Who is Razaullah: फटे जूते, ट्रकों की धूल और मजदूर भाई की वो जिद, जिसने पाकिस्तान को दिया क्रिकेटर रजाउल्लाह

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पाकिस्तान के सुदूर गांव वारी से निकले 21 वर्षीय रजाउल्लाह ने एजबेस्टन में अपने डेब्यू टेस्ट में तहलका मचा दिया. एक ट्रक लोडर भाई के त्याग से क्रिकेट अकादमी पहुंचे रज़ाउल्लाह ने पहले टेस्ट की चौथी गेंद पर दिग्गज जो रूट को आउट किया. इसके बाद 9 गगनचुंबी छक्कों से 81 रनों की तूफानी पारी खेलकर पाकिस्तान को पारी की हार से बचाया. उनकी इस बेखौफ प्रतिभा ने शोएब अख्तर सहित पूरे क्रिकेट जगत को अपना मुरीद बना लिया है. कौन हैं रजाउल्लाह? आइए जानते हैं.

पाकिस्तान के खैबर पख्तूनख्वा प्रांत में अपर दीर के एक छोटे और सुदूर गांव वारी से एक युवा अपनी आंखों में क्रिकेट के बड़े सपने लेकर निकला. इस युवा का नाम है रजाउल्लाह ( Razaullah). तेज गति से गेंदबाजी करने का जुनून और बल्ले से गेंद को सीमा रेखा के पार भेजने की गजब की ताकत, यही उसकी असली पहचान थी. वारी का यह इलाका लोअर दीर के काफी करीब है, जहां से साल 2019 में नसीम शाह जैसे शानदार तेज गेंदबाज का इंटरनेशनल क्रिकेट में उदय हुआ था. रजाउल्लाह भी उसी जुझारू मिट्टी की उपज हैं, जिन्होंने अपने दो बड़े भाइयों के साथ मर्दान शहर में कदम रखा, ताकि वह क्रिकेट की दुनिया में अपनी किस्मत आजमा सकें और अपने परिवार का नाम रोशन कर सकें.

रजाउल्लाह के इस जादुई सफर में उनके बड़े भाई समीउल्लाह का योगदान किसी भी नायक से कम नहीं है. समीउल्लाह खुद एक ट्रक लोडर का काम करते थे और जिंदगी की तमाम आर्थिक दुश्वारियों को बेहद करीब से देख चुके थे. वह कतई नहीं चाहते थे कि उनका छोटा भाई भी उनकी तरह ट्रकों में माल ढोने का काम करे और अपनी जिंदगी यूं ही गुजार दे.इसी सोच और दूरदृष्टि के चलते उन्होंने यह सुनिश्चित किया कि लंबा-चौड़ा और मजबूत कद-काठी वाला उनका भाई मर्दान शहर की क्रिकेट अकादमी में जाए. समीउल्लाह की यही मेहनत और त्याग रज़ाउल्लाह के लिए अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट के दरवाजे खोलने की सबसे पहली और मजबूत ईंट साबित हुई.

साल 2023 की बात है, जब रज़ाउल्लाह अंडर-19 टीम के चयन ट्रायल के लिए पहुंचे। उनके पैरों में जो स्पाइक्स (क्रिकेट के जूते) थे, वे उनके असली साइज से काफी बड़े थे, जो उनकी संघर्षपूर्ण पृष्ठभूमि को बयां कर रहे थे. लेकिन जब उन्होंने रन-अप लेकर अपनी पहली गेंद फेंकी, तो वहां मौजूद हर कोई सन्न रह गया. मर्दान और एबटाबाद के कोच अहमद सईद बताते हैं कि उस पहली ही गेंद की रफ्तार इतनी खौफनाक थी कि सामने खड़ा बल्लेबाज बुरी तरह लड़खड़ा गया. उसकी उस खौफनाक तेज गति को देखकर कोच सईद ने रज़ाउल्लाह को दूसरी गेंद फेंकने से ही तुरंत मना कर दिया, क्योंकि उन्हें इस बात का गहरा डर था कि कहीं यह युवा और अनुभवहीन बल्लेबाज को गंभीर रूप से घायल न कर दे.

