल’ मानने की दलील
हाइब्रिड गाड़ियों को टैक्स में छूट देने के पक्ष में सबसे बड़ी दलील यह दी जा रही है कि दिल्ली में अभी भी चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर काफी सीमित है. ऐसी स्थिति में मध्यमवर्ग और लंबी दूरी तय करने वाले खरीदारों के लिए सीधे पूरी तरह से इलेक्ट्रिक कार अपनाना व्यावहारिक रूप से आसान नहीं है. चूंकि, स्ट्रॉन्ग हाइब्रिड वाहन सामान्य पेट्रोल कारों की तुलना में काफी कम प्रदूषण फैलाते हैं और ईंधन की बचत भी करते हैं, इसलिए इन्हें एक ‘ट्रांजिशन व्हीकल’ के तौर पर अस्थायी राहत देना राजधानी के पर्यावरण और उपभोक्ताओं दोनों के हित में हो सकता है.
नई पॉलिसी के कड़े प्रावधान
इस नीतिगत गतिरोध के इतर, ड्राफ्ट पॉलिसी में दिल्ली को प्रदूषण मुक्त बनाने के लिए कई बेहद सख्त और बड़े कदम प्रस्तावित किए गए हैं. नीति के तहत जनवरी 2027 से दिल्ली में नए पेट्रोल और डीजल थ्री-व्हीलर्स के रजिस्ट्रेशन पर पूरी तरह रोक लगाने की तैयारी है. इसके ठीक बाद, 1 अप्रैल 2028 से राजधानी में नए पेट्रोल टू-व्हीलर्स का रजिस्ट्रेशन भी हमेशा के लिए बंद कर दिया जाएगा, जो दिल्ली के ऑटोमोबाइल बाजार की पूरी तस्वीर को बदलने वाला साबित होगा.
खरीदारों को मिलेंगे बंपर इंसेंटिव
इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा देने के लिए सरकार इस नई नीति में खजाना खोलने को तैयार है. ड्राफ्ट के मुताबिक, 30 लाख रुपए तक की इलेक्ट्रिक कारों पर 100 प्रतिशत रोड टैक्स की छूट दी जाएगी. इसके अलावा इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर्स पर 30,000 रुपए तक, इलेक्ट्रिक थ्री-व्हीलर्स पर 50,000 रुपए तक और इलेक्ट्रिक गुड्स व्हीकल्स (मालवाहक वाहनों) पर 1 लाख रुपए तक का सीधा इंसेंटिव देने का प्रस्ताव है. इतना ही नहीं, अगर कोई ग्राहक अपने पुराने BS-IV वाहन को स्क्रैप करके नया इलेक्ट्रिक वाहन खरीदता है, तो उसे 1 लाख रुपए तक का अतिरिक्त लाभ भी दिया जाएगा.
यूपी मॉडल से सीख
इस फैसले को लेते समय दिल्ली सरकार पड़ोसी राज्य उत्तर प्रदेश के अनुभवों और आंकड़ों का भी बारीकी से अध्ययन कर रही है. उत्तर प्रदेश में हाइब्रिड वाहनों को रोड टैक्स में राहत दिए जाने के बाद वहां इनकी बिक्री में लगभग 150 प्रतिशत का भारी उछाल देखा गया था. उस दौरान दिल्ली के तमाम खरीदार टैक्स बचाने के लिए यूपी का रुख कर रहे थे और अपनी गाड़ियां वहीं से रजिस्टर करवा रहे थे. ऑटो सेक्टर के जानकारों का मानना है कि यदि दिल्ली सरकार भी हाइब्रिड गाड़ियों को 50 प्रतिशत टैक्स रिबेट देने के प्रस्ताव को मंजूरी दे देती है, तो पूरे एनसीआर (NCR) के खरीदार दिल्ली का रुख करेंगे, जिससे पड़ोसी राज्यों में जा रहा राजस्व वापस दिल्ली सरकार के खाते में आने लगेगा.
About the Author
मैं जय ठाकुर, न्यूज18 हिंदी में सीनियर सब-एडिटर के तौर पर अपनी सेवाएं दे रहा हूं. मेरा मुख्य काम बिजनेस की पेचीदा खबरों को आसान भाषा में लोगों तक पहुंचाना है. फिर चाहे वह शेयर बाजार की हलचल हो, देश की इकोनॉमी क…और पढ़ें
