नई दिल्ली: उडुपी स्थित पेजावर अधोक्षज मठ के परमाध्यक्ष परमपूज्य श्री श्री विश्वप्रसन्न तीर्थ स्वामी जी महाराज का दिल्ली के वसंत कुंज में एक अनोखा गुरुकुल है. इसका नाम वेदव्यास गुरुकुलम् है. देशभर में मौजूद दूसरे गुरुकुलों से यह गुरुकुल काफी अलग है. इसी वजह से इसे अनोखा गुरुकुल कहा जाता है. इस गुरुकुल की खास बात यह है कि यहां बच्चे महज 7 साल की उम्र में दाखिला लेते हैं. इसके बाद वे यहीं रहकर अपनी पढ़ाई पूरी करते हैं. बच्चे इंटर तक की पढ़ाई करते हैं. इसके बाद डिग्री की पढ़ाई भी यहीं से पूरी करके निकलते हैं.
बच्चों को डिग्री तक की पढ़ाई
आज के समय में शिक्षा काफी महंगी हो गई है. ऐसे में यह गुरुकुल और भी खास बन जाता है. यहां बच्चों को डिग्री तक की पढ़ाई पूरी तरह निशुल्क कराई जाती है. बच्चों के रहने के लिए हॉस्टल की सुविधा भी है. खाने-पीने की व्यवस्था भी गुरुकुल में ही होती है. बच्चे यहीं रहते हैं. यहीं खाना खाते हैं. यहीं सोते हैं. इसके साथ ही यहीं पढ़ाई भी करते हैं. बच्चों को पढ़ाई के साथ अनुशासन और संस्कार भी सिखाए जाते हैं. खास बात यह है कि यहां पारंपरिक शिक्षा के साथ आधुनिक शिक्षा पर भी जोर दिया जाता है. बच्चों को ज्योतिष और कर्मकांड की शिक्षा दी जाती है. इसके साथ ही उन्हें कंप्यूटर और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की जानकारी भी दी जाती है. हिंदी, इंग्लिश, कन्नड़ और संस्कृत जैसी भाषाएं भी पढ़ाई जाती हैं.
अलग-अलग राज्यों से आए 120 बच्चे
श्री श्री विश्वप्रसन्न तीर्थ स्वामी जी महाराज इस गुरुकुल के कुलपति हैं. उन्होंने खास बातचीत में बताया कि इस गुरुकुल की स्थापना करीब 5 साल पहले की गई थी. इसका उद्देश्य बच्चों को पढ़ाई के साथ संस्कार और अनुशासन देना था. उन्होंने बताया कि जब गुरुकुल की शुरुआत हुई थी, तब यहां बच्चों की संख्या काफी कम थी. धीरे-धीरे बच्चों की संख्या बढ़ती गई. आज यहां करीब 120 बच्चे पढ़ाई कर रहे हैं. इन बच्चों में देश के अलग-अलग राज्यों के बच्चे शामिल हैं. उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश और बिहार से भी बच्चे यहां पढ़ने आए हैं. बेंगलुरु से भी बच्चे यहां आकर शिक्षा ले रहे हैं.
बच्चों को चारों वेदों का ज्ञान
गुरुकुल के प्रिंसिपल यानी प्रधानाचार्य डॉ. आर. विट्टोबाचार ने बताया कि यह गुरुकुल सेंट्रल संस्कृत यूनिवर्सिटी से जुड़ा हुआ है. यहां बच्चे 7 साल की उम्र में आते हैं. इसी उम्र से उनकी पढ़ाई शुरू हो जाती है. बच्चे इंटर तक की पढ़ाई यहीं करते हैं. इसके बाद डिग्री की पढ़ाई भी यहीं से पूरी करते हैं. बच्चे सेंट्रल संस्कृत यूनिवर्सिटी के माध्यम से अपने कोर्स का चुनाव करते हैं. इसके बाद उसी के अनुसार उनकी पढ़ाई कराई जाती है. उन्होंने बताया कि जब कोई बच्चा गुरुकुल में दाखिला लेने आता है तो सबसे पहले उसका टेस्ट लिया जाता है. इसके बाद उसकी पढ़ाई शुरू होती है. बच्चों को चारों वेदों का ज्ञान दिया जाता है.
