Ghaziabad News : प्याज हो या पनीर…गाजियाबाद में यहां के पकौड़ियों का जवाब नहीं, तल रही तीसरी पीढ़ी, जानिए लोकेशन

Last Updated:

Pandit ji pakode wale ghaziabad : गाजियाबाद में ‘पंडित जी की पकौड़ी’ के बारे में कौन नहीं जानता. यहां गरमा-गरम और कुरकुरी पकौड़ियों का स्वाद लेने लोग दूर-दूर से पहुंचते हैं. सालों बाद भी दुकान के स्वाद और सादगी में ज्यादा बदलाव नहीं आया है. प्रवीण शर्मा की तीसरी पीढ़ी पकौड़ी बेच रही है. लोकल 18 से वे बताते हैं कि उनके यहां आलू, प्याज, पालक, गोभी, बैंगन और मिर्च समेत कई तरह की पकौड़ियां बनाई जाती हैं. इस दुकान की कचौड़ी भी लोगों के बीच काफी पसंद की जाती है, जिसे गरमा-गरम सब्जी के साथ परोसा जाता है.

गाजियाबाद. यूपी के गाजियाबाद शहर के पुराने बाजारों की पहचान सिर्फ उनकी दुकानों और खरीदारी से नहीं बल्कि वहां मिलने वाले पुराने जायके से भी होती है. नवयुग मार्केट में ऐसी ही एक दुकान है जिसे लोग ‘पंडित जी की पकौड़ी’ के नाम से जानते हैं. यहां गरमा-गरम और कुरकुरी पकौड़ियों का स्वाद लेने के लिए लोग दूर-दूर से पहुंचते हैं. बाजार में खरीदारी करने आए लोगों के कदम भी इस दुकान पर आकर रुक जाते हैं. सालों बाद भी दुकान के स्वाद और सादगी में ज्यादा बदलाव नहीं आया है. लोकल 18 से दुकान संचालक प्रवीण शर्मा बताते हैं कि उन्हें खुद इस दुकान को संभालते हुए करीब 30 साल हो चुके हैं. हालांकि इस दुकान की कहानी इससे भी पुरानी है. उनके पिता और बाबा भी पकौड़ी बनाने का काम करते थे. यानी परिवार की कई पीढ़ियों से यह स्वाद लोगों तक पहुंच रहा है.

तब 10 रुपये किलो थी

प्रवीण शर्मा बताते हैं कि उनके बाबा के समय में पकौड़ी करीब 10 रुपये किलो मिलती थी. उस दौर में एक रुपये में करीब 100 ग्राम पकौड़ी का हिसाब होता था. समय के साथ महंगाई बढ़ी और आज सामान्य पकौड़ी की कीमत करीब 400 रुपये किलो जबकि पनीर की पकौड़ी 600 रुपये किलो है. पंडित जी की दुकान पर सिर्फ एक तरह की पकौड़ी नहीं मिलती. यहां आलू, प्याज, पालक, गोभी, बैंगन और मिर्च समेत कई तरह की पकौड़ियां तैयार की जाती हैं. मूंग दाल और चने की दाल की पकौड़ी भी ग्राहकों को पसंद आती है. गरमा-गरम पकौड़ियों के साथ हरी चटनी और सॉस का स्वाद लोगों को और भी आकर्षित करता है.

गाजियाबाद ही नहीं बल्कि आसपास के इलाकों से भी लोग पंडित जी की मशहूर पकौड़ियों का स्वाद लेने नवयुग मार्केट पहुंचते हैं. सुबह होते ही दुकान सज जाती है और गरमा-गरम पकौड़ियों की खुशबू लोगों को अपनी ओर खींचने लगती है. दुकान की कचौड़ी भी लोगों के बीच काफी पसंद की जाती है जिसे गरमा-गरम सब्जी के साथ परोसा जाता है. बाजार में खरीदारी के लिए आने वाले लोग हों या खास तौर पर स्वाद लेने पहुंचने वाले ग्राहक कई लोग कचौड़ी और पकौड़ी का स्वाद लिए बिना यहां से नहीं लौटते.

चटनी क्यों इतनी अलग

दुकान की चटनी भी यहां के स्वाद की खास पहचान है. प्रवीण शर्मा बताते हैं कि चटनी में इमली का इस्तेमाल नहीं किया जाता. इसके बजाय आम की खटाई और अमचूर का इस्तेमाल किया जाता है. उनका मानना है कि जब सामान और स्वाद अच्छा होगा तो ग्राहक खुद दुकान तक आएंगे. नवयुग मार्केट के पुराने बस स्टैंड के पास स्थित यह दुकान आज भी पुराने गाजियाबाद के स्वाद को जिंदा रखे हुए है. 30 साल से ज्यादा समय से पकौड़ी तल रहे पंडित जी के लिए यह सिर्फ दुकान नहीं, बल्कि परिवार की विरासत है जिसे वह आज भी उसी सादगी के साथ आगे बढ़ा रहे हैं.

About the Author

Priyanshu Gupta

प्रियांशु को एक दशक से ज्यादा हो गए पत्रकारिता में. 2015 में भारतीय जनसंचार संस्थान (IIMC), दिल्ली से जर्नलिज्म की पढ़ाई पूरी कर अमर उजाला (प्रिंट, नोएडा ऑफिस) से अपने करियर की शुरुआत की. यहां लंबे समय तक हरिया…

और पढ़ें

Source link

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *