नोएडा: देश की अर्थव्यवस्था में टेक्सटाइल्स सेक्टर की अहम भूमिका है और वो भी बीते तीन साल से लगातार इन कारणों से नीचे जा रहा है. एक्सपर्ट और उधमी मनाते हैं कि सरकार ने समय रहते ये कदम नहीं उठाया तो टेक्सटाइल्स व्यापारियों को भारी नुकसान उठाना पड़ सकता है. टेक्सटाइल्स सेक्टर के एक्सपर्ट और कपड़ा व्यापारी ललित ठकराल ने लोकल 18 से खास बातचीत में चौंकाने वाले खुलासे किए.
उनका कहना है कि अमेरिका द्वारा लगाया गया भारी भरकम टैरिफ, फिर हॉर्मूज स्टेट वाली सिचुएशन और फिर एक लाख करोड़ से ज्यादा कॉटन यार्न का हमारे देश से दूसरे देशों में एक्सपोर्ट की वजह से बहुत नुकसान हुआ है. हमारा सेक्टर भी जीडीपी में अहम रोल निभाता है, लेकिन इस बार बहुत तेजी से गिरावट देखने को मिली है.
साढ़े 14 बिलियन पर ही सिमिट कर रह गई ये इंडस्ट्री
ललित ठकराल ने लोकल 18 से बात करते हुए बताया कि कृषि के बाद टेक्सटाइल्स सेक्टर लोगों को रोजगार देता है और ये अपने आप में बहुत बड़ी बात है. पिछले साल 7 प्रतिशत कम हुई थी और उससे पहले 9 प्रतिशत कम एक्सपोर्ट हुई थी. हमें समझ नहीं आ रहा है हम क्या करें. पहले रूस और यूक्रेन का वार, फिर अमेरिका द्वारा लगाए गए भारी टैरिफ, उसके बाद अमेरिका इजरायल और ईरान की वार और इसके ऊपर से लगातार बीते सालों से हमारे देश से बड़ी संख्या में कॉटन यार्न चीन, वियतनाम, बांग्लादेश को एक्सपोर्ट किया जाना, ये डबल ट्रिपल मार है.
भारत में बड़े-बड़े शोरूम में विदेशों का कपड़ा
हम सोच रहे थे कि हम 30 बिलियन पर पंहुच जाएंगे, लेकिन अब हम तो साढ़े 14 बिलियन पर ही सिमिट कर रह गए हैं. हम भी इसे बढ़ाकर जीडीपी में योगदान देना चाहते है, लेकिन सरकार को इसमें हमारी मदद करनी पड़ेगी. आज कच्चा माल बहुत मंहगा होता जा रहा है. हमारे देश से एक लाख दो हजार करोड़ का कॉटन यार्न एक्सपोर्ट हो रहा और उसका कपड़ा बनाकर हमारे देश में भेजा जाता है और उसे मंहगा करके खरीदना हमारी मजबूरी है.
उन्होंने कहा कि आप बड़े-बड़े शोरूम टाटा-जुडियो जैसे शोरूम में चाइना, बांग्लादेश और दूसरे देशों का माल देखेंगे. उसी कॉटन यार्न का, जो हमारी इंडिया से एक्स्पोर्ट होता है. अगर इस यार्न का कपड़ा बनाकर हम सेल करें तो उससे एक तो हमारे यहां रोजगार बढ़ेगा और एक लाख करोड़ की जगह हम तीन लाख करोड़ का कपड़ा बनाकर बेच पाएंगे.
6 महीने के लिए अस्थाई बैन जरूरी
ललित ठकराल ने बताया कि हमारे तीन सीजन खराब हो चुके हैं और अगर सरकार ने इस कॉटन यार्न के एक्स्पोर्ट पर वैन नहीं लगाएगा, तो भारी नुकसान उठाना पड़ेगा. हम ये नहीं चाहते कि आप पूरी तरह हमेशा के लिए बैन कर दो, हम चाहते हैं कि सिर्फ 6 महीने के लिए अस्थाई बैन लगा दो, ताकि हम अगले सीजन की तैयारी कर सकें. हम उनके रेट से कम्पटीशन नहीं कर सकते, क्योंकि वो हमारे यहां से सस्ते में कॉटन यार्न खरीदकर कपड़ा भी सस्ता करके बेच रहे हैं और हमारे लिए पर्याप्त मात्रा में कॉटन यार्न नहीं है.
भारत में खाली बैठे लेबर
ललित ठकराल का कहना है कि कोविड में हमे जो नुकसान हुआ था, उसकी भरपाई हमने बड़ी मेहनत करके की थी. हम बड़ी दुविधा में खड़े हैं, हमारा ही कच्चा माल लेकर हमें मंहगा करके कपड़ा विदेशी भेज रहे हैं और हमारे पास पर्याप्त मात्रा में कॉटन यार्न नहीं है. हमारे देश में अनम्प्लॉयमेंट की कमी है, लेवर खाली बैठे हैं. 80 साल हो गए हमे आजाद हुए और आज भी हम रॉ-मैटेरियल दूसरे देशों को एक्सपोर्ट कर रहे है. हमें उसके वेल्यूएडेड करके बेचना चाहिए. हमारे पास लेवर की कमी नहीं, हमारे पास लेवर खाली बैठे हैं, रोजगार की कमी है.
भारत सरकार का FTA अच्छा कदम
चंद लोगों के मैनिपुलेशन की वजह से ये परेशानी सामने आ रही है, इसमें सरकार को सोचना चाहिए. भारत सरकार ने FTA के जरिए नया रास्ता अपनाया, ये भी अपने आप में अच्छा कदम रहा है. इनका कहना है कि टेक्सटाइल सेक्टर से जो सरकार के सपने हैं, वो तभी पूरे होगें जब ये कच्चा माल एक्सपोर्ट होना बंद होगा. हम छोटे-छोटे देशों में जाकर शो कर रहे और कोशिश कर रहे हैं जो नोएडा के व्यापारियों की एक्सपोर्ट गिर रही है, उसमें सुधार आ सके.
50 से 55 हजार करोड़ का एक्सपोर्ट करता है नोएडा
यूपी में अभी कुल एक्सपोर्ट 60 हजार करोड़ का है, जबकि नोएडा का इसमें योगदान करीब 50-55 हजार करोड़ है. पूरे विश्व में सबसे ज्यादा ऑर्गेनिक कपड़ा हमारे देश में बनता है और हमारा कॉटन यार्न लेकर चाइना उसमें मिक्स करके अमेरिका सहित दूसरे देशों को एक्सपोर्ट कर रहा है. हमारे ही रॉ-मैटेरियल हमे मंहगा मिल रहा है और दूसरे देश इसे सस्ता लेकर उसमें वेल्यूएडेड करके मंहगा करके एक्सपोर्ट कर रहे हैं.
