Why and how does Earthquake come: हाल ही में वेनेजुएला में आए भूकंप ने तबाही मचा दी है. इसमें 1 लाख लोगों के माने जाने की आशंका जताई जा रही है. अक्सर कुछ साल में दुनिया के किसी न किसी हिस्से में भूकंप आता रहता है. लेकिन अक्सर लोगों के मन में एक सवाल आता है कि पृथ्वी तो लगातार अपनी घुरी पर घूमती रहती है, तो फिर हल्का सा हिलते ही भूकंप क्यों आ जाता है और इतनी तबाही कैसे मच जाती है. हिल तो पृथ्वी घूमते हुए भी रही है लेकिन फिर ऐसा क्या होता है कि भूकंप आता है, बड़ी से बड़ी इमारतें और पेड़ जमींदोज हो जाते हैं, पृथ्वी फट जाती है और लाखों लोगों की जान चली जाती है. आइए दिल्ली यूनिवर्सिटी के भूगोल विभाग से जुड़े एक्सपर्ट से जानते हैं…
दिल्ली यूनिवर्सिटी में डिपार्टमेंट ऑफ जियोग्राफी में असिस्टेंट प्रोफेसर डॉक्टर सलीम मीर कहते हैं, ‘पृथ्वी अपनी धुरी पर घूमती रहती है और लगातार घूमती है. लेकिन हम लोगों को इसका पता क्यों नहीं लगता है? क्योंकि हम खुद भी इसके साथ ही घूम रहे हैं तो वह एक स्थिर स्थिति बन जाती है. इसे एक उदाहरण से समझ सकते हैं, जैसे हम एयरोप्लेन में बैठे हैं और वह उड़ रहा है, तो हमें पता ही नहीं चलता कि वह उड़ रहा है या रुका हुआ है, क्योंकि उसके साथ हम भी उड़ रहे हैं, हमारी सीट भी उड़ रही है, हर सामान उड़ रहा है. लेकिन जैसे ही वह लैंड करता है, हवा का झोंका या बादल आते हैं और उसकी गति गति प्रभावित होती है तो हमें पता चलता है और हमें झटका लगता है.
भूकंप क्यों आता है. आइए डीयू के जियोग्राफी एक्सपर्ट से जानते हैं..
एक और उदाहरण है कि हम किसी गोल घूमने वाले बड़े झूले में बैठे हैं, जब हम उसमें बैठे होते हैं तो एकदम आराम में होते हैं क्योंकि हम खुद भी उसके साथ झूलते हैं, लेकिन जैसे ही वह रुकता है या उसकी स्पीड स्लो होती है तो हमें झटका लगता है. बिल्कुल यही पृथ्वी के साथ है. वह नियमित और लगातार घूमती है. वहीं जब पृथ्वी थोड़ा सा अपनी धुरी पर हिलती है तो हमें झटका लगता है और भूकंप आता है.
अब सवाल है कि भूकंप आता क्यों है? डॉक्टर मीर बताते हैं,’ हमारी पृथ्वी की सबसे ऊपरी सतह जो 15-20 किलोमीटर तक मोटी है और जिस पर हम या पेड़ पौधे रहते हैं, उसे क्रस्ट कहते हैं यह कई कॉन्टिनेंटल प्लेटों जैसे एशियन, यूरोपियन, ऑस्ट्रलियन आदि में बंटी हुई है. इन प्लेटों में दरारें हैं. इसके ठीक नीचे एक सतह और है जो मेंटल कहलाती है उसमें द्रव की मात्रा भरी है. ये टेक्टोनिक या कॉन्टिनेंटल प्लेटें भी उस द्रव के ऊपर पृथ्वी के साथ घूमती हैं, लेकिन जब ये प्लेटें थोड़ी हिल जाती हैं और एक दूसरे के साथ टकरा जाती हैं तो झटका लगता है और भूकंप आ जाता है. धरती की यह ऊपर सतह फट जाती है. इसे ही भूकंप आना कहते हैं.
डॉ. मीर कहते हैं कि छोटे-मोटे झटके तो आमतौर पर लोगों को पता ही नहीं चलते हैं, लेकिन जब प्लेटों की टकराहट बढ़ जाती है. बहुत ज्यादा एनर्जी रिलीज होती है और जलजला या आपदा की स्थिति पैदा हो जाती है.
डॉ. सलीम कहते हैं भूकंप कई झटकों में आता है. तभी आपने सुना होगा कि कुछ जानवर इसे पहचान लेते हैं और पहले ही बाहर निकल आते हैं. ऐसे में यह बचाव के लिए एक संकेत भी हो सकता है.