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मर्दान की उस अकादमी में रज़ाउल्लाह के भीतर सिर्फ एक ही धुन सवार थी – पाकिस्तान के पूर्व दिग्गज एक्सप्रेस पेसर शोएब अख्तर (Shoaib Akhtar) की तरह बिजली की रफ्तार से गेंदबाजी करना. वह ‘रावलपिंडी एक्सप्रेस’ के इस कदर मुरीद थे कि उन्हें खेलने के लिए सिर्फ और सिर्फ 14 नंबर की जर्सी ही चाहिए थी, जिसे अपने सुनहरे दौर में अख्तर पहना करते थे. नेशनल टी-20 कप के दौरान रजाउल्लाह ने 14 नंबर की जर्सी के लिए भारी जिद पकड़ ली. जब उन्हें आखिरकार यह जर्सी मिली, तो वह उनके नाप से दो साइज बड़ी थी, फिर भी इस युवा खिलाड़ी की खुशी का कोई ठिकाना नहीं था. उनके इसी जुनून और गेंदबाजी के तरीके को देखकर अकादमी में सभी उन्हें प्यार से ‘शोबी’ बुलाने लगे थे.

रजाउल्लाह की यह असाधारण प्रतिभा ज्यादा दिन तक गुमनाम रहने वाली नहीं थी. क्वेटा में आयोजित एक स्थानीय टी-20 टूर्नामेंट के दौरान पाकिस्तान के पूर्व कोच अब्दुल रहमान की पारखी नजरों ने इस युवा तेज गेंदबाज को पहचान लिया. उन्होंने बिना वक्त गंवाए रज़ाउल्लाह को पाकिस्तान सुपर लीग (PSL) में रावलपिंडी टीम का हिस्सा बना लिया. पीएसएल के बड़े मंच पर अपनी रफ्तार से दिग्गज बल्लेबाजों को परेशान करने के बाद, उनका अगला अहम पड़ाव लाहौर का राष्ट्रीय हाई परफॉर्मेंस सेंटर था. वहां पाकिस्तान के पूर्व तेज गेंदबाज और राष्ट्रीय चयनकर्ता आकिब जावेद ने रज़ाउल्लाह के कौशल को तकनीकी रूप से निखारा और उन्हें उस मुकाम तक पहुंचाया जहां से सीधे इंग्लैंड के लिए उनकी उड़ान तय हुई.

इंग्लैंड के खिलाफ टेस्ट सीरीज में पाकिस्तानी टीम एक बेहद गहरे संकट से गुजर रही थी. पहले दो टेस्ट मैचों में मिली शर्मनाक और अपमानजनक हार के बाद टीम प्रबंधन और खिलाड़ी प्रशंसकों की तीखी आलोचनाओं के घेरे में थे. ऐसे में पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड ने एक बेहद कड़ा और चौंकाने वाला कदम उठाया. टीम से एक साथ सात सीनियर खिलाड़ियों को बाहर का रास्ता दिखा दिया गया और उनकी जगह सात नए चेहरों को ड्राफ्ट किया गया. इन्हीं गुमनाम और अनकैप्ड चेहरों में से एक नाम रज़ाउल्लाह का भी था. एजबेस्टन टेस्ट में उनकी यह अचानक हुई एंट्री किसी भी चमत्कार से कम नहीं थी, जिसने सभी क्रिकेट पंडितों को हैरान कर दिया था.

