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Swine Flu Alert Ghaziabad : गाजियाबाद में स्वाइन फ्लू की दस्तक के साथ पशुपालन विभाग सतर्क हो गया है. विभाग का कहना है कि पशुपालकों और सूअरों के संपर्क में रहने वाले लोगों को सावधान रहना होगा. जरा सी चूक घातक हो सकती है. लोकल 18 से गाजियाबाद के मुखिया पशु चिकित्सा अधिकारी डॉ. एसपी पांडे ने बताया कि स्वाइन फ्लू पशुओं और मनुष्यों दोनों में होने वाला वायरस जनित रोग है. संक्रमित सूअर के संपर्क में आने से इंसानों में भी रोग फैल सकता है. अगर किसी सूअर को सर्दी-जुकाम, खांसी या बुखार जैसे लक्षण दिखाई दें तो उसे नजरअंदाज न करें. सूअरों की देखभाल करने वाले लोग उनके पास जाते समय मास्क और दस्ताने पहनना गलती से भी न भूलें.
गाजियाबाद. यूपी के गाजियाबाद में सूअरों में स्वाइन फ्लू के मामले सामने आने के बाद पशुपालन विभाग सतर्क हो गया है. विभाग ने पशुपालकों और सूअरों के संपर्क में रहने वाले लोगों को सावधान रहने को कहा है. विभाग के मुताबिक स्वाइन फ्लू वायरस से होने वाली बीमारी है, जो सूअरों में होने के साथ संक्रमित जानवर के संपर्क में आने वाले इंसानों के लिए भी खतरनाक है. ऐसे में सूअर बाड़ों, स्लॉटर हाउस और पशु बाजारों में काम करने वाले लोगों को सतर्क रहने जरूरत है. लोकल 18 से गाजियाबाद के मुखिया पशु चिकित्सा अधिकारी डॉ. एसपी पांडे ने बताया कि स्वाइन फ्लू पशुओं और मनुष्यों दोनों में होने वाली वायरस जनित बीमारी है. यह बीमारी मुख्य रूप से सूअरों में पाई जाती है और संक्रमित सूअर के संपर्क में आने से इंसानों में भी संक्रमण फैल सकता है. बचाव के लिए सावधानी सबसे जरूरी है. विभाग की ओर से सूअर पालकों के लिए आवश्यक दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं.
न छुएं आंख-मुंह
डॉ. एसपी पांडे ने बताया कि अगर किसी सूअर को सर्दी-जुकाम, खांसी या बुखार जैसे लक्षण दिखाई दें तो उसे नजरअंदाज नहीं करें. ऐसे सूअर को तुरंत दूसरे जानवरों से अलग कर दें. पशु चिकित्सक को इसकी जानकारी दें. संक्रमित सूअर के संपर्क में आने से दूसरे सूअरों और उनके आसपास रहने वाले लोगों में भी संक्रमण का खतरा बढ़ सकता है. सूअरों की देखभाल करने वाले लोगों को उनके पास जाते समय मास्क और दस्ताने पहनने की सलाह दी गई है. सूअरों को छूने या उनके बाड़े में काम करने के बाद हाथ-पैर अच्छी तरह साफ करें. हाथ साफ किए बिना आंख, नाक और मुंह को छूने से बचें. बाड़े और आसपास साफ-सफाई जरूरी है.
घबराने की जरूरत नहीं
डॉ. पांडे के मुताबिक, यह जरूरी नहीं है कि संक्रमित सूअर के संपर्क में आने से इंसान संक्रमित ही हो जाए, लेकिन सावधानी बरतना जरूरी है. स्लॉटर हाउस में काम करने वाले लोगों को भी स्वच्छता और सुरक्षा के नियमों का पालन करना चाहिए. अगर सूअर का मांस अच्छी तरह पकाकर खाया जाए तो घबराने की जरूरत नहीं है. विभाग ने पशुपालकों को यह सलाह भी दी है कि फिलहाल दूसरे स्थानों से नए सूअर खरीदकर बाड़े में लाने से बचें. अगर किसी सूअर में बीमारी के लक्षण दिखाई देते हैं तो उसे तुरंत अलग कर पशु चिकित्सक से संपर्क करें. समय पर पहचान, संक्रमित सूअर को अलग रखना और साफ-सफाई ही इस बीमारी के प्रसार को रोकने में सबसे जरूरी कदम हैं.
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प्रियांशु को एक दशक से ज्यादा हो गए पत्रकारिता में. 2015 में भारतीय जनसंचार संस्थान (IIMC), दिल्ली से जर्नलिज्म की पढ़ाई पूरी कर अमर उजाला (प्रिंट, नोएडा ऑफिस) से अपने करियर की शुरुआत की. यहां लंबे समय तक हरिया…
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