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Noida Chhalera News: सुप्रीम कोर्ट ने नोएडा के छलेरा बांगर गांव के करीब 600 जमीन मालिकों को एक ऐतिहासिक और बहुत बड़ी राहत दी है. शीर्ष अदालत ने 1991 में अधिग्रहित जमीन का मुआवजा 340 रुपये से बढ़ाकर 403 रुपये प्रति वर्ग गज कर दिया है. चीफ जस्टिस की अगुवाई वाली तीन सदस्यीय पीठ ने प्राधिकरण को तीन महीने के भीतर बढ़े हुए मुआवजे का भुगतान करने का निर्देश दिया है. याचिकाकर्ता के वकील डॉ. राजीव शर्मा की दलील थी कि समान परिस्थितियों वाले जमीन मालिकों को संविधान के अनुच्छेद 14 के तहत समान मुआवजा मिलना चाहिए, जिसे अदालत ने स्वीकार कर लिया.
सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर अब नोएडा छलेरा के जमीन मालिकों को मिलेगी भारी मुआवजा. (फाइल फोटो)
Noida News: उत्तर प्रदेश के गौतम बुद्ध नगर जिले के नोएडा से किसानों और जमीन मालिकों के लिए एक बेहद राहत भरी और बड़ी खबर सामने आई है. देश के सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने नोएडा के छलेरा बांगर गांव के करीब 600 जमीन मालिकों की अर्जियों को मंजूर करते हुए उन्हें एक बहुत बड़ी कानूनी राहत प्रदान की है. शीर्ष अदालत ने साल 1991 में अधिग्रहित की गई इनकी जमीन के मुआवजे की दर को 340 रुपये प्रति वर्ग गज से बढ़ाकर सीधे 403 रुपये प्रति वर्ग गज कर दिया है. इस फैसले के आने के बाद से प्रभावित किसानों और उनके परिवारों में खुशी की लहर दौड़ गई है.
भारत के प्रधान न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहना की महत्वपूर्ण तीन सदस्यीय पीठ ने इस मामले की सुनवाई करते हुए यह ऐतिहासिक आदेश पारित किया है. सुप्रीम कोर्ट ने नोएडा प्राधिकरण (Noida Authority) को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि वह सभी प्रभावित जमीन मालिकों के मामलों की नए सिरे से गणना करे और आगामी तीन महीने के भीतर बढ़ा हुआ मुआवजा समय पर अदा करे. कोर्ट के इस कड़े रुख से नोएडा प्राधिकरण को किसानों के बकाए भुगतान को लेकर प्रशासनिक स्तर पर तेजी दिखानी होगी.
वकीलों की जोरदार बहस और समानता का अधिकार
सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता जमीन मालिकों की पैरवी कर रहे वरिष्ठ अधिवक्ता डॉ. राजीव शर्मा ने अदालत के सामने बेहद मजबूत और ठोस पक्ष रखा. उन्होंने दलील दी कि भारतीय संविधान का अनुच्छेद 14 हर नागरिक को समानता का अधिकार देता है. ऐसी स्थिति में, यदि समान परिस्थितियों और एक ही अधिसूचना के तहत जमीन गंवाने वाले अन्य जमीन मालिकों को उच्च मुआवजा मिल चुका है, तो इन किसानों के साथ भेदभाव नहीं किया जा सकता. डॉ. राजीव शर्मा ने 10 जुलाई 2024 के सुप्रीम कोर्ट के उस ऐतिहासिक फैसले का हवाला दिया, जिसमें छलेरा गांव के ही कुछ अन्य मामलों में मुआवजा 340 रुपये से बढ़ाकर 403 रुपये प्रति वर्ग गज तय किया गया था.
दूसरी ओर, नोएडा प्राधिकरण की ओर से पेश हुए वरिष्ठ वकील रविन्द्र कुमार ने इन अर्जियों का पुरजोर विरोध किया. उनका मुख्य तर्क था कि चूंकि ये भूमि-मालिक पहले ही 340 रुपये प्रति वर्ग गज की दर से मुआवजा स्वीकार कर चुके हैं और मामला दशकों पुराना है, इसलिए इतने लंबे समय बाद नए सिरे से अधिक मुआवजे की मांग की अनुमति नहीं दी जानी चाहिए. हालांकि, अदालत ने प्राधिकरण की इन आपत्तियों को खारिज कर दिया और समानता के अधिकार को सर्वोपरि मानते हुए जमीन मालिकों के पक्ष में फैसला सुनाया.
क्या रहा है इस भूमि अधिग्रहण का पूरा इतिहास?
इस पूरे भूमि अधिग्रहण मामले का कानूनी सफर काफी लंबा और संघर्षपूर्ण रहा है. छलेरा बांगर गांव में जमीन अधिग्रहण की मूल अधिसूचना 5 जनवरी 1991 को जारी की गई थी. उस वक्त विशेष भूमि अधिग्रहण अधिकारी ने महज 110 रुपये प्रति वर्ग गज मुआवजा तय किया था. इसके खिलाफ किसान अदालत गए, जिसके बाद रिफरेंस कोर्ट ने इसे बढ़ाकर 233 रुपये और 19 मई 2010 को हाईकोर्ट ने इसे 340 रुपये प्रति वर्ग गज कर दिया था. नोएडा प्राधिकरण ने इसके खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में विशेष अनुमति याचिकाएं (SLP) दायर की थीं, जो 5 फरवरी 2014 को खारिज हो गईं.
बाद में इसी गांव की इसी अधिसूचना से जुड़े ‘बीर सिंह मामले’ में सुप्रीम कोर्ट ने मुआवजा बढ़ाकर 449 रुपये कर दिया था. इसके बाद हरनंद सिंह मामला भी सुप्रीम कोर्ट पहुंचा. अंततः, 10 जुलाई 2024 के फैसले में सुप्रीम कोर्ट ने पूरे अधिग्रहित क्षेत्र के लिए 403 रुपये प्रति वर्ग गज की दर तय कर दी थी. इसी फैसले को आधार बनाकर किसानों ने करीब 49 अर्जियां दाखिल की थीं, जिन्हें अब सुप्रीम कोर्ट ने स्वीकार करते हुए यह बड़ा आदेश जारी किया है. इस फैसले से क्षेत्र के 600 से अधिक जमीन मालिकों को सीधा लाभ पहुंचेगा.
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सिविल सर्विसेज की तैयारी करते-करते कब 4 साल पहले पत्रकारिता की ओर झुकाव हो गया पता ही नहीं चला. नाम दीप राज दीपक है. वर्तमान में News18 हिंदी के साथ जुड़े हुए हैं. पद सब-एडिटर …
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