एजबेस्टन के ऐतिहासिक और प्रतिष्ठित मैदान पर जब 21 वर्षीय रजाउल्लाह ने टेस्ट क्रिकेट में अपना पहला कदम रखा, तो शायद ही किसी को अंदाजा था कि वे क्या कमाल करने वाले हैं. अपनी गेंदबाजी की शुरुआत करते हुए उन्होंने दुनिया के सबसे बेहतरीन और दिग्गज बल्लेबाजों में शुमार जो रूट को अपनी रफ्तार के जाल में फंसा लिया. अपने अंतरराष्ट्रीय करियर की महज चौथी ही गेंद पर जो रूट जैसे महान बल्लेबाज को पवेलियन का रास्ता दिखाकर रज़ाउल्लाह ने साबित कर दिया कि वे विश्व क्रिकेट में राज करने आए हैं. यह एक ऐसा जादुई पल था जिसने इंग्लैंड के दर्शकों से लेकर पूरे क्रिकेट जगत का ध्यान इस युवा पाकिस्तानी खिलाड़ी की ओर खींच लिया.

गेंदबाजी में अपना लोहा मनवाने के बाद जब रज़ाउल्लाह बल्लेबाजी के लिए उतरे, तो पाकिस्तानी टीम एक और पारी की शर्मनाक हार के कगार पर खड़ी थी. लेकिन इस युवा खिलाड़ी ने घुटने टेकने से साफ इनकार कर दिया. उन्होंने बिना किसी खौफ के अंग्रेजी तेज गेंदबाजों और स्पिनरों की धज्जियां उड़ानी शुरू कर दीं. रजाउल्लाह ने ताबड़तोड़ अंदाज में 81 रनों की हैरतअंगेज पारी खेल डाली, जिसमें 9 गगनचुंबी छक्के शामिल थे. उनके बल्ले से निकले कुछ शॉट तो इतने ऊंचे और लंबे थे कि गेंद स्टेडियम के ठीक बगल में बन रहे एक निर्माणाधीन होटल में जाकर गिरी. इस पारी ने न सिर्फ टीम को पारी की हार के गहरे संकट से बचाया, बल्कि टेस्ट क्रिकेट में टी-20 का रोमांच ला दिया.

संकट की उस मुश्किल घड़ी में रजाउल्लाह को मोहम्मद अब्बास का बेहतरीन साथ मिला. नौवें विकेट के लिए दोनों ने मिलकर 121 रनों की बेहद जुझारू और ऐतिहासिक साझेदारी की, जिसने मैच का रुख ही बदल दिया. इस साझेदारी में अब्बास ने भी 42 रनों का एक बेहद महत्वपूर्ण और संयमित योगदान दिया.रजाउल्लाह की इस निडर बल्लेबाजी की गूंज इंग्लैंड के मिडलैंड्स से लेकर उनके गृह नगर खैबर पख्तूनख्वा के मर्दान तक सुनाई दी. मैच के बाद स्काई स्पोर्ट्स से बातचीत में उन्होंने बड़ी ही सादगी और आत्मविश्वास के साथ कहा, ‘मुझे तो बस बल्लेबाजी करनी थी, आप ही वे लोग हैं जिन्हें इसका मजा लेना है.’

रजाउल्लाहके इस चौतरफा और शानदार प्रदर्शन ने दिग्गज क्रिकेटरों को भी उनका मुरीद बना दिया. पूर्व महिला कप्तान और मशहूर कमेंटेटर उरूज मुमताज ने इसे पाकिस्तान की ‘रॉ टैलेंट’ की असली खूबसूरती करार देते हुए कहा कि उसने बिना किसी डर के बल्लेबाजी की और देखने वाले हर शख्स का भरपूर मनोरंजन किया. वहीं, उनके बचपन के आदर्श शोएब अख्तर ने भी टेलीविजन पर खुशी जाहिर करते हुए कहा, ‘उसके इरादे और बेखौफ बल्लेबाजी को देखिए, ठीक इसी जज्बे की पाकिस्तानी टीम को पिछले मैचों में कमी खल रही थी.’ अख्तर ने यह भी स्पष्ट किया कि यह युवा खिलाड़ी पीएसएल और क्रिकेट बोर्ड के सिस्टम की एक शानदार उपज है, और अब यह पूरी तरह से कोचों की जिम्मेदारी है कि वे उसे सही दिशा में आगे बढ़ाएं ताकि वह क्रिकेट की दुनिया पर राज कर सके.

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