Last Updated:
Tahir Hussain News: दिल्ली दंगों में IB अधिकारी अंकित शर्मा हत्याकांड में कोर्ट ने ताहिर हुसैन को हत्या की साजिश और उकसावे के आरोपों से बरी कर दिया है. कोर्ट ने कहा कि सबूतों के अभाव में IPC 120B, 505, 109/114 के आरोप साबित नहीं हुए. फिर किस आरोप में ताहिर हुसैन को कोर्ट ने दोषी ठहराया है और किन गवाहों के बयानों को कोर्ट ने आधार बनाया है. जानने के लिए पढ़ें पूरी खबर…
ताहिर हुसैन को कैसे अदालत ने 5 साल से ज्यादा चली सुनवाई में दोषी करार दिया
नई दिल्ली: दिल्ली दंगों के दौरान आईबी कर्मचारी अंकित शर्मा की हत्या के मामले में कोर्ट के 320 पेज के फैसले में कई अहम बातें सामने आई है. इस केस में पूर्व पार्षद ताहिर हुसैन पर बेहद गंभीर आरोप साबित हुए. किसी गवाह ने ताहिर को भीड़ में देखने की बात कही, तो किसी ने उसके हाथ में चाकू होने का दावा किया तो किसी ने कहा कि वह ‘मारो-मारो’ बोलकर भीड़ को उकसा रहा था लेकिन कोर्ट ने हर गवाह और सबूत को अलग-अलग कसौटी पर परखा. आखिर जज ने ताहिर हुसैन के खिलाफ कौन से आरोप सही माने, किन दावों पर भरोसा नहीं किया और अंकित शर्मा की हत्या को लेकर क्या बड़े निष्कर्ष निकाले? निचली अदालत ने 320 पेज के फैसले में ताहिर हुसैन को लेकर क्या-क्या कहा जानें…
1- ताहिर हुसैन की दंगे वाली भीड़ में मौजूदगी पर कोर्ट ने भरोसा किया: PW-56 की गवाही का मूल्यांकन करते हुए जज ने माना कि गवाह उस जगह से ताहिर के घर और आसपास फैली भीड़ को देख सकती थी. कोर्ट ने कहा कि यदि ताहिर अपने घर के पास भीड़ में मौजूद था, तो गवाह के लिए उसे देखना संभव था.
2- ताहिर के इशारों से भीड़ को भड़काने की बात कोर्ट ने तथ्य नहीं मानी: PW-56 ने कहा था कि ताहिर इशारों से भीड़ को उकसा रहा था, लेकिन जज ने कहा कि गवाह ने उन इशारों की कोई डिटेल नहीं दी . इसलिए यह गवाह की राय हो सकती है, अदालत द्वारा स्थापित तथ्य नहीं.
3- PCR कॉल में ताहिर का नाम नहीं होना, गवाही खारिज करने के लिए पर्याप्त नहीं माना गया: बचाव पक्ष ने कहा था कि PW-56 ने अपनी PCR कॉल में ताहिर का नाम नहीं लिया. जज ने इस दलील को स्वीकार नहीं किया और कहा कि इसे गवाह की गवाही में ऐसा सुधार नहीं माना जा सकता, जिससे पूरी गवाही अविश्वसनीय हो जाए.
4- गवाह का बयान देर से दर्ज होना भी उसकी विश्वसनीयता खत्म नहीं करता: कोर्ट ने कहा कि PW-56 का बयान देर से दर्ज करने के लिए जांच अधिकारी को जवाब देना चाहिए था. IO की देरी का असर अपने-आप गवाह की विश्वसनियता पर नहीं डाला जा सकता.
5- एक महत्वपूर्ण गवाह ने ताहिर को अंकित शर्मा की हत्या के समय वहां देखने की पुष्टि नहीं की: PW-19 विकल्प कोचर ने अदालत में कहा कि उसने घटना वाले दिन दोपहर 3 बजे से शाम 6 बजे के बीच ताहिर हुसैन को नहीं देखा था. उसने ताहिर को शाम 6 बजे के बाद देखा था, लेकिन समय स्पष्ट नहीं कर सका.
6- PW-19 ने ताहिर द्वारा भीड़ को अंकित शर्मा की हत्या के लिए उकसाने की बात से इनकार किया: गवाह ने इस सुझाव को स्वीकार नहीं किया कि उसने ताहिर को भीड़ को अंकित शर्मा की हत्या के लिए भड़काते देखा था. यह अभियोजन के उकसावे वाले आरोप के लिए महत्वपूर्ण झटका था.
About the Author
अरुण बिंजोला इस वक्त न्यूज 18 में बतौर एसोसिएट एडिटर अपनी सेवाएं दे रहे हैं. वह करीब 15 सालों से पत्रकारिता में सक्रिए हैं और पिछले 10 सालों से डिजिटल मीडिया में काम कर रहे हैं. करीब एक साल से न्यूज 1…और पढ़ें
खबरें पढ़ने का बेहतरीन अनुभव
