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Delhi Broken Idol Immersion Centres: दिल्ली में खंडित मूर्तियों और पूजा सामग्री के उचित विसर्जन के लिए ‘आस्था का सम्मान’ अभियान के तहत करीब 110 केंद्र बनाए गए हैं. कुछ जगहों पर कृत्रिम तालाब भी तैयार किए गए हैं. इसके बावजूद लोगों में इन केंद्रों को लेकर जागरूकता कम है. लोकल18 की ग्राउंड रिपोर्ट में सामने आया कि कालिंदी कुंज के पास अब भी कुछ लोग पुरानी मूर्तियां और पूजा सामग्री यमुना किनारे डाल रहे हैं. लोगों ने केंद्रों की जानकारी और उनकी उपलब्धता को लेकर भी सवाल उठाए.
नई दिल्ली: इन दिनों गणेश विसर्जन का दौर चल रहा है. इसके बाद दिवाली का त्योहार भी आएगा. इस दौरान लोग घरों से पुरानी या खंडित मूर्तियां और पूजा सामग्री बाहर निकालते हैं. कई लोग इन्हें पेड़ के नीचे रख देते हैं. कुछ लोग पूजा सामग्री को यमुना या उसके आसपास बहा देते हैं. इससे नदी में प्रदूषण बढ़ता है. साथ ही देवी-देवताओं की मूर्तियां भी इधर-उधर पड़ी दिखाई देती हैं. इससे लोगों की धार्मिक भावनाएं भी आहत होती हैं.
110 खंडित मूर्ति विसर्जन केंद्र
इसी समस्या को देखते हुए दिल्ली सरकार ने ‘आस्था का सम्मान’ नाम से पूरी दिल्ली में करीब 110 खंडित मूर्ति विसर्जन केंद्र बनाए हैं. इन केंद्रों पर लोग खंडित मूर्तियां, मंदिर और पूजा सामग्री जमा कर सकते हैं. इन केंद्रों के अलावा कुछ जगहों पर कृत्रिम तालाब भी बनाए गए हैं. यहां लोग मूर्तियों का विसर्जन कर सकते हैं. इन केंद्रों को बने करीब एक सप्ताह हो चुका है. इसके बावजूद लोगों में इनको लेकर जागरूकता कम दिखाई दे रही है. लोकल18 की ग्राउंड रिपोर्ट में इसकी तस्वीर सामने आई. कई लोगों को इन केंद्रों की जानकारी ही नहीं है. वहीं, कुछ लोग अभी भी कालिंदी कुंज के पास बने पुल के आसपास पुरानी मूर्तियां और पूजा सामग्री फेंक रहे हैं.
लोगों ने कहा- केंद्रों की जानकारी नहीं
कालिंदी कुंज के पास यमुना में गणेश विसर्जन करने पहुंचे एक दंपति से बात की गई. उन्होंने बताया कि उन्हें दिल्ली सरकार की ओर से बनाए गए खंडित मूर्ति विसर्जन केंद्रों के बारे में जानकारी नहीं है. इसी वजह से वे गणेश जी की प्रतिमा को यमुना में प्रवाहित करने पहुंचे हैं. दिल्ली के रहने वाले एक अन्य व्यक्ति ने भी बताया कि उन्हें इन केंद्रों की जानकारी नहीं है. उन्होंने कहा कि जो केंद्र बनाए गए हैं, उनमें से कई मेट्रो स्टेशन के आसपास हैं. हर कॉलोनी या हर मेट्रो स्टेशन के पास ऐसा केंद्र नहीं है. उनका कहना था कि लंबे समय से यमुना में पूजा सामग्री और मूर्तियों के विसर्जन की परंपरा चली आ रही है. इसलिए लोग अभी भी इसी तरीके का इस्तेमाल करते हैं. हालांकि, उन्होंने कहा कि पर्यावरण और आस्था दोनों को बचाने के लिए आगे से इन केंद्रों का इस्तेमाल किया जाएगा.
सम्मान के साथ हो पुरानी मूर्तियों की विदाई
दिल्ली के रहने वाले पवन ने बताया कि उनके घर के पास केशवपुरम मेट्रो स्टेशन के ठीक पास खंडित मूर्ति विसर्जन केंद्र बनाया गया है. उन्होंने इसे अच्छी पहल बताया. उनका कहना है कि जब कोई व्यक्ति किसी मूर्ति को सम्मान के साथ घर लाता है और पूरे साल उसकी पूजा करता है, तो उसे घर से बाहर निकालते समय भी सम्मान का ध्यान रखना चाहिए. उन्होंने कहा कि मूर्तियों को पेड़ के नीचे, दीवार के पास या कालिंदी कुंज के गंदे फुटपाथ पर रख देना सही तरीका नहीं है. इससे धार्मिक आस्था को ठेस पहुंचती है. देवी-देवताओं की मूर्तियों का भी सम्मान नहीं रह जाता.
प्रदूषण से बचाने में मदद मिलेगी
पवन ने कहा कि ‘आस्था का सम्मान’ नाम से बनाए गए इन केंद्रों का लोगों को अधिक से अधिक इस्तेमाल करना चाहिए. पुरानी और खंडित मूर्तियों की विदाई भी सम्मानजनक तरीके से होनी चाहिए. दिल्ली सरकार की ओर से खंडित मूर्तियों, पूजा सामग्री और अन्य सामान को रीसायकल करने की व्यवस्था की जा रही है. इससे पर्यावरण को नुकसान कम होगा. साथ ही यमुना को भी प्रदूषण से बचाने में मदद मिलेगी.
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न्यूज़18इंडिया में कार्यरत हैं. आजतक से रिपोर्टर के तौर पर करियर की शुरुआत फिर सहारा समय, ज़ी मीडिया, न्यूज नेशन और टाइम्स इंटरनेट होते हुए नेटवर्क 18 से जुड़ी. टीवी और डिजिटल न्यूज़ दोनों विधाओं में काम करने क…
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