राजा की शपथ नहीं लूंगा…कनाडा के SC पहुंचा सिख वकील प्रभजोत का मामला, आस्था के आगे झुका कानून

कनाडा के अल्बर्टा प्रांत से आस्था बनाम करियर का मामला सामने आया है. यहा रहने वाले सिख वकील प्रभजोत सिंह विरिंग की कानूनी लड़ाई अब कनाडा की सर्वोच्च अदालत तक पहुंच गई है. विरिंग ने करियर के लिए राजा की शपथ लेने से इनकार कर दिया था और इसे अपनी धार्मिक आजादी का उल्लंघन बताया था. हालांकि यह मामला सिर्फ एक शपथ का नहीं, बल्कि धार्मिक स्वतंत्रता और पेशेवर करियर के बीच के संघर्ष का प्रतीक बन गया है. जिस पर अब कनाडा की सुप्रीम अदालत फैसला लेगी.

ट्रिब्यून इंडिया में छपी खबर के मुताबिक प्रभजोत सिंह विरिंग एडमॉन्टन के रहने वाले अमृतधारी सिख हैं. अमृतधारी सिख वह होते हैं जिन्होंने गुरु ग्रंथ साहिब के सामने आजीवन अकाल पुरख (परमात्मा) के प्रति निष्ठा की शपथ ली होती है. विरिंग का कहना है कि उनकी आस्था उन्हें किसी सांसारिक शासक या राजा-रानी के प्रति वैसी ही निष्ठा की शपथ लेने की इजाजत नहीं देती.लिहाजा उन्होंने अपने करियर के लिए राजा की शपथ लेने से इनकार कर दिया. हालांकि इससे मसला हल नहीं हुआ.

क्योंकि अल्बर्टा में वकील बनने के लिए कानून के अनुसार राजा (पहले रानी) के प्रति “सच्ची निष्ठा” की शपथ लेनी पड़ती है. ऐसे में विरिंग के सामने धर्म संकट था कि या तो वे राजा की शपथ लें और वकील बनें या आस्था छोड़कर शपथ ले लें,उन्होंने तीसरा रास्ता चुना और अदालत का दरवाजा खटखटाया.

जून 2022 में उन्होंने अल्बर्टा सरकार और अल्बर्टा लॉ सोसाइटी के खिलाफ मुकदमा दायर किया. उनका तर्क था कि राजा के प्रति अनिवार्य शपथ उनके संवैधानिक अधिकार यानी धार्मिक स्वतंत्रता का उल्लंघन करती है.

शुरुआत में वे लड़ाई हार गए. अक्टूबर 2023 में कोर्ट ऑफ किंग्स बेंच ने उनका दावा खारिज कर दिया. अदालत ने कहा कि यह शपथ प्रतीकात्मक है और इससे उनकी धार्मिक स्वतंत्रता का सीधा उल्लंघन नहीं होता.

विरिंग हार मानने वाले नहीं थे. उन्होंने अपील की. 16 दिसंबर 2025 को अल्बर्टा की अपील अदालत ने तीन जजों की पीठ के सर्वसम्मत फैसले में उनके पक्ष में फैसला सुनाया. अदालत ने कहा कि वकीलों को राजा के प्रति शपथ लेने के लिए मजबूर करना धार्मिक स्वतंत्रता का अनुचित उल्लंघन है और यह असंवैधानिक है. अदालत ने प्रांतीय कानून में बदलाव या इसे रद्द करने का आदेश दिया, ताकि धार्मिक आधार पर छूट दी जा सके.

कई प्रांतों में अनिवार्य नहीं शपथ
यह फैसला महत्वपूर्ण इसलिए भी है क्योंकि ब्रिटिश कोलंबिया, सस्केचवान और ओन्टारियो जैसे प्रांतों में पहले ही राजा के प्रति शपथ की अनिवार्यता को खत्म कर दिया गया है या वैकल्पिक विकल्प उपलब्ध कराए गए हैं. अल्बर्टा भी अब उसी राह पर बढ़ रहा था.

लेकिन अल्बर्टा सरकार इस फैसले से सहमत नहीं हुई. फरवरी 2026 में उसने सुप्रीम कोर्ट ऑफ कनाडा में अपील दायर कर दी. अगस्त 2026 में सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले को सुनने के लिए स्वीकार कर लिया.

अब अंतिम फैसला कनाडा की सबसे बड़ी अदालत को करना है. इस फैसले से तय होगा कि क्या अल्बर्टा वकीलों से राजा के प्रति शपथ लेना संवैधानिक रूप से मांग सकता है, और जिनकी धार्मिक आस्था इसकी इजाजत नहीं देती, उन्हें कितनी छूट दी जानी चाहिए.

प्रभजोत सिंह विरिंग के लिए यह लड़ाई सिर्फ अपनी आस्था की रक्षा की नहीं है. यह उन सभी पेशेवरों के लिए मिसाल बन गई है, जिन्हें अपने धर्म और करियर में से किसी एक को चुनने के लिए मजबूर होना पड़ता है. कनाडा का सिख समुदाय भी उनका समर्थन कर रहा है.

प्रभजोत सिंह विरिंग की यह लड़ाई 2022 में शुरू हुई थी. चार साल बाद यह कनाडा की सबसे ऊंची अदालत तक पहुंच गई है. चाहे फैसला कुछ भी हो, यह मामला लंबे समय तक याद रखा जाएगा. एक ऐसे व्यक्ति की कहानी के रूप में, जिसने अपनी आस्था के लिए पूरी कानूनी व्यवस्था से टक्कर लेने का साहस दिखाया.

Source link

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *