दिल्ली न्यूज. कैंसर जैसी गंभीर बीमारी से जूझ रहे मरीजों के लिए इलाज का हर दिन बेहद अहम होता है. लेकिन अगर सरकारी अस्पताल में इलाज के दौरान जरूरी दवाएं ही उपलब्ध न हों, तो मरीज और उसके परिवार की परेशानी और बढ़ जाती है. दिल्ली के दिल्ली स्टेट कैंसर इंस्टीट्यूट (DSCI) से कुछ ऐसी ही तस्वीर सामने आई है.
अस्पताल की तरफ से जारी सितंबर की एसेंशियल ड्रग लिस्ट के मुताबिक, कैंसर के इलाज से जुड़ी कुल 178 जरूरी दवाओं में से 47 दवाएं उपलब्ध नहीं हैं. इस सूची में कई कैंसर के इलाज से जुड़ी कई अहम दवाएं भी शामिल हैं. मरीजों और उनके परिजनों का दावा है कि अस्पताल में कुछ दवाएं मिल जाती हैं, लेकिन कई महंगी दवाएं उपलब्ध नहीं होने पर उन्हें बाहर से खरीदनी पड़ रही हैं.
इतना ही नहीं, कुछ मरीजों को जरूरी टेस्ट के लिए भी भटकने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है. अस्पताल में टेस्ट से इंकार के चलते उन्हें निजी पैथ लैब से ये टेस्ट कराने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है. मरीजों और उनके परिजनों का दावा है कि सिर्फ एक टेस्ट पर 8 से 11 हजार रुपये तक खर्च करने पड़ रहे हैं.
एसेंशियल ड्रग लिस्ट में 47 दवाओं की नहीं है उपलब्धता
- डीएससीआई की तरफ से जारी की गई सितंबर माह की एसेंशियल ड्रग लिस्ट में कैंसर के इलाज से जुड़ी 178 जरूरी दवाओं को शामिल किया गया है. इनमें से 47 दवाओं की उपलब्धता के सामने ‘NO’ दर्ज है.
- एसेंशियल ड्रग लिस्ट में जिन जरूरी दवाओं के उपलब्ध न होने की बात कही गई है, उनमें लोरलाटिनिब, ओसिमर्टिनिब, बेवासिजुमैब, इरिनोटेकैन, पाल्बोसिक्लिब, टैमोक्सिफेन और ट्रास्टुजुमैब जैसी दवाएं भी शामिल हैं.
- मरीजों का कहना है कि अस्पताल में कुछ दवाएं आसानी से मिल जाती हैं, लेकिन कई महंगी और जरूरी दवाएं उपलब्ध नहीं होने पर उन्हें बाहर से खरीदने के लिए कहा जाता है.
- एक मरीज की परिजन ने बताया कि उनकी मां चौथी स्टेज के कैंसर से जूझ रही हैं. परिजन का दावा है कि पिछले 8-9 महीनों से एक महंगी दवा उन्हें बाहर से खरीदनी पड़ रही है.
दवाओं के साथ टेस्ट का भी खर्च
दिल्ली स्टेट कैंसर इंस्टीट्यूट में कैंसर का इलाज करा रहे मरीजों की दिक्कतें सिर्फ दवाओं तक सीमित नहीं हैं. बल्कि उन्हें टेस्ट के लिए भी अस्पताल से बाहर निजी पैथ लैब का रुख करने के लिए मजबूर होना पड़ता है. मरीजों के मुताबिक, एक टेस्ट के लिए उन्हें 8 हजार से 11 हजार रुपये तक खर्च करने पड़ रहे हैं. यानी मरीजों के सामने दवाओं का खर्च अलग है और जांच का खर्च अलग.
कीमोथेरेपी की दवाओं को लेकर भी शिकायत
मरीजों ने कीमोथेरेपी से जुड़ी दवाओं की उपलब्धता को लेकर भी सवाल उठाए हैं. कुछ मरीजों का कहना है कि इलाज के दौरान जरूरी दवाएं अस्पताल में उपलब्ध नहीं हैं. रिपोर्ट के दौरान एक ऐसा मरीज भी मिला, जो ठीक से बोल नहीं पा रहा था. उसने इशारों में बताया कि उसकी जरूरी दवाएं उपलब्ध नहीं होने की बात कही गई है और टेस्ट के लिए बाहर जाने को कहा गया है.
स्वास्थ्य मंत्री ने कहा- हो रही है जांच
मामला सामने आने के बाद दिल्ली के स्वास्थ्य मंत्री पंकज सिंह ने कहा कि दवाओं की उपलब्धता से जुड़ी शिकायत की जानकारी मिली है और इसकी जांच की जा रही है. उन्होंने कहा कि जांच में जो भी कारण सामने आएगा, उसके आधार पर कार्रवाई की जाएगी. कुछ मशीनें साल 2017 में खरीदी गई थीं, लेकिन 2022 तक इन मशीनों का लाइसेंस नहीं कराया गया था. हाईकोर्ट के आदेश के बाद इस मामले में भी काम किया जा रहा है.
पंकज सिंह, स्वास्थ्य मंत्री, दिल्ली सरकार
