Surendra Koli: 'सुसाइड नहीं, यह मर्डर है…' निठारी कांड के सुरेंद्र कोली की मौत पर परिजनों ने खड़े किए बड़े सवाल

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Nithari Case Surendra Koli Death: निठारी कांड (Nithari Kand) के मुख्य आरोपी सुरेंद्र कोली की संदिग्ध मौत मामले में नया मोड़ आ गया है. हरिद्वार में शव मिलने के बाद कोली के परिजन वहां पहुंच गए हैं. उन्होंने इस मौत को आत्महत्या मानने से साफ इनकार कर दिया है. बड़े भाई, बेटे और पूर्व जिला पंचायत सदस्य नारायण सिंह रावत ने हत्या की आशंका जताते हुए निष्पक्ष जांच की मांग की है. 

निठारी कांड के आरोपी के परिजनों ने सुरेंद्र कोली की हत्या की आशंका जताया है. (फाइल फोटो)

Surendra Koli Death: उत्तर प्रदेश के नोएडा का निठारी हत्याकांड एक बार फिर से काफी चर्चा में है. क्योंकि इसके मुख्य आरोपी सुरेंद्र कोली की मौत हो गई है. बीते शुक्रवार को उसका शव हरिद्वार में एक चाय की टपरी में संदिग्ध परिस्थितियों में लटकता हुआ मिला. आज यानी कि शनिवार को उसके शव का पोस्टमार्टम कराया जाना है. मौत की खबर मिलते ही कोली का बड़ा भाई, बेटा और गांव के चार-पांच अन्य लोग हरिद्वार स्थित पोस्टमार्टम हाउस पहुंच गए हैं.

इस मामले में पूर्व जिला पंचायत सदस्य नारायण सिंह रावत और सुरेंद्र कोली के परिजनों ने गंभीर सवाल उठाए हैं. परिजनों ने हत्या का आशंका जताया है. उनका कहना है कि कोली ने सुसाइड नहीं किया है. परिजनों का तर्क है कि जिस अवस्था और परिस्थिति में सुरेंद्र कोली का शव बरामद हुआ है, उससे कई सवाल खड़े हो रहे हैं. उनका कहना है कि प्रथम दृष्टया यह पूरा मामला हत्या का प्रतीत हो रहा है. परिजनों ने पुलिस प्रशासन से पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की है. वहीं, पुलिस का कहना है कि मामले की जांच की जा रही है और पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही मौत की वास्तविक वजह स्पष्ट हो सकेगी.

क्या था निठारी कांड?
नोएडा के निठारी गांव में मोनिंदर सिंह पंढेर की कोठी (D-5) के पास वाले नाले से पुलिस ने कई मासूम बच्चों और महिलाओं के नरकंकाल बरामद किए थे. इस वारदात को अंजाम देने का आरोप पंढेर के नौकर सुरेंद्र कोली पर लगा था. कोली पर हत्या, दुष्कर्म और नरभक्षण जैसे रूह कंपा देने वाले आरोप लगे थे. सीबीआई ने कई मामलों में चार्जशीट दाखिल की थी. निचली अदालत ने उसे फांसी की सजा सुनाई थी. हालांकि, कुछ समय पहले इलाहाबाद हाईकोर्ट ने साक्ष्यों के अभाव में उसे कई मामलों में बरी कर दिया था.

निठारी कांड का भंडाफोड़ कैसे हुआ?
नोएडा के निठारी गांव से साल 2005 और 2006 के दौरान लगातार बच्चे और महिलाएं गायब हो रहे थे. शुरुआत में स्थानीय पुलिस ने इन गुमशुदगी की रिपोर्टों को गंभीरता से नहीं लिया और इसे सामान्य मामला मानकर टाल दिया. इस खौफनाक मामले का पर्दाफाश तब हुआ जब ‘पायल’ नाम की एक युवती लापता हुई.

पायल के पिता की शिकायत के बाद पुलिस ने उसके मोबाइल फोन की कॉल डिटेल्स और लोकेशन खंगाली. मोबाइल की लोकेशन मोनिंदर सिंह पंढेर की डी-5 कोठी के आसपास मिली. शक के आधार पर 29 दिसंबर 2006 को पुलिस ने कोठी के पीछे बने नाले की सफाई और खुदाई करवाई. इस खुदाई में पुलिस को एक के बाद एक 19 नरकंकाल, खोपड़ियां और बच्चों के कपड़े बरामद हुए. इसके तुरंत बाद कोठी के मालिक मोनिंदर सिंह पंढेर और उसके नौकर सुरेंद्र कोली को गिरफ्तार कर लिया गया. पूछताछ में कोली ने अपहरण, दुष्कर्म, हत्या और नरभक्षण वाली बातें कबूल कीं.

केस और कोर्ट में सुनवाई की पूरी टाइमलाइन

  • 2005 – 2006: निठारी गांव से दर्जनों बच्चों और महिलाओं के लापता होने का सिलसिला.
  • 29 दिसंबर 2006: पंढेर की कोठी के पास नाले से नरकंकाल बरामद. पुलिस ने मोनिंदर सिंह पंढेर और सुरेंद्र कोली को गिरफ्तार किया.
  • 11 जनवरी 2007: मामले की भयावहता और पुलिस की लापरवाही को देखते हुए जांच सीबीआई (CBI) को सौंप दी गई.
  • मई 2007: सीबीआई ने मामले में अपनी पहली चार्जशीट (रिमपा हलदर केस) दाखिल की.
  • 13 फरवरी 2009: गाजियाबाद की विशेष सीबीआई अदालत ने रिमपा हलदर हत्याकांड में सुरेंद्र कोली और मोनिंदर सिंह पंढेर को दोषी करार देते हुए पहली बार फांसी की सजा सुनाई.
  • सितंबर 2009: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने पंढेर को रिमपा हलदर केस में बरी कर दिया, लेकिन सुरेंद्र कोली की फांसी की सजा बरकरार रखी.
  • 2010 से 2014: सुप्रीम कोर्ट ने सुरेंद्र कोली की फांसी की सजा को बरकरार रखा. इसके बाद उसकी दया याचिका भी राष्ट्रपति द्वारा खारिज कर दी गई.
  • 2015 से 2022: गाजियाबाद की विशेष सीबीआई अदालत ने अलग-अलग मामलों की सुनवाई करते हुए सुरेंद्र कोली को एक के बाद एक करीब 12 से अधिक मुकदमों में फांसी की सजा सुनाई. पंढेर को भी कुछ मामलों में दोषी ठहराया गया.
  • 16 अक्टूबर 2023: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने एनिठारी कांड के मुख्य आरोपी सुरेंद्र कोली को 12 मुकदमों और मोनिंदर सिंह पंढेर को 2 मुकदमों में पूरी तरह बरी कर दिया. कोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि अभियोजन पक्ष (CBI) परिस्थितिजन्य साक्ष्यों को साबित करने में विफल रहा और जांच में भारी खामियां थीं. साक्ष्यों के अभाव और गवाहों के बयानों में विरोधाभास के कारण उन्हें रिहा कर दिया गया.

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Deep Raj DeepakSub-Editor

सिविल सर्विसेज की तैयारी करते-करते कब 4 साल पहले पत्रकारिता की ओर झुकाव हो गया पता ही नहीं चला. नाम दीप राज दीपक है. वर्तमान में News18 हिंदी के साथ जुड़े हुए हैं. पद सब-एडिटर …

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