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Noida News: नीट स्टूडेंट ने पढ़ाई के बाद बिहार से एक ऐसा स्टार्टअप शुरू किया, जो आज शिक्षकों के कंटेंट का डिजिटल बाजार बन चुका है. यहां पढ़ाई से जुड़े संसाधन आसानी से उपलब्ध हो जाते हैं. आइए इस स्टार्टअप के बनने के सफर के बारे में जानते हैं. टेस्टकार्ट का आइडिया आया.
नोएडा: बिहार से निकलकर 2013 में महज 16 साल की उम्र में दिल्ली पहुंचे हमराज कुमार ने NEET की तैयारी के दौरान स्टार्टअप की दुनिया को समझना शुरू किया. पढ़ाई के साथ उन्होंने हेल्थकेयर आइडिया पर काम किया और पहली कंपनी खड़ी कर करीब 1 करोड़ रुपये की फंडिंग भी जुटाई. हालांकि अनुभव की कमी के चलते यह कंपनी ज्यादा समय नहीं चल सकी. इसके बाद उन्होंने पढ़ाई पूरी की और बिहार में कोचिंग और स्कूल शुरू किया. यहीं बच्चों को पढ़ाते हुए उन्हें एक ऐसी समस्या नजर आई, जिसने आगे चलकर टेस्टकार्ट की नींव रखी. आज हमराज कुमार टेस्टकार्ट के फाउंडर और सीईओ हैं और उनका प्लेटफॉर्म शिक्षकों को अपने मॉक टेस्ट, कोर्स, स्टडी नोट्स और दूसरे शैक्षणिक संसाधन बेचने का मार्केटप्लेस उपलब्ध करा रहा है.
असफलता से लिया खास अनुभव
हमराज कुमार ने लोकल 18 से बात करते हुए बताया कि 2013 में जब वह बिहार से दिल्ली आए थे, तब वह NEET की तैयारी कर रहे थे. इसी दौरान उन्हें स्टार्टअप की दुनिया के बारे में जानकारी मिली और उन्होंने हेल्थकेयर से जुड़े एक आइडिया पर काम शुरू किया. उस समय उनकी उम्र करीब 16 साल थी और वह सिर्फ 10वीं पास थे. इसके बावजूद उन्होंने कंपनी शुरू की और करीब दो साल तक उसे चलाया. इस दौरान उन्होंने करीब 1 करोड़ रुपये की फंडिंग भी जुटाई. हालांकि अनुभव की कमी समेत कुछ कारणों से कंपनी बंद हो गई. असफलता के बाद उन्होंने दोबारा पढ़ाई पर ध्यान दिया, 12वीं पूरी की और फिर ग्रेजुएशन में दाखिला लिया.
संघर्ष के दौरान आया ये खास आइडिया
ग्रेजुएशन के दौरान हमराज ने बिहार में कोचिंग और स्कूल चलाना शुरू किया. बच्चों को पढ़ाते समय उन्हें महसूस हुआ कि शिक्षकों और छात्रों के लिए ऐसा डिजिटल प्लेटफॉर्म होना चाहिए, जहां पढ़ाई से जुड़े संसाधन आसानी से उपलब्ध हो सकें. इसी जरूरत से टेस्टकार्ट का आइडिया आया. हालांकि टेस्टकार्ट खुद का कोर्स या स्टडी मैटेरियल तैयार करके बेचने वाला सामान्य एडटेक प्लेटफॉर्म नहीं है. यहां शिक्षक अपने बनाए हुए मॉक टेस्ट, कोर्स, स्टडी नोट्स और दूसरे शैक्षणिक संसाधन लिस्ट कर सकते हैं. छात्र अपनी जरूरत के अनुसार सीधे संबंधित शिक्षक का कंटेंट खरीद सकते हैं. यही मॉडल टेस्टकार्ट को पारंपरिक एडटेक कंपनियों से अलग बनाता है.
टेस्टकार्ट का मॉडल बिल्कुल अलग
टेस्टकार्ट को एक मार्केटप्लेस के तौर पर विकसित किया गया है, जहां शिक्षकों को प्लेटफॉर्म से जुड़ने के लिए कोई अग्रिम राशि नहीं देनी होती. आमतौर पर कई सॉफ्टवेयर प्लेटफॉर्म शिक्षकों से मासिक या सालाना सब्सक्रिप्शन फीस लेते हैं और कंटेंट, मार्केटिंग व बिक्री का काम काफी हद तक शिक्षक को खुद संभालना पड़ता है. टेस्टकार्ट का मॉडल इससे अलग है. शिक्षक यहां अपना डिजिटल कंटेंट लिस्ट करते हैं और उन्हें अपने मौजूदा छात्रों के साथ-साथ प्लेटफॉर्म पर मौजूद दूसरे संभावित छात्रों तक पहुंचने का अवसर मिलता है. यानी शिक्षक के लिए यह सिर्फ कंटेंट रखने की जगह नहीं, बल्कि उसे बेचने और नए छात्रों तक पहुंचने का मार्केटप्लेस भी है.
शिक्षकों के लिए खास है ये प्लेटफॉर्म
कंपनी के रेवेन्यू मॉडल के मुताबिक, जब किसी शिक्षक का कोई प्रोडक्ट टेस्टकार्ट के जरिए बिकता है, तब प्लेटफॉर्म बिक्री पर 5 से 30 प्रतिशत तक प्लेटफॉर्म फीस लेता है. शिक्षक को प्लेटफॉर्म पर जुड़ने के लिए कोई अग्रिम भुगतान नहीं करना होता. हमराज कुमार का मानना है कि डिजिटल एजुकेशन के बढ़ते दौर में देश के शिक्षकों के पास अपने ज्ञान को डिजिटल प्रोडक्ट में बदलकर अतिरिक्त आय का जरिया बनाने का बड़ा अवसर है. टेस्टकार्ट इसी अवसर को एक मार्केटप्लेस के माध्यम से जोड़ने की कोशिश कर रहा है, जहां शिक्षक अपने संसाधन उपलब्ध करा सकें और छात्र अपनी जरूरत के अनुसार उन्हें खरीद सकें.
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आर्यन सेठ, News18 Hindi में डिजिटल डेस्क पर जुड़े हैं और जनवरी 2026 से उत्तर प्रदेश की राजनीति, अपराध, प्रशासन, वायरल और अन्य महत्वपूर्ण विषयों पर खबरें लिखते हैं. जामिया मिलिया इस्लामिया दिल्ली से साल 2024 में…
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