एक अंगूठा…और 73 साइबर अपराध, CBI ने वैशाली के Airtel डिस्ट्रीब्यूटर को पकड़ा, साइबर फ्रॉड पर बड़ा पर्दाफाश

Last Updated:

Bihar Cyber Crime: CBI ने साइबर ठगी के लिए अवैध SIM कार्ड मामले में बिहार-ओडिशा में 10 ठिकानों पर छापेमारी की. एक Airtel डिस्ट्रीब्यूटर गिरफ्तार, जिसने फर्जी SIM जारी किए. जांच सुपौल में मिले 1300+ SIM वाले SIM Box से शुरू हुई, जो 73 साइबर अपराधों से जुड़ा था.

ख़बरें फटाफट

CBI ने साइबर ठगी के लिए अवैध SIM कार्ड मामले में बिहार-ओडिशा में 10 ठिकानों पर छापेमारी की. (सांकेतिक फोटो-एआई)

पटना: साइबर ठगी के लिए अवैध तरीके से SIM कार्ड मुहैया कराने के मामले में केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने बड़ी कार्रवाई की है. CBI ने बिहार के वैशाली और ओडिशा के जगतसिंहपुर जिले में कुल 10 ठिकानों पर छापेमारी की. इस दौरान बड़ी संख्या में SIM कार्ड, मोबाइल फोन, लैपटॉप और अन्य डिजिटल डिवाइस बरामद किए गए हैं. CBI ने इस मामले में महुआ, वैशाली के एक Airtel एरिया डिस्ट्रीब्यूटर को गिरफ्तार किया है. जांच एजेंसी का आरोप है कि डिस्ट्रीब्यूटर ने कथित तौर पर बड़ी संख्या में SIM कार्ड फर्जी तरीके से जारी करवाए और उन्हें अवैध SIM Box संचालकों तक पहुंचाया.

सुपौल में मिला था 1300 से ज्यादा SIM कार्ड वाला SIM Box
मामले की जांच की शुरुआत बिहार के सुपौल जिले में सामने आए एक अवैध SIM Box से हुई थी. पिछले साल एक घर में चलाए जा रहे SIM Box का पता चला था. वहां से 1300 से ज्यादा SIM कार्ड बरामद किए गए थे. इसके बाद बिहार सरकार ने मामले की जांच CBI को सौंप दी. जांच आगे बढ़ने पर CBI को पता चला कि यह SIM Box देशभर में साइबर अपराध के कम से कम 73 मामलों से जुड़ा हुआ था. इनमें ‘डिजिटल अरेस्ट’ के नाम पर की जाने वाली साइबर ठगी के मामले भी शामिल थे.

1300 से ज्यादा SIM कार्ड की जांच में सामने आया नेटवर्क
CBI ने बरामद 1300 से ज्यादा SIM कार्ड से जुड़े डेटा की विस्तृत जांच की. इस दौरान एजेंसी ने ऐसे SIM विक्रेताओं और Point of Sale (POS) की पहचान की. जहां से बड़ी संख्या में SIM कार्ड जारी किए गए थे. जांच में सामने आया कि इनमें से ज्यादातर SIM कार्ड बिहार और ओडिशा से जारी किए गए थे. इनमें 700 से ज्यादा SIM कार्ड वैशाली के एक Airtel एरिया डिस्ट्रीब्यूटर से जारी होने की जानकारी सामने आई. CBI का आरोप है कि डिस्ट्रीब्यूटर ने वैशाली के एक दर्जन से ज्यादा SIM विक्रेताओं के लॉगिन और पहचान संबंधी जानकारी का कथित तौर पर दुरुपयोग किया और बड़ी संख्या में SIM कार्ड जारी कर दिए.

कई लोगों को पता ही नहीं था कि उनके नाम पर जारी हुआ SIM
जांच में यह भी सामने आया कि कई लोगों को इस बात की जानकारी नहीं थी कि उनके नाम पर SIM कार्ड जारी किया गया है. CBI के मुताबिक कुछ मामलों में लोगों को किसी वैध काम के लिए SIM कार्ड लेने के दौरान कई बार e-KYC कराने के लिए कथित तौर पर बहलाया गया. कुछ मामलों में पहले से लिए गए बायोमेट्रिक डेटा का भी कथित तौर पर गलत इस्तेमाल किया गया. इस तरह जारी किए गए SIM कार्ड बाद में साइबर ठगी के लिए इस्तेमाल होने वाले SIM Box नेटवर्क तक पहुंचाए जाने का आरोप है.

BNS, IT Act और Telecommunications Act के तहत जांच
CBI इस मामले में धोखाधड़ी, जालसाजी, जबरन वसूली, पहचान की चोरी और कंप्यूटर से जुड़े अपराधों समेत विभिन्न धाराओं के तहत जांच कर रही है. जांच में भारतीय न्याय संहिता (BNS), IT Act और Telecommunications Act, 2022 के प्रावधानों को भी शामिल किया गया है. CBI का कहना है कि टेलीकॉम सिस्टम का इस्तेमाल साइबर अपराध के लिए करने वाले लोगों और संस्थाओं के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी.

‘डिजिटल अरेस्ट’ के नाम पर ठगी से रहें सावधान
CBI ने आम लोगों को भी साइबर ठगी से सावधान रहने की सलाह दी है. एजेंसी ने स्पष्ट किया है कि ‘डिजिटल अरेस्ट’ नाम की कोई कानूनी व्यवस्था नहीं है. अगर कोई व्यक्ति खुद को पुलिस, CBI या किसी दूसरी जांच एजेंसी का अधिकारी बताकर फोन करे और पैसे की मांग करे, तो उसके झांसे में न आएं. इसी तरह फर्जी निवेश योजनाओं और अनजान लोगों की ओर से भेजे गए लिंक या संदेशों से भी सावधान रहने की अपील की गई है.

About the Author

Amit Ranjan

अमित रंजन वर्तमान में News18 में बिहार, झारखंड और दिल्ली से जुड़ी खबरों के समन्वय और संपादन का कार्य देख रहे हैं. खोजी पत्रकारिता उनकी विशेष रुचि का क्षेत्र है. राजनीति, शिक्षा, खेल, क्राईम और मौसम जैसे विषयों …

और पढ़ें

Source link

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *