नोएडा की डीएम मेधा रूपम को सुप्रीम कोर्ट से राहत, सैलरी से 5 लाख का मुआवजा वसूलने के आदेश पर रोक

सुप्रीम कोर्ट ने इलाहाबाद हाईकोर्ट के उस आदेश पर रोक लगा दी है, जिसमें छात्रा आकृति चौधरी को राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (NSA) के तहत हिरासत में लिए जाने के मामले में 5 लाख रुपये मुआवजा नोएडा की जिलाधिकारी मेधा रूपम की सैलरी से देने का निर्देश दिया गया था.

मेधा रूपम ने हाईकोर्ट के इस आदेश को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी. बुधवार को जस्टिस सतीश चंद्र शर्मा और जस्टिस एन. कोटिस्वर सिंह की बेंच ने मामले की सुनवाई की. सुनवाई के बाद सुप्रीम कोर्ट ने अंतरिम आदेश पर अपना फैसला सुरक्षित रख लिया.

हाईकोर्ट ने क्या आदेश दिया था?

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने 2 सितंबर को आकृति चौधरी की NSA के तहत हिरासत को रद्द कर दिया था. 25 वर्षीय आकृति दिल्ली विश्वविद्यालय से इतिहास की पढ़ाई कर चुकी हैं और अप्रैल 2026 में नोएडा में हुए मजदूरों के विरोध-प्रदर्शन से जुड़े मामलों में उन्हें हिरासत में लिया गया था. बाद में उन्हें NSA के तहत गिरफ्तार कर लिया गया था.

हाईकोर्ट ने हिरासत के आधार और प्रशासन की कार्रवाई पर कड़ा रुख अपनाते हुए आकृति चौधरी को तत्काल रिहा करने का आदेश दिया था. अदालत ने उन्हें 5 लाख रुपये का मुआवजा देने का भी निर्देश दिया. यह रकम नोएडा की डीएम मेधा रूपम सहित उन सभी अधिकारियों के वेतन से वसूलने को कहा गया था, जिन्हें हिरासत की कार्रवाई के लिए जिम्मेदार माना गया.

हाईकोर्ट के आदेश में डीएम मेधा रूपम की भूमिका पर भी कड़ी टिप्पणियां की गई थीं. अदालत ने उनके सर्विस रिकॉर्ड में अपनी नाराजगी दर्ज करने का निर्देश दिया था.

सुप्रीम कोर्ट में आज क्या हुआ?

मेधा रूपम की ओर से सुप्रीम कोर्ट में सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता पेश हुए. उन्होंने दलील दी कि हाईकोर्ट ने जिलाधिकारी पर व्यक्तिगत रूप से जिम्मेदारी तय करते हुए उनके खिलाफ सख्त टिप्पणियां कीं, जबकि NSA के तहत हिरासत की प्रक्रिया में कई स्तरों पर अधिकारियों की भूमिका होती है.

उत्तर प्रदेश सरकार की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता मुकुल रोहतगी ने भी हाईकोर्ट के आदेश पर सवाल उठाए. उनकी दलील थी कि हिरासत का प्रस्ताव निचले स्तर से शुरू होकर कई अधिकारियों की जांच और प्रक्रिया से गुजरता है और उसके बाद जिलाधिकारी के स्तर पर पहुंचता है.

वहीं सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई के दौरान इस बात पर सवाल उठाया कि अगर NSA की कार्रवाई में कई अधिकारी शामिल थे और फैसला एक पूरी प्रशासनिक प्रक्रिया से होकर आया था, तो सिर्फ जिलाधिकारी को अलग करके जिम्मेदार कैसे ठहराया जा सकता है. रिपोर्टों के मुताबिक कोर्ट ने मौखिक टिप्पणी में कहा कि उन्हें इस पूरी प्रक्रिया से अलग नहीं किया जा सकता.

5 लाख रुपये के मुआवजे पर क्या हुआ?

मेधा रूपम की याचिका में इलाहाबाद हाईकोर्ट के उस निर्देश पर अंतरिम रोक की मांग की गई थी, जिसके तहत 5 लाख रुपये का मुआवजा अधिकारियों के वेतन से वसूल किया जाना था. सुप्रीम कोर्ट ने इस अंतरिम राहत की मांग पर सुनवाई पूरी करने के बाद आदेश सुरक्षित रख लिया है. यानी सुप्रीम कोर्ट ने अभी इस मामले में अंतिम फैसला नहीं सुनाया है.

आखिर क्या है पूरा मामला?

यह पूरा विवाद अप्रैल 2026 में नोएडा में हुए श्रमिकों के विरोध-प्रदर्शन से शुरू हुआ. प्रदर्शन से जुड़े मामलों में आकृति चौधरी को राष्ट्रीय सुरक्षा कानून यानी NSA के तहत गिरफ्तार किया गया था. आकृति चौधरी ने इस कार्रवाई को इलाहाबाद हाईकोर्ट में चुनौती दी. हाईकोर्ट ने सितंबर में उनकी NSA हिरासत को रद्द कर दिया. अदालत ने माना कि हिरासत के लिए पेश की गई सामग्री कानून की कसौटी पर पर्याप्त नहीं थी और इसी आधार पर उन्हें राहत दी गई.

इसके बाद मुआवजे के तौर पर 5 लाख रुपये देने और इसे संबंधित अधिकारियों के वेतन से वसूल करने का निर्देश दिया गया. मेधा रूपम ने इस आदेश को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी.

यह मामला नोएडा में श्रमिकों के विरोध-प्रदर्शन से जुड़ा है. हाईकोर्ट ने आकृति चौधरी की हिरासत को लेकर मुआवजे का आदेश पारित किया था और इसकी राशि नोएडा DM के वेतन से वसूलने का निर्देश दिया था. अब सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट के इस निर्देश पर रोक लगा दी है. मामले में सुप्रीम कोर्ट के अगले आदेश का इंतजार है.

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