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बॉलीवुड के दिग्गज फिल्ममेकर सुभाष घई ने अपने करियर, अमिताभ बच्चन के साथ फिल्म ‘देवा’ और राजेश खन्ना के सुपरस्टार बनने को लेकर खुलकर बात की. उन्होंने बताया कि आखिर क्यों 1987 में अमिताभ बच्चन के साथ शुरू हुई फिल्म ‘देवा’ पूरी नहीं हो सकी. साथ ही सुभाष घई ने यह भी कहा कि वह बतौर एक्टर सफल नहीं हो पाए, लेकिन उन्हें इसका कभी मलाल नहीं रहा. उन्होंने बतौर डायरेक्टर कभी किसी सुपरस्टार के साथ काम नहीं किया इस पर भी उन्होंने किशोर अजवाणी के शो ‘कहकर रहेगा कहने वाला’ में खुलकर बात की.
अमिताभ संग कैसे हैं सुभाष घई के रिश्ते
नई दिल्ली. फिल्मी दुनिया में हर किसी का सफर एक जैसा नहीं होता. कितने ऐसे लोग हैं, जो इडंस्ट्री में एक्टर बनने का सपना लेकर आए थे. लेकिन एक्टिंग में उनका करियर नहीं चमका. वहीं कुछ ऐसे लोग भी हैं, जिन्हें अपनी पहचान बनाने के लिए सालों तक संघर्ष नहीं करना पड़ता है. सुभाष घई की कहानी भी कुछ ऐसी ही है. कभी अभिनेता बनने का सपना देखने वाले घई आज बॉलीवुड के उन फिल्ममेकर्स में गिने जाते हैं, लेकिन वह सफल एक्टर नहीं बन पाए इस बात का उन्हें कोई मलाल नहीं.
सुभाष घई ने अपने करियर में कई यादगार फिल्में दीं. दिलचस्प बात यह है कि अपने साथ के कलाकारों को सुपरस्टार बनते देखने के बावजूद उन्हें इस बात का कभी अफसोस नहीं हुआ कि उनका एक्टिंग करियर उस मुकाम तक नहीं पहुंच सका. हाल ही में news18hindi को दिए एक्सक्लूसिव इंटरव्यू में उन्होंने बताया कि असली संघर्ष क्या है. साथ ही अमिताभ संग उनके रिश्ते को लेकर भी खुलकर बात की.
अमिताभ के साथ क्यों अधूरी रही फिल्म
सुभाष घई ने बताया कि साल 1987 में उन्होंने अमिताभ बच्चन के साथ ‘देवा’ शुरू की थी. फिल्म की शूटिंग भी हुई, लेकिन बाद में यह प्रोजेक्ट बंद हो गया. इसकी सबसे बड़ी वजह अमिताभ बच्चन उस वक्त बहुत बिजी थी. उस वक्त उनके पास डेट्स की परेशानी थी. उस दौर में अमिताभ फिल्मों के साथ-साथ राजनीति में भी सक्रिय हो गए थे और उनके लिए फिल्म को लगातार समय देना मुश्किल हो रहा था. सुभाष घई के मुताबिक, वह अपनी फिल्मों की शूटिंग को एक तय शेड्यूल में पूरा करना पसंद करते हैं. उन्होंने कहा कि अमिताभ बच्चन की बिजी होने के कारण उन्हें लगातार शूटिंग की डेट्स नहीं मिल पा रही थीं. ऐसे में उन्होंने तय किया कि फिल्म को थोड़ा-थोड़ा करके बनाने से बेहतर है कि उसे बनाया ही न जाए.
बिग बी संग कैसा रहा रिश्ता
फिल्ममेकर ने यह भी साफ किया कि इस वजह से उनके और अमिताभ बच्चन के बीच कोई दुश्मनी नहीं हुई. उन्होंने कहा कि आज भी दोनों के बीच प्यार और सम्मान कायम है और अमिताभ बच्चन उनके लिए आज भी एक दिग्गज अभिनेता हैं. उन्होंने अमिताभ बच्चन की तारीफ करते हुए कहा कि वह तो आज भी इडंस्ट्री में अपने काम से लोगों का दिल जीत लेते हैं.
एक्टर न बनने का नहीं कोई मलाल
सुभाष घई ने अपने शुरुआती दिनों को याद करते हुए बताया कि कॉलेज के समय वह एक्टिंग के साथ-साथ डायरेक्शन भी किया करते थे. हालांकि, बतौर अभिनेता उनका करियर ज्यादा आगे नहीं बढ़ सका. लेकिन वह इसे अपनी जिंदगी की नाकामी नहीं मानते. न ही उन्हें कोई मलाल है कि वह एक्टर नहीं बन पाए. उनके मुताबिक, अगर उनका एक्टिंग करियर नहीं चला, तो इसी वजह से उन्हें लेखन और निर्देशन की दुनिया में आगे बढ़ने का मौका मिला. एक्टर नहीं बन पाने का उन्हें कोई मलाल नहीं. उन्होंने बताया कि एक डायरेक्टर ने भी उनसे कहा था कि वह अच्छा लिखते हैं. यही रास्ता आगे चलकर उनके फिल्मी करियर की सबसे बड़ी पहचान बना.
बता दें कि ओटीटी के दौर पर भी बता करते हुए उन्होंने कहा कि थिएटर में फिल्म देखने के लिए टिकट की कीमत एक बड़ा फैक्टर है, जबकि ओटीटी पर दर्शक कम खर्च में या सब्सक्रिप्शन के जरिए फिल्म देख लेते हैं. हालांकि, उनके मुताबिक प्लेटफॉर्म कोई भी हो, आखिरकार कहानी अच्छी होना सबसे ज्यादा जरूरी है. अगर कहानी दर्शकों को पसंद आती है, तो फिल्म छोटी स्क्रीन पर भी सफल हो सकती है.
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न्यूज 18 हिंदी में एंटरटेनमेंट सेक्शन में सीनियर सब एडिटर के तौर पर काम कर रहे मुनीष कुमार दिल्ली के रहने वाले हैं. डिजिटल मीडिया में उन्हें 10 साल का अनुभव है.राजधानी कॉलेज (DU) से पॉलिटिकल साइंस (ऑनर्स) की पढ…
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