प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी कई मौकों पर अपनी मां हीराबेन मोदी का जिक्र कर चुके हैं. उन्होंने बताया है कि उनकी मां ने उन्हें जीवन, ईमानदारी, मेहनत और सेवा से जुड़े कई ऐसे संस्कार दिए, जिन्होंने उनके व्यक्तित्व को आकार दिया. पीएम मोदी ने अपनी मां के 100वें जन्मवर्ष पर लिखे एक भावुक ब्लॉग में भी इन सीखों का उल्लेख किया था.
आज नरेंद्र मोदी ने सत्ता में 25 साल पूरे किए हैं. ये एक लंबा सफर देश में कई सकारात्मक बदलों से भरा हुआ है. भाजपा ने इस दिन को ‘जनसेवा दिवस’ का नाम दिया है. इस पूरे सफर में मां का साथ पीएम मोदी की एक बड़ी हिम्मत बनकर रही. कई बार अपने भाषण में पीएम मोदी ने बताया कि कैसे उनकी मां के विचारों ने उन्हें एक बेहत इंसान और जनसेवक बनाया है.
मां की दी गई 5 सीखें
कभी रिश्वत मत लेना
जब नरेंद्र मोदी गुजरात के मुख्यमंत्री बनने वाले थे, तब उनकी मां ने उन्हें एक बेहद साधारण लेकिन महत्वपूर्ण सलाह दी थी. उन्होंने कहा था, “कभी रिश्वत मत लेना.” पीएम मोदी ने कई बार इस बात का जिक्र किया है कि यह सीख उनके जीवन के मूल मूल्यों में शामिल रही.
मेहनत ही हर मुश्किल का समाधान है
हीराबेन मोदी का जीवन संघर्षों से भरा था. परिवार की आर्थिक स्थिति कमजोर होने के बावजूद उन्होंने लगातार मेहनत की और परिवार को संभाला. पीएम मोदी के अनुसार, उनकी मां का मंत्र था कि कठिन परिस्थितियों से निकलने का सबसे अच्छा तरीका निरंतर परिश्रम करना है.
सादगी में ही असली सम्मान है
पीएम मोदी ने बताया है कि उनकी मां ने हमेशा बेहद सादा जीवन जिया. उनके नाम कोई बड़ी संपत्ति नहीं थी और उन्हें दिखावे या आभूषणों का शौक नहीं था. इसी सादगी ने उन्हें विनम्रता और जमीन से जुड़े रहने की सीख दी.
अन्न का सम्मान करो, भोजन बर्बाद मत करो
हीराबेन अपने बच्चों को हमेशा समझाती थीं कि थाली में उतना ही भोजन लें जितना खा सकें. वे खुद भी कभी भोजन बर्बाद नहीं करती थीं. पीएम मोदी ने लिखा है कि बचपन से मिली यह सीख आज भी उनके जीवन का हिस्सा है.
दूसरों की सेवा और करुणा सबसे बड़ा धर्म है
हीराबेन सिर्फ अपने परिवार का ही नहीं, बल्कि आसपास के लोगों, पशु-पक्षियों और जरूरतमंदों का भी ख्याल रखती थीं. गर्मियों में पक्षियों के लिए पानी रखना, गायों को रोटी खिलाना और दूसरों की मदद करना उनकी आदत थी. इससे पीएम मोदी को सेवा, दया और समाज के प्रति जिम्मेदारी का भाव मिला.
मां से मिली एक और खास सीख
पीएम मोदी ने यह भी बताया कि उनकी मां ने उन्हें सिखाया कि बिना औपचारिक शिक्षा के भी व्यक्ति ज्ञानवान और समझदार हो सकता है. उन्होंने हमेशा शिक्षकों और ज्ञान का सम्मान करने पर जोर दिया.
