लेडी श्रीराम कॉलेज की कहानी:1956 में पत्नी की याद में बना था LSR, 15 एकड़ में फैला है कैंपस

Delhi University, Lady Shri Ram College: दिल्ली का लेडी श्रीराम कॉलेज फॉर विमेन यानी LSR इन दिनों अपनी पढ़ाई या किसी परीक्षा के लिए नहीं, बल्कि छात्राओं की सुरक्षा को लेकर चर्चा में है. दक्षिणी दिल्ली के कालकाजी इलाके के आस्था कुंज पार्क में 17 साल की लड़की के साथ कथित गैंगरेप की घटना के बाद कॉलेज प्रशासन ने मंगलवार को नियमित कक्षाएं स्थगित कर दीं और बुधवार को पढ़ाई ऑनलाइन कराने का फैसला किया.वजह यह थी कि घटना का स्थान कॉलेज के बैक गेट के बेहद करीब है और मामले के एक आरोपी को कॉलेज के पिछले गेट से करीब 50 मीटर दूर पुलिस मुठभेड़ के बाद पकड़े जाने की बात सामने आई.कॉलेज ने कहा कि छात्राओं की सुरक्षा, सुरक्षा व्यवस्था और उनकी भलाई उसकी सर्वोच्च प्राथमिकता है.

इस घटना के बाद LSR की छात्राओं ने आसपास की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर भी सवाल उठाए हैं.छात्रों ने कम पुलिस पेट्रोलिंग, अंधेरी सड़कें, खराब स्ट्रीट लाइट, वाहनों से घिरे फुटपाथ और काम न करने वाले पिंक बूथ जैसी समस्याओं का जिक्र किया है.बुधवार को LSR और दूसरे संस्थानों की करीब 200 छात्राएं विरोध मार्च में भी शामिल हुईं लेकिन जिस कॉलेज की सुरक्षा को लेकर आज सवाल उठ रहे हैं वह देश के सबसे चर्चित महिला कॉलेजों में से एक है.इसकी कहानी करीब सात दशक पुरानी है और यहां से अर्थशास्त्र, प्रशासन, राजनीति, साहित्य, पत्रकारिता और सिनेमा तक कई क्षेत्रों में नाम बनाने वाली महिलाएं निकली हैं.

1956 में हुई थी शुरुआत, पत्नी की याद में बनाया था कॉलेज

लेडी श्रीराम कॉलेज फॉर विमेन की स्थापना 1956 में सर श्रीराम ने अपनी पत्नी की स्मृति में की थी.कॉलेज के आधिकारिक दस्तावेज के मुताबिक इसकी शुरुआत दिल्ली के दरियागंज में एक स्कूल से हुई थी.आजादी के बाद महिलाओं को उच्च शिक्षा के ज्यादा अवसर उपलब्ध कराने के उद्देश्य से इस संस्थान की नींव रखी गई थी.सर श्रीराम का मानना था कि देश के निर्माण में शिक्षा की अहम भूमिका है.इसी सोच के साथ LSR को महिलाओं की उच्च शिक्षा के लिए विकसित किया गया.समय के साथ यह दिल्ली यूनिवर्सिटी का हिस्सा बना और दक्षिणी दिल्ली में इसका मौजूदा कैंपस विकसित हुआ. आज LSR का कैंपस करीब 15 एकड़ में फैला है.

LSR सिर्फ डिग्री देने वाला कॉलेज नहीं

LSR की पहचान खास तौर पर लिबरल आर्ट्स और सोशल साइंसेज की पढ़ाई के लिए रही है.यहां सोशल साइंसेज और ह्यूमैनिटीज की पढाई प्रमुखता से होती है.इसके अलावा कॉमर्स, मैथेमेटिक्स, स्टैटिस्टिक्स, जर्नलिज्म और एलिमेंट्री एजुकेशन जैसे क्षेत्रों में भी पढ़ाई होती है.कॉलेज के आधिकारिक प्रॉस्पेक्टस में जिन प्रमुख अंडरग्रेजुएट विषयों का उल्लेख है उनमें इकोनॉमिक्स, इंग्लिश, हिंदी, हिस्ट्री, फिलॉसफी, पॉलिटिकल साइंस, संस्कृत, सोशियोलॉजी और साइकोलॉजी शामिल हैं.इसके अलावा जर्नलिज्म एंड मास कम्युनिकेशन, कॉमर्स, मैथेमेटिक्स, स्टैटिस्टिक्स और एलिमेंट्री एजुकेशन से जुड़े प्रोग्राम भी रहे हैं यानी अगर कोई छात्रा सोशल साइंस, ह्यूमैनिटीज, कॉमर्स, मैथ्स, स्टैटिस्टिक्स, जर्नलिज्म या एजुकेशन जैसे क्षेत्र में आगे बढ़ना चाहती है, तो LSR में उसके लिए कई अकादमिक विकल्प मौजूद रहे हैं.

