हिंदी केवल भाषा नहीं, सांस्कृतिक चेतना है: शिवाजी कॉलेज में हिंदी माह का भव्य समापन, नासिरा शर्मा रहीं मौजूद

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हिंदी केवल भाषा नहीं, सांस्कृतिक चेतना है: शिवाजी कॉलेज में हिंदी माह का समापन

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प्रो. वीरेंद्र भारद्वाज ने कहा कि हिंदी सिर्फ संवाद की भाषा नहीं, बल्कि हमारी सांस्कृतिक पहचान और अभिव्यक्ति की सशक्त रीढ़ है. उन्होंने प्रसिद्ध लेखिका नासिरा शर्मा के वैश्विक योगदान को रेखांकित करते हुए कहा कि वे दुनिया भर में भारतीय संस्कृति की सच्ची संवाहक बनी हैं.

डीयू के शिवाजी कॉलेज में महीने भर चला हिंदी का उत्सव.

शिवाजी कॉलेज, दिल्ली विश्वविद्यालय की राजभाषा समिति एवं बी.ए. प्रोग्राम विभाग के संयुक्त तत्त्वावधान में हिंदी माह 2026 (1–30 सितंबर) के अंतर्गत आयोजित विभिन्न कार्यक्रमों की श्रृंखला के समापन अवसर पर 30 सितंबर 2026 को पेशवा बाजीराव सभागार में हिंदी माह 2026 का समापन एवं पुरस्कार वितरण समारोह आयोजित किया गया. कार्यक्रम में कॉलेज के प्राचार्य प्रो. वीरेंद्र भारद्वाज तथा विशिष्ट अतिथि प्रसिद्ध लेखिका नासिरा शर्मा उपस्थित रहीं. कार्यक्रम का शुभारंभ सरस्वती वंदना एवं दीप प्रज्ज्वलन के साथ हुआ . तत्पश्चात वंदे मातरम् का गायन एवं अतिथियों का स्वागत किया गया. राजभाषा संयोजक डॉ. तरुण ने राजभाषा माह पर एक विस्तृत प्रतिवेदन प्रस्तुत किया.

अपने संबोधन में प्राचार्य प्रो. वीरेंद्र भारद्वाज ने हिंदी माह के सफल आयोजन के लिए राजभाषा समिति, बी.ए. (प्रोग्राम) विभाग तथा आयोजन से जुड़े सभी शिक्षक एवं कर्मचारियों को बधाई दी. उन्होंने कहा कि हिंदी केवल भाषा के रूप में ही नहीं, बल्कि हमारी सांस्कृतिक चेतना और अभिव्यक्ति का भी सशक्त माध्यम है. उन्होंने कहा कि नासिरा शर्मा जी विभिन्न देशों में सांस्कृतिक संचार की वाहिका बनी. कॉलेज में हिंदी के अधिकाधिक प्रयोग तथा साहित्यिक एवं रचनात्मक गतिविधियों को निरंतर प्रोत्साहित किया जाना चाहिए.

विशिष्ट अतिथि प्रसिद्ध लेखिका नासिरा शर्मा ने अपने वक्तव्य में
हिंदी भाषा के प्रति प्रेम और सम्मान की आवश्यकता पर विस्तार से प्रकाश डाला. उन्होंने कहा कि हिंदी केवल साहित्य की भाषा ही नहीं, बल्कि हमारे दैनिक जीवन और बोलचाल से गहराई से जुड़ी भाषा है. हिंदी साहित्य की समृद्ध परंपरा और व्यापक जन-प्रयोग इसकी महत्ता को और अधिक स्थापित करते हैं. उन्होंने विद्यार्थियों से हिंदी को सहज रूप से अपनाने तथा हिंदी के प्रति प्रेम और आत्मीयता का भाव विकसित करने का आह्वान किया. उन्होंने इस बात पर विशेष बल दिया कि हिंदी के प्रति प्रेम केवल औपचारिक अवसरों तक सीमित न रहकर हमारे व्यवहार, संवाद और दैनिक जीवन का हिस्सा बनना चाहिए.

समारोह में हिंदी माह के अंतर्गत आयोजित विभिन्न प्रतियोगिताओं के विजेताओं को सम्मानित किया गया.सृजनात्मक लेखन प्रतियोगिता में प्रथम पुरस्कार डॉ. धारा सिंह कुशवाहा (राजनीति विज्ञान विभाग), द्वितीय पुरस्कार श्री स्कंद प्रिय (इतिहास विभाग) तथा तृतीय पुरस्कार डॉ. मोहन कुमार (राजनीति विज्ञान विभाग) को प्रदान किया गया. सांत्वना पुरस्कार डॉ. योगिता नेगी (वाणिज्य विभाग) एवं डॉ. सीमा तलवार (वनस्पति विज्ञान विभाग) को प्रदान किए गए. कार्यक्रम के अंत में बी.ए. (प्रोग्राम) प्रभारी स्कंद प्रिय द्वारा धन्यवाद ज्ञापन किया गया. भोजनावकाश के बाद रिवर्ब द्वारा गजल की मनमोहक प्रस्तुति की गई. कुलगीत गायन के साथ कार्यक्रम का समापन हुआ.

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