किताबों में गांधी या जिंदगी में भी? 'गांधी जयंती' पर जनता का Gandhi Test, युवाओं और बुजुर्गों ने दिए दिलचस्प जवाब

नोएडा: गांधी जयंती (Gandhi Jayanti 2026) पर महात्मा गांधी को याद करने का मतलब सिर्फ उनके विचारों और भाषणों की चर्चा करना नहीं है. असली सवाल यह है कि रोजमर्रा की जिंदगी में हम उनकी सीख को कितना अपनाते हैं. इसी को समझने के लिए Local 18 ने गांधी जयंती को लेकर छात्रों, युवाओं और आम लोगों से कुछ ऐसे सवाल किए गए, जिनका सामना हम अपनी रोज की जिंदगी में करते हैं.

‘Gandhi Test’ में लोगों से झूठ बोलने, रिश्वत देने, सोशल मीडिया पर गाली-गलौज करने, बिना जांचे कोई मैसेज आगे भेजने, स्वदेशी सामान खरीदने, हिंसक प्रदर्शन, सार्वजनिक जगहों पर सफाई और भ्रष्टाचार के खिलाफ आवाज उठाने जैसे कई सवाल पूछे गए. लोगों के जवाबों में गांधी जी की सीख के साथ आज की जिंदगी की परिस्थितियों की झलक भी देखने को मिली. किसी ने अहिंसा को जरूरी बताया तो किसी ने धैर्य, स्वच्छता और किसी ने किसी भी जानकारी को आगे बढ़ाने से पहले उसकी जांच करने पर जोर दिया.

छात्राओं की रोजमर्रा की जिंदगी में कितनी गांधीवादी सोच?

एमिटी यूनिवर्सिटी में बीटेक एयरोस्पेस की तृतीय वर्ष की छात्रा यशिका कुमार और तरुणा वर्मा से जब रोजमर्रा की जिंदगी में झूठ बोलने को लेकर सवाल किया गया तो उन्होंने कहा कि यह परिस्थिति पर निर्भर करता है. वहीं सोशल मीडिया पर गाली-गलौज वाले मैसेज फॉरवर्ड करने और बिना जांचे कोई संदेश साझा करने से उन्होंने साफ इनकार किया. विदेशी सामान की जगह स्वदेशी सामान खरीदने के सवाल पर उन्होंने कहा कि यह सामान पर निर्भर करता है. हिंसक प्रदर्शन के समर्थन से भी उन्होंने दूरी बनाई. यशिका ने सार्वजनिक जगहों पर सफाई रखने और भ्रष्टाचार सामने आने पर आवाज उठाने की बात कही. तो वहीं, गांधी जी की कौन सी सीख निजी जिंदगी में अपनाती हैं, इस सवाल पर उन्होंने अहिंसा और धैर्य को अहम बताया. उनका कहना था कि किसी भी फैसले को जल्दबाजी में लेने के बजाय धैर्य के साथ सोचना चाहिए.

बुजुर्गों के जवाब में दिखी धैर्य और अहिंसा की बात

आम नागरिक अमित सिंह से जब गांधीवादी सोच से जुड़े सवाल पूछे गए तो उन्होंने बताया कि वह रिश्वत नहीं देते. सोशल मीडिया पर गाली-गलौज करने को भी उन्होंने सही नहीं माना. भारतीय सामान खरीदने को लेकर उन्होंने अपनी प्राथमिकता बताई, लेकिन साथ ही कहा कि व्यक्ति वही सामान खरीदेगा जो उसके लिए अच्छा और उपयोगी हो. हिंसक प्रदर्शन और तोड़फोड़ को उन्होंने गलत बताया. बिना जांचे नफरत भरा मैसेज आगे भेजने से भी उन्होंने इनकार किया. सार्वजनिक सफाई को जरूरी बताते हुए उन्होंने कहा कि कूड़ा डस्टबिन में ही डालना चाहिए. भ्रष्टाचार के खिलाफ आवाज उठाने की बात करते हुए उन्होंने गांधी जी की सीख के रूप में सब्र को याद किया. उनके मुताबिक हर बात का जवाब तुरंत देना जरूरी नहीं है.

दीपक बोले, परिस्थितियां भी देखनी पड़ती हैं

एक अन्य नागरिक दीपक के जवाबों में आज की जिंदगी को लेकर अलग सोच देखने को मिली. उन्होंने माना कि कुछ परिस्थितियों में झूठ बोलना पड़ सकता है. हालांकि रिश्वत देने के सवाल पर उन्होंने इससे इनकार किया. सोशल मीडिया को लेकर उन्होंने कहा कि आज इसका इस्तेमाल बच्चों और युवाओं का काफी समय ले रहा है. स्वदेशी सामान को प्राथमिकता देने की बात करते हुए उन्होंने हिंसा के सवाल पर कहा कि हर समस्या का समाधान मार-काट से नहीं हो सकता. कई मामलों को बातचीत और शांति से भी सुलझाया जा सकता है.

बिना जांचे नफरत भरा संदेश आगे भेजने को उन्होंने गलत बताया. उन्होंने सोशल मीडिया पर होने वाले स्कैम का जिक्र करते हुए कहा कि किसी भी जानकारी को आगे बढ़ाने से पहले उसकी जांच करना जरूरी है. भ्रष्टाचार के मामले में उन्होंने कहा कि जहां उनकी आवाज का असर हो सकता है, वहां वह आवाज उठाते हैं.

Gen Z ने कहा, किसी भी जानकारी को पहले करें क्रॉस-चेक

योग शिक्षक सुधीर और Gen Z कैटेगरी में आने वाले श्रीधर शुक्ला, अहद और सलमान ने भी गांधी जी के विचारों को अपनी जिंदगी से जोड़कर जवाब दिए. उन्होंने अहिंसा को जरूरी बताया और कहा कि किसी भी नकारात्मक या विवादित जानकारी को आगे बढ़ाने से पहले उसका क्रॉस-चेक करना चाहिए. सार्वजनिक जगहों पर सफाई को उन्होंने जरूरी बताया. उनका कहना था कि साफ-सफाई से बीमारियों से बचाव में मदद मिलती है. महात्मा गांधी की सीख के बारे में पूछे जाने पर उन्होंने उनके तीन बंदरों का जिक्र किया और अहिंसा को अपने जीवन में अपनाने की बात कही.

जवाबों में दिखा अलग-अलग नजरिया

लोगों से पूछे गए इन सवालों के जवाबों में गांधीवादी सोच को लेकर अलग-अलग नजरिया सामने आया. किसी के लिए अहिंसा सबसे जरूरी थी, किसी ने धैर्य को अहम बताया तो किसी ने स्वच्छता और किसी ने बिना जांचे जानकारी आगे न बढ़ाने की बात कही. इन जवाबों से इतना जरूर सामने आया कि गांधी जी की सीख आज भी लोगों की बातचीत और सोच का हिस्सा है, लेकिन हर व्यक्ति उसे अपनी परिस्थितियों और रोजमर्रा की जिंदगी के हिसाब से अलग तरह से देखता है.

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