ज्योतिष और कर्मकांड की शिक्षा
इसके अलावा व्याकरण, ज्योतिष और कर्मकांड की शिक्षा भी दी जाती है. साथ ही कंप्यूटर की पढ़ाई भी होती है. बच्चों को हिंदी, इंग्लिश, कन्नड़ और संस्कृत जैसी भाषाएं भी सिखाई जाती हैं. गुरुकुल का नाम वैदिक वेदान्तिक स्टडीज एंड रिसर्च इंस्टिट्यूट भी है. यहां पर वैदिक शिक्षा के साथ आधुनिक विषयों को भी पढ़ाने पर जोर दिया जाता है.
पढ़ाई से लेकर हॉस्टल तक निशुल्क
श्री श्री विश्वप्रसन्न तीर्थ स्वामी जी महाराज ने बताया कि गुरुकुल में बच्चों के लिए हॉस्टल की सुविधा भी उपलब्ध है. यहां बच्चों के रहने और खाने-पीने की व्यवस्था निशुल्क है. उनकी पढ़ाई के लिए भी कोई फीस नहीं ली जाती है. उन्होंने बताया कि जो लोग अपनी आस्था के अनुसार गुरुकुल की मदद करना चाहते हैं, वे अपनी इच्छा से सहयोग करते हैं. इसी सहयोग से गुरुकुल की व्यवस्थाओं को चलाने में मदद मिलती है. गुरुकुल में रहने वाले छात्रों से भी बातचीत की गई. उत्कर्ष ने बताया कि वह कानपुर के रहने वाले हैं. वह साल 2024 में इस गुरुकुल में आए थे.
गुरुकुल सामान्य स्कूलों से काफी अलग
उत्कर्ष के मुताबिक, यह गुरुकुल सामान्य स्कूलों से काफी अलग है. उन्होंने बताया कि स्कूल में मुख्य रूप से पढ़ाई पर ध्यान दिया जाता है. यहां पढ़ाई के साथ संस्कार और अनुशासन भी सिखाया जाता है. उत्कर्ष ने बताया कि उनके पिता प्रॉपर्टी डीलर हैं. उनकी मां सरकारी नौकरी करती हैं. उनके माता-पिता चाहते तो उन्हें किसी बड़े कॉन्वेंट स्कूल में पढ़ा सकते थे. इसके बावजूद उन्होंने गुरुकुल को चुना. उत्कर्ष का कहना है कि वह इस फैसले से काफी खुश हैं.
हिंदी और इंग्लिश के साथ कंप्यूटर
वहीं श्रेष्ठ और अमृतराज ने गुरुकुल की दिनचर्या के बारे में बताया. उन्होंने कहा कि यहां सुबह करीब 5 बजे उठना होता है. रोजमर्रा के काम भी खुद करने होते हैं. दोनों ने बताया कि गुरुकुल में कई तरह की शिक्षा एक साथ दी जाती है. यहां हिंदी और इंग्लिश के साथ कंप्यूटर की पढ़ाई होती है. आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की जानकारी भी दी जाती है. इसके साथ संस्कृत और वैदिक शिक्षा भी मिलती है.
गुरुकुल में उन्हें घर जैसा माहौल
छात्रों का कहना है कि एक ही जगह पर इतनी अलग-अलग तरह की शिक्षा मिलना काफी खास है. उनके मुताबिक, ऐसा कोई दूसरा स्कूल या संस्थान मिलना मुश्किल है, जहां एक ही छत के नीचे परंपरागत शिक्षा और आधुनिक शिक्षा का इतना बड़ा मिश्रण देखने को मिले. वहीं प्रणव और मानस ने बताया कि वे दोनों लंबे समय से इस गुरुकुल में रह रहे हैं. उनकी पढ़ाई भी यहीं से चल रही है. आगे वे यहीं से अपनी डिग्री पूरी करके निकलेंगे. दोनों छात्रों ने बताया कि गुरुकुल में उन्हें घर जैसा महसूस होता है. यहां पढ़ाई के साथ रहने और जीवन जीने का तरीका भी सिखाया जाता है. छात्रों के मुताबिक, ऐसा अनोखा गुरुकुल कहीं और देखने को मिलना मुश्किल है.