आइए सवालों के माध्यम से विस्तार से जानते हैं….
भूकंप क्यों आता है?
पृथ्वी की ऊपरी सतह जो कई बड़ी टेक्टोनिक या कॉन्टिनेंटल प्लेटों में बंटी है, आपस में टकराती, रगड़ती या खिसकती है तो पृथ्वी पर हल्के झटके आते हैं लेकिन कई बार प्लेटों के रगड़ने में ज्यादा ऊर्जा बाहर निकलने से ये झटके इतने तेज होते हैं कि भूकंप आता है और धरती फट जाती है या हिलने लगती है. हालांकि कुछ भूकंप ज्वालामुखी विस्फोट, खनन या बड़े विस्फोटों के कारण भी आ सकते हैं.
रिक्टर स्केल पर कैसे मापते हैं भूकंप?
भूकंप तब आता है जब प्लेटों के टकराने से सीस्मिक वेब्स फैलने लगती हैं. इन सीस्मिक तरंगों को रिक्टर स्केल पर मैग्नीट्यूड में मापा जाता है. यह 1 से 10 तक होता है. आपने सुना होगा कि फलां भूकंप की तीव्रता रिक्टर स्केल पर 5.3 या 6.7 मैग्नीट्यूट रही. या कभी इससे ज्यादा भी होती है.
रिक्टर स्केल में कौन से पॉइंट से आती है तबाही?
आमतौर पर यह इलाके पर भी निर्भर करता है. जैसे जापान में कई इलाके और इमारतें 8 मैग्नीट्यूट की तीव्रता भी बर्दाश्त कर लेती हैं लेकिन दिल्ली में 4 मैग्नीट्यूड का भूकंप ही भारी तबाही मचा सकता है. आपने देखा होगा कि रिक्टर स्केल पर 4 या 5 मैग्नीट्यूड में कम नुकसान होता है लेकिन जैसे ही यह 6 पहुंच जाता है, तबाही बढ़ जाती है. इसकी सबसे बड़ी वजह है कि 6, 5 से सिर्फ एक पॉइंट बड़ा नहीं है बल्कि यह 10 गुना ज्यादा खतरनाक होता है और इसी वजह से 6 या 6 के बाद से नुकसान बढ़ता जाता है. वहीं जहां पहले से ही चीजें कमजोर हैं, वहां नुकसान ज्यादा होता है?
क्या कुछ ऐसा है जो भूकंप में स्थिर रह पाता है?
आमतौर पर इमारतें, पेड़-पौधे या कोई भी चीज भूकंप में स्थिर नहीं रह पाती. सतह के हिलने से ये सभी हिल जाती हैं. हालांकि जापान में तकनीक से अर्थक्वेक प्रोन बिल्डिंग बनाई जा रही हैं. जो बच जाती हैं. लेकिन ऐसी कोई चीज नहीं है जिसे 6-7 या ज्यादा मैग्नीट्यूड पर भी नुकसान न हो और वह अड़िग खड़ा रहे.
ऐसा क्यों होता है कि भूकंप कई झटकों में आता है?
हां भूकंप कभी भी एक झटके में नहीं आता. पहले हल्के और छोटे झटके लगते हैं, जिसका पता आदमी को नहीं लग पाता है, लेकिन जब तेज झटका आता है तो बचने का भी समय नहीं मिल पाता. लेकिन ये सच है कि भूकंप एक झटके में नहीं आता, बल्कि कई झटकों में आता है.
क्या भूकंप में बचाव के कुछ तरीके हैं?
- हां भूकंप के दौरान कुछ चीजों का ध्यान रखना जरूरी है.
- जैसे ही आपको भूकंप का छोटा झटका लगे तो तुरंत आप घर से बाहर निकल जाएं.
- अगर किसी ऊंची बिल्डिंग में हैं तो बाहर निकल आएं.
- भूकंप के दौरान शीशे के सामने, लिफ्ट या एस्केलेटर पर न रहें.
- भूकंप आए तो खुले में पेड़ या पोल को पकड़ कर रखें.
- भूकंप के दौरान दौड़ें नहीं. स्थिर खड़े रहें.
- अगर आप किसी स्कूल या अस्पताल में फंस गए हैं तो भूकंप के दौरान बड़ी बैंच के नीचे छिप जाएं, क्योंकि अगर बिल्डिंग का हिस्सा गिरेगा भी तो यह बैंच या मेज आपको कुछ हद तक बचा सकती है.
