Gold Jewelry Business: करोड़ों नहीं, कुछ लाख से भी शुरू हो सकता है ज्वेलरी कारोबार, जौहरी ने बताया पूरा तरीका

दिल्ली. सोना खरीदते वक्त आपने कभी न कभी जरूर सोचा होगा कि आखिर ज्वेलरी का कारोबार कैसे शुरू होता है. अगर कोई व्यक्ति अपनी ज्वेलरी शॉप या छोटा सा कारोबार शुरू करना चाहता है तो उसके पास कितना बजट होना चाहिए, शुरुआत में गोल्ड रखें या सिल्वर और सबसे जरूरी सवाल बड़े ब्रांड्स के बीच अपनी दुकान की पहचान कैसे बनाएं. इन सभी सवालों का जवाब ज्वेलरी इंडस्ट्री से जुड़े एक्सपर्ट नीरज सोनी ने दिया है.

करोड़ों रुपये जरूरी नहीं
ज्वेलरी का कारोबार शुरू करने को लेकर अक्सर लोगों के मन में सबसे पहली बात यही आती है कि इसके लिए करोड़ों रुपये की जरूरत होगी. नीरज सोनी, डायरेक्टर, गंगा ज्वेलर्स ने बताया कि ऐसा जरूरी नहीं है. कोई भी व्यक्ति छोटे स्तर से इस कारोबार की शुरुआत कर सकता है. उनका कहना है कि शुरुआत में छोटी दुकान लेकर, सीमित स्टॉक के साथ और डिजिटल प्लेटफॉर्म की मदद से कारोबार शुरू किया जा सकता है. आज सोशल मीडिया और ऑनलाइन प्लेटफॉर्म की मदद से ग्राहकों तक अपने प्रोडक्ट की जानकारी पहुंचाना पहले के मुकाबले काफी आसान हो गया है.

शुरुआत में सिल्वर ज्वेलरी से कर सकते हैं कारोबार
अगर किसी व्यक्ति का बजट कम है तो वह शुरुआत में सिल्वर ज्वेलरी से अपना कारोबार शुरू कर सकता है. एक्सपर्ट के मुताबिक शुरुआत में चांदी के कुछ डिजाइन और आर्टिकल रखे जा सकते हैं. ग्राहक की पसंद समझने के बाद धीरे-धीरे कारोबार बढ़ाया जा सकता है. वहीं, अगर बजट बढ़ता है तो गोल्ड ज्वेलरी को स्टॉक में शामिल किया जा सकता है. शुरुआत में हर डिजाइन और हर तरह की ज्वेलरी रखने की जरूरत नहीं है. ग्राहक से ऑर्डर लेकर भी काम किया जा सकता है.

करीब 50 लाख रुपये का बजट बताया
नीरज सोनी के मुताबिक अगर कोई व्यक्ति एक छोटे लेकिन व्यवस्थित ज्वेलरी शोरूम के साथ शुरुआत करना चाहता है तो करीब 50 लाख रुपये का बजट रखा जा सकता है. इसमें शोरूम तैयार करने और ज्वेलरी के स्टॉक जैसे खर्च शामिल हो सकते हैं. हालांकि, यह रकम किसी एक तय नियम की तरह नहीं है. कारोबार का आकार, जगह, दुकान का किराया, स्टॉक और ज्वेलरी के प्रकार के हिसाब से निवेश कम या ज्यादा हो सकता है.

पिता ने 1988 में शुरू किया था कारोबार
नीरज ने बताया कि उनका ज्वेलरी कारोबार पारिवारिक है. उनके पिता ने साल 1988 में इसकी शुरुआत की थी. उस समय आज जैसी डिजिटल सुविधाएं नहीं थीं. इसके बावजूद उनके पिता ने मेहनत और ग्राहकों के भरोसे के दम पर कारोबार को आगे बढ़ाया. उनके मुताबिक ज्वेलरी कारोबार में सबसे जरूरी चीज ग्राहक का भरोसा है. गलत सामान देकर या शॉर्टकट अपनाकर कोई व्यक्ति लंबे समय तक इस कारोबार में नहीं टिक सकता.

बड़े ब्रांड्स के बीच लोकल ज्वेलर कैसे बनाए पहचान
आज बाजार में बड़े-बड़े ज्वेलरी ब्रांड मौजूद हैं. ऐसे में किसी नए या लोकल ज्वेलर के सामने सबसे बड़ी चुनौती ग्राहक का भरोसा जीतना होती है. नीरज के मुताबिक ज्वेलरी खरीदते समय ग्राहक सिर्फ डिजाइन नहीं देखता, बल्कि वह भरोसा भी देखता है. कई ग्राहक सालों से अपने आसपास के लोकल ज्वेलर से ही खरीदारी करते हैं.

लोकल ज्वेलर की एक खासियत यह भी होती है कि वह ग्राहक की छोटी-छोटी जरूरतों में मदद करता है. ज्वेलरी की मरम्मत, सफाई या दूसरी सर्विस के लिए ग्राहक आसानी से अपने स्थानीय ज्वेलर तक पहुंच सकता है. यही व्यक्तिगत जुड़ाव कई बार ग्राहक और दुकानदार के बीच लंबे रिश्ते की वजह बनता है.

ज्वेलरी बिजनेस में सबसे बड़ा निवेश भरोसा
नीरज सोनी, डायरेक्टर, गंगा ज्वेलर्स ने बताया कि ज्वेलरी का कारोबार ऐसा नहीं है जिसमें रातों-रात सफलता मिल जाए. ग्राहक का भरोसा बनाने में सालों लग सकते हैं. शुरुआत में ऐसा भी हो सकता है कि पूरे-पूरे दिन और कई दिनों तक दुकान पर ग्राहक न आए या बिक्री बहुत कम हो. लेकिन अगर कारोबारी सही तरीके से काम करता है, ग्राहक के साथ ईमानदारी रखता है और लगातार अपने कारोबार को बेहतर करता है तो धीरे-धीरे ग्राहक बढ़ सकते हैं.

सोशल मीडिया से भी बढ़ाया जा सकता है कारोबार
आज सोशल मीडिया ज्वेलरी कारोबार के लिए एक बड़ा जरिया बन चुका है. दुकान पर मौजूद ज्वेलरी के फोटो और वीडियो डिजिटल प्लेटफॉर्म पर दिखाकर ग्राहक तक पहुंच बनाई जा सकती है. यानी कारोबार शुरू करने के लिए सिर्फ दुकान ही जरूरी नहीं है, बल्कि डिजिटल मौजूदगी भी ग्राहक बनाने में मदद कर सकती है. खासकर युवा कारोबारी छोटे स्तर से शुरुआत करके सोशल मीडिया के जरिए अपने कारोबार को आराम से आगे बढ़ा सकते हैं.

सफल कारोबारी बनने के लिए क्या जरूरी
नीरज सोनी ने बताया कि ज्वेलरी कारोबार शुरू करने वाले व्यक्ति के अंदर सबसे पहले खुद पर भरोसा होना चाहिए. इसके साथ ही उसकी सोच और लक्ष्य साफ होना जरूरी है. उनका कहना है कि ज्वेलरी बेचने से ज्यादा जरूरी है ग्राहक का विश्वास जीतना. एक बार ग्राहक का भरोसा बन जाए तो वही ग्राहक आगे चलकर परिवार और दोस्तों को भी आपके पास ला सकता है.

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