नई दिल्ली: सत्य निकेतन में भरभराकर गिरी इमारत ने कई परिवारों की खुशियां छीन लीं. इस हादसे में अभिषेक, युवराज और पवन समेत कई लोगों की जान चली गई. हादसे के बाद अब उस शख्स की बात सामने आई है, जिसने दावा किया है कि उसने इमारत गिरने से करीब डेढ़ घंटे पहले ही खतरे को भांप लिया था. उसने मजदूरों को काम रोकने के लिए कहा था और आसपास के लोगों को वहां से दूर जाने की चेतावनी भी दी थी लेकिन उसकी बात नहीं सुनी गई.
सोशल मीडिया पर वायरल एक शख्स जो अपना नाम जवाहर शाह बता रहा है वह पेशे से प्लंबर है और सत्य निकेतन की उसी कॉलोनी में काम करते हैं. वायरल वीडियो में जवाहर का कहना है कि अगर समय रहते उनकी चेतावनी को गंभीरता से लिया जाता तो शायद यह हादसा टाला जा सकता था और अभिषेक, युवराज, पवन समेत कई जिंदगियां बच सकती थीं.
‘मत तोड़ो, बिल्डिंग गिर जाएगी…’
जवाहर शाह ने बताया कि इमारत के ग्राउंड फ्लोर पर काम चल रहा था. वहां तीन-चार शटर लगे हुए थे और एक ईंट के पिलर को तोड़ा जा रहा था. जवाहर के मुताबिक, उन्होंने मजदूर को पिलर तोड़ने से मना किया. उन्होंने कहा कि उन्होंने मजदूर से साफ कहा था कि ‘मत तोड़, ये बिल्डिंग गिर जाएगी.’ जवाहर के मुताबिक, वहां काम कर रहे मिस्त्री ने उनकी बात को गंभीरता से नहीं लिया. उसने कहा कि बीम डाली हुई है, इसलिए बिल्डिंग नहीं गिरेगी. लेकिन जवाहर को खतरा नजर आ रहा था. उन्होंने आसपास मौजूद लोगों को भी आगाह करना शुरू कर दिया.
‘मैंने आसपास के लोगों से कहा- दूर रहो’
वायरल वीडियो में जवाहर बताते हैं कि उन्होंने सामने राशन की दुकान चलाने वाले सुनील, बिजली की दुकान से जुड़े रमेश और उसके बेटे शिवम समेत करीब 10 लोगों को चेतावनी दी. उनका कहना था कि ‘बिल्डिंग गिरने वाली है, दूर रहना.’ जवाहर के मुताबिक, इस चेतावनी के करीब डेढ़ घंटे के अंदर ही इमारत भरभराकर गिर गई. यानी जिस खतरे को वह अपनी आंखों के सामने देख रहे थे, वही कुछ देर बाद एक बड़े हादसे में बदल गया.
‘मजदूर पिलर तोड़ रहा था’
जवाहर शाह के मुताबिक, इमारत के नीचे पहले से बेसमेंट बनी हुई थी. बाद में उसे भरकर उसके ऊपर निर्माण किया जा रहा था. उनका दावा है कि ग्राउंड फ्लोर पर निर्माण के दौरान बीच के एक पिलर को तोड़ा जा रहा था. जवाहर का कहना है कि पिलर हटाने के बाद इमारत का संतुलन बिगड़ा और देखते ही देखते पूरी बिल्डिंग नीचे आ गई. हालांकि, इमारत गिरने की वास्तविक वजह क्या थी यह जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा.
‘हमने मलबे से चार शव निकाले’
जवाहर के लिए यह हादसा सिर्फ आंखों के सामने एक इमारत गिरने की घटना नहीं थी. उन्होंने बताया कि बिल्डिंग गिरने के बाद वह खुद मलबे में फंसे लोगों को निकालने के लिए पहुंचे. उनके मुताबिक, स्थानीय लोगों ने मिलकर मलबा हटाना शुरू किया. इस दौरान चार शवों को बाहर निकाला गया. जवाहर कहते हैं कि उस वक्त जो भी संभव था, स्थानीय लोगों ने मिलकर किया. हाथों से मलबा हटाया, ईंटें तोड़ीं और लोगों को बाहर निकालने की कोशिश की लेकिन हर गुजरते मिनट के साथ उम्मीद कम होती जा रही थी.
‘सबसे बड़ी लापरवाही मालिक की’
इमारत गिरने के लिए जिम्मेदार कौन है? इस सवाल पर जवाहर ने सीधे तौर पर मालिक की लापरवाही को सबसे बड़ी वजह बताया. उन्होंने आरोप लगाया कि निर्माण का काम किसी व्यवस्थित ठेकेदार या पेशेवर एजेंसी के जरिए नहीं कराया जा रहा था, बल्कि स्थानीय मजदूरों के जरिए काम चल रहा था. हालांकि इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि होना अभी बाकी है और हादसे की जिम्मेदारी तय करना जांच एजेंसियों का काम है.
‘ऐसी इमारतें और भी बहुत हैं’
जवाहर का दावा है कि सत्य निकेतन और आसपास के इलाकों में ऐसी कई इमारतें हैं, जहां निर्माण और बदलाव का काम इसी तरह किया जाता है. उन्होंने सवाल उठाया कि अगर एक इमारत में ऐसी लापरवाही से लोगों की जान जा सकती है तो क्या बाकी इमारतों की भी जांच नहीं होनी चाहिए? उनके मुताबिक, अब इस घटना की जिम्मेदारी एमसीडी और पुलिस प्रशासन को तय करनी चाहिए और ऐसी इमारतों की जांच होनी चाहिए.
हादसे के बाद पहुंची रेस्क्यू टीम
जवाहर के मुताबिक, स्थानीय लोग हादसे के तुरंत बाद राहत और बचाव के काम में जुट गए थे. उनका दावा है कि करीब डेढ़ से दो घंटे बाद प्रशासन की टीम वहां पहुंची और इसके बाद स्थानीय लोगों को वहां से हटा दिया गया. तब तक स्थानीय लोग अपने स्तर पर मलबा हटाकर लोगों को बाहर निकालने की कोशिश कर रहे थे.
