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Cow Care Tips: छत्तीसगढ़ के सरगुजा जिले में पशुपालकों को आत्मनिर्भर बनाने और दूध उत्पादन बढ़ाने के लिए डॉ. सलमा मिंज ने महत्वपूर्ण सुझाव दिए हैं. उन्होंने अच्छी नस्ल के पशुओं के चयन, हरे चारे, मिनरल मिक्सचर और समय पर कृमिनाशक दवा देने पर जोर दिया है, ताकि डेयरी से मुनाफा बढ़ाया जा सके.
Surguja News: छत्तीसगढ़ के सरगुजा जिले में पशुपालकों के लिए दूध उत्पादन बढ़ाने और आत्मनिर्भर बनने का एक शानदार अवसर है. जिला प्रशासन और विशेषज्ञों द्वारा इसके लिए कुछ महत्वपूर्ण सुझाव दिए गए हैं. इन सुझावों पर अमल करके पशुपालक अपनी डेयरी को अधिक मुनाफेदार और आर्थिक रूप से मजबूत हो सकते हैं.
पशुपालन विभाग की डॉ. सलमा मिंज ने इस संबंध में पशुपालकों को कई जरूरी बातें बताई हैं. उनका कहना है कि दूध उत्पादन में वृद्धि के लिए वैज्ञानिक तरीकों को अपनाना बेहद जरूरी है. इसमें मुख्य रूप से हरा चारा, मिनरल मिक्सचर, नियमित कृमिनाशक दवा और अच्छी नस्ल के पशुओं का चयन शामिल है. साथ ही दूध उत्पादन बढ़ाने के लिए कुछ कीटनाशकों के उपयोग का सुझाव भी दिया गया है.
संतुलित आहार: हरा चारा और मिनरल मिक्सचर
डॉ. सलमा मिंज के अनुसार, दूध का उत्पादन बढ़ाने में हरे चारे की भूमिका बहुत बड़ी है. लेकिन, केवल हरा चारा खिलाने से दूध में अपेक्षित वृद्धि नहीं मिल पाएगी. पशुपालकों को चाहिए कि वे हरे चारे के साथ पशुओं को मिनरल मिक्सचर भी अवश्य खिलाएं. जब इन दोनों का संतुलित कॉम्बिनेशन पशुओं को मिलता है तो यह उनके स्वास्थ्य के लिए बहुत फायदेमंद होता है. इससे दूध का उत्पादन भी तेजी से बढ़ता है.
नियमित डी-वॉर्मिंग है बेहद जरूरी
पशुओं को बीमारियों से बचाने और उनके पाचन को दुरुस्त रखने के लिए डॉ. सलमा ने समय-समय पर कृमिनाशक दवा देने की सलाह दी है. इसे डी-वॉर्मिंग की प्रक्रिया भी कहा जाता है. सामान्य रूप से हर तीन महीने में पशुओं को कृमिनाशक दवा दी जानी चाहिए. लेकिन, गर्भवती पशुओं को लेकर विशेष सावधानी बरतने की जरूरत है. गर्भवती पशु को कोई भी दवा देने से पहले हमेशा किसी योग्य पशु चिकित्सक की सलाह जरूर लें.
अच्छी नस्ल के पशुओं का चुनाव करें
डेयरी व्यवसाय की सफलता इस बात पर निर्भर करती है कि आपके पास किस नस्ल के पशु हैं. डॉ. सलमा के अनुसार, गाय या भैंस कितना दूध देगी, यह काफी हद तक उसकी नस्ल, देखभाल और आहार पर निर्भर करता है. स्थानीय नस्ल के पशुओं से बहुत अधिक दूध मिलने की उम्मीद रखना उचित नहीं है. इसलिए पशुपालकों को अच्छी नस्ल के पशुओं का ही चयन करना चाहिए.
विभिन्न नस्लों के विकल्प
भैंसों में मुर्रा जैसी नस्ल अच्छी दूध उत्पादन क्षमता के लिए जानी जाती है. गायों में गिर, साहीवाल, जर्सी और रेड सिंधी जैसी नस्लों को भी पशुपालक अपनी जरूरत और स्थानीय परिस्थितियों के अनुसार चुन सकते हैं. साहीवाल जैसी अच्छी नस्ल की गाय उचित रखरखाव और आहार मिलने पर प्रतिदिन 8 से 12 लीटर तक दूध दे सकती है, हालांकि वास्तविक उत्पादन पशु की देखभाल और अन्य परिस्थितियों पर निर्भर करता है.
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एक दशक से अधिक समय से पत्रकारिता में सक्रिय. प्रिंट मीडिया से शुरुआत. साल 2023 से न्यूज 18 हिंदी के साथ डिजिटल सफर की शुरुआत. न्यूज 18 के पहले दैनिक जागरण, अमर उजाला में रिपोर्टिंग और डेस्क पर कार्य का अनुभव. म…
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