नई दिल्ली: राजधानी में विरोध प्रदर्शन करने के नियम बदल गए हैं. अगर आप या आपका संगठन जंतर मंतर पर धरना देने की तैयारी कर रहे हैं तो यह खबर आपके लिए बेहद अहम है. सुप्रीम कोर्ट के एक पुराने ऐतिहासिक फैसले का हवाला देते हुए दिल्ली पुलिