नई दिल्ली. एशियन गेम्स के 11वें दिन भारत के लिए पदकों की शानदार बारिश हुई. भारी बारिश और कड़ाके की ठंड के बीच भारतीय एथलीटों ने अपने अदम्य साहस का परिचय देते हुए दो स्वर्ण पदक अपनी झोली में डाले. इन दो स्वर्णिम सफलताओं की बदौलत भारत ने पदक तालिका में 50 का आंकड़ा पार कर लिया है. अब कुल 52 पदकों (6 गोल्ड, 21 सिल्वर और 25 ब्रॉन्ज) के साथ भारत ओवरऑल स्टैंडिंग में शीर्ष 10 में 10वें स्थान पर पहुंच गया है. 26 सितंबर को कबड्डी में मिली दोहरी खिताबी जीत के बाद, पिछले दो दिनों से चला आ रहा गोल्ड मेडल का सूखा भी इन जीतों के साथ आखिरकार खत्म हो गया.
ग्यारहवें दिन का सबसे बड़ा और ऐतिहासिक पल निशानेबाजी रेंज से आया. नीरू ढांडा ने महिलाओं के ट्रैप इवेंट में खराब मौसम और धुंधली विजिबिलिटी जैसी कठिन परिस्थितियों को मात देते हुए व्यक्तिगत स्वर्ण पदक अपने नाम किया. नीरू ने पूरे मुकाबले के दौरान गजब का संयम बनाए रखा और फाइनल में 28 हिट के साथ एक नया एशियन गेम्स रिकॉर्ड भी स्थापित कर दिया. यह भारतीय निशानेबाजी के इतिहास में एक मील का पत्थर है, क्योंकि नीरू एशियन गेम्स में ट्रैप चैंपियन बनने वाली भारत की पहली महिला बन गई हैं. यह इस संस्करण में भारत का पहला व्यक्तिगत शूटिंग गोल्ड भी है. इसके अलावा, नीरू, आशिमा अहलावत और मनीषा कीर की तिकड़ी ने महिलाओं के ट्रैप टीम इवेंट में भारत को एक सिल्वर मेडल भी दिलाया.
एथलेटिक्स में 4×400 मीटर रिले टीम की स्वर्णिम सफलता
एथलेटिक्स ट्रैक पर भी भारतीय खिलाड़ियों का जलवा देखने को मिला. किरण, प्राची चौधरी, एमआर पूवम्मा और विथ्या रामराज की चौकड़ी ने महिलाओं की 4×400 मीटर रिले में 3:29.69 का समय निकालते हुए पहला स्थान हासिल किया और भारत को इन खेलों का पहला एथलेटिक्स गोल्ड मेडल दिला दिया. 36 वर्षीय दिग्गज धावक पूवम्मा के लिए यह जीत बेहद खास रही, जो 2014 और 2018 में भी स्वर्ण पदक विजेता रिले टीम का अहम हिस्सा रही थीं. वहीं, विथ्या रामराज ने इससे पहले पीटी उषा के दशकों पुराने रिकॉर्ड को तोड़ने के बाद, एक और मेडल के साथ अपने इस अभियान को यादगार बना दिया.
गुलवीर सिंह का ऐतिहासिक तिहरा पदक
एथलेटिक्स के अन्य इवेंट्स में 19 वर्षीय हाई जम्पर पूजा सिंह ने 1.84 मीटर की छलांग लगाकर ब्रॉन्ज मेडल जीता. इसके साथ ही, गुलवीर सिंह ने ट्रैक पर अपना शानदार फॉर्म जारी रखते हुए पुरुषों की 5000 मीटर रेस में कांस्य पदक हासिल किया. इससे पहले वे 10,000 मीटर और 1500 मीटर में सिल्वर मेडल जीत चुके थे. इस कांस्य के साथ उन्होंने एक ही एशियन गेम्स में तीन ट्रैक एंड फील्ड मेडल जीतने का दुर्लभ कारनामा कर दिखाया. उनसे पहले 1951 के उद्घाटन संस्करण में केवल लवी पिंटो ने ही ऐसा किया था. मिक्स्ड 4×100 मीटर रिले में भारत ने 41.06 सेकंड के सीजन बेस्ट टाइम के साथ और पुरुषों की 4×400 मीटर रिले टीम ने भी अपने इवेंट में कांस्य पदक हासिल किया. हालांकि, 800 मीटर की रेस में भारत खाली हाथ रहा.
बॉक्सिंग में अंकुश और परवीन फाइनल में
बॉक्सिंग रिंग में भी भारतीय मुक्केबाजों का दबदबा देखने को मिला. अंकुश पंघाल ने पुरुषों के 80 किलोग्राम वर्ग के फाइनल में जगह बनाकर आठ साल के लंबे इंतजार को खत्म कर दिया. उन्होंने उज्बेकिस्तान के मौजूदा 75 किग्रा विश्व चैंपियन फजलुद्दीन एर्किनबोएव को 4-1 से हराकर गोल्ड मेडल बाउट के लिए अपना टिकट पक्का किया. महिलाओं के 65 किलोग्राम वर्ग में परवीन हुड्डा ने भी चीन की ली शू पर 5-0 की शानदार जीत दर्ज करते हुए फाइनल में प्रवेश किया. सुपर-हेवीवेट (+90 किग्रा) वर्ग में नरेंद्र बेरवाल को कजाकिस्तान के मौजूदा विश्व चैंपियन एबेक ओरलबाय से सेमीफाइनल में हार के बाद ब्रॉन्ज मेडल से संतोष करना पड़ा. इसके साथ ही मुक्केबाजी में भारत के छह पदक पक्के हो गए हैं.
वॉलीबॉल में शानदार वापसी और तीरंदाजी में उलटफेर
अन्य खेलों में भी भारत ने अपने कदम मजबूती से आगे बढ़ाए. वॉलीबॉल में भारतीय पुरुष टीम ने कतर के खिलाफ दो सेट से पिछड़ने के बाद ऐतिहासिक वापसी की. भारत ने करीब पौने तीन घंटे तक चले मैराथन मुकाबले को जीतकर क्वार्टर फाइनल में प्रवेश किया. तीरंदाजी में नीरज चौहान ने बड़ा उलटफेर करते हुए दक्षिण कोरिया के तीन बार के ओलंपिक स्वर्ण पदक विजेता किम जे देओक को 6-4 से हराकर सनसनी फैला दी. धीरज बोम्मादेवरा और महिलाओं में कुमकुम मोहद अनिल ने भी अपने-अपने मैच जीतकर अंतिम आठ में जगह पक्की की.
स्क्वैश और टेनिस में शानदार प्रदर्शन, साइकिलिंग में निराशा
स्क्वैश में, भारतीय महिला टीम ने अपने आखिरी ग्रुप मैच में ईरान का 3-0 से सूपड़ा साफ करते हुए क्वार्टर फाइनल का टिकट कटाया, जहां उनका मुकाबला सिंगापुर से होगा. टेनिस में सुमित नागल और दक्षिणेश्वर सुरेश ने बारिश से प्रभावित अपने-अपने मेंस सिंगल्स मुकाबलों में शानदार जीत दर्ज करते हुए प्री-क्वार्टर फाइनल में जगह बनाई. हालांकि, साइकिलिंग में भारत को निराशा हाथ लगी, लेकिन कुल मिलाकर 10वां दिन भारतीय दल के लिए स्वर्णिम सफलताओं और ऐतिहासिक उपलब्धियों से भरा रहा.