पोस्ट ग्रेजुएशन में भी कई विषयों की पढ़ाई

LSR में पोस्ट ग्रेजुएशन स्तर पर भी अलग-अलग विषयों की पढ़ाई होती रही है.कॉलेज के आधिकारिक प्रॉस्पेक्टस में इकोनॉमिक्स, इंग्लिश, पॉलिटिकल साइंस, हिस्ट्री, मैथेमेटिक्स, फिलॉसफी, हिंदी और संस्कृत में एमए प्रोग्राम का उल्लेख है.इसके अलावा कन्फ्लिक्ट ट्रांसफॉर्मेशन एंड पीसबिल्डिंग में पोस्ट ग्रेजुएट डिप्लोमा प्रोग्राम भी कॉलेज का हिस्सा रहा है हालांकि दिल्ली यूनिवर्सिटी की नई शिक्षा व्यवस्था और एनईपी के बाद अलग-अलग प्रोग्राम और एडमिशन स्ट्रक्चर में बदलाव होते रहे हैं.इसलिए किसी खास साल में उपलब्ध कोर्स और एडमिशन की शर्तों के लिए उस वर्ष का LSR और दिल्ली यूनिवर्सिटी का आधिकारिक नोटिफिकेशन देखना जरूरी है.

पढ़ाई के साथ एक्स्ट्रा करिकुलर एक्टिविटीज पर भी जोर

LSR की पहचान सिर्फ क्लासरूम तक सीमित नहीं रही है.कॉलेज एक्स्ट्रा करिकुलर एक्टिविटीज, आउटरीच और सामाजिक भागीदारी को भी महत्व देता है.कॉलेज में डिबेट, ड्रामा, म्यूजिक, स्पोर्ट्स और दूसरे सांस्कृतिक कार्यक्रमों के लिए भी छात्राओं को अवसर मिलते हैं.LSR का वार्षिक फेस्टिवल तरंग भी लंबे समय से कॉलेज की पहचान का हिस्सा रहा है.

लाइब्रेरी से लेकर हॉस्टल तक, कैसा है LSR का कैंपस?

LSR का कैंपस दक्षिणी दिल्ली में करीब 15 एकड़ में है.कॉलेज में क्लासरूम, सेमिनार हॉल, प्रयोगशालाओं और लाइब्रेरी जैसी सुविधाएं हैं.कॉलेज की लाइब्रेरी में बड़ी संख्या में किताबों और ई-रिसोर्सेज की सुविधा भी दी गई है.कॉलेज में बाहर से आने वाली छात्राओं के लिए रेजिडेंस हॉल भी है.LSR की रेजिडेंस हॉल की शुरुआत 1959 में हुई थी और इसमें करीब 300 छात्राओं के रहने की क्षमता रही है.

कॉलेज वाला इलाका कैसा है?

मौजूदा विवाद की सबसे अहम कड़ी कॉलेज का बैक गेट और उसके आसपास का इलाका है.आस्था कुंज पार्क में 17 साल की लड़की के साथ कथित गैंगरेप की घटना के बाद LSR प्रशासन ने छात्राओं को बैक गेट के आसपास जमा होने से बचने की सलाह दी और दिल्ली पुलिस से अतिरिक्त पेट्रोलिंग की मांग की.कॉलेज की प्रिंसिपल कनिका के.आहूजा ने कहा कि संस्थान दिल्ली पुलिस के संपर्क में है और कैंपस के साथ-साथ आसपास की सुरक्षा मजबूत करने के लिए जरूरी कदम उठाए जा रहे हैं.कॉलेज ने फैकल्टी मेंटर्स और काउंसलर को भी छात्राओं के लिए उपलब्ध रहने को कहा है.छात्राओं का कहना है कि मामला सिर्फ एक घटना के बाद कुछ दिनों की सुरक्षा का नहीं है.उनका ध्यान उन रास्तों और जगहों की ओर भी है जहां वे रोज कॉलेज से मेट्रो, पीजी, बस स्टॉप या घर की तरफ जाती हैं.छात्रों ने स्ट्रीट लाइट, पुलिस पेट्रोलिंग और आसपास के संवेदनशील इलाकों की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर स्थायी समाधान की मांग की है.

LSR की छात्राएं सड़क पर भी उतरीं

घटना के विरोध और महिलाओं की सुरक्षा को लेकर बुधवार को LSR के पास छात्राओं ने प्रदर्शन किया.इंडियन एक्सप्रेस के मुताबिक करीब 200 छात्र प्रदर्शन में शामिल हुए और मार्च LSR के बैक गेट से शुरू होकर आसपास के संस्थानों की तरफ गया.प्रदर्शन में मिरांडा हाउस समेत दूसरे संस्थानों के छात्र भी शामिल हुए.इस विरोध में छात्रों ने यह सवाल उठाया कि महिला कॉलेजों और उनके आसपास की सुरक्षा को केवल किसी घटना के बाद की प्रतिक्रिया तक सीमित नहीं रखा जाना चाहिए.उनका कहना है कि नियमित पुलिस पेट्रोलिंग, बेहतर रोशनी, सुरक्षित रास्ते और आपातकालीन मदद की व्यवस्था पहले से मजबूत होनी चाहिए.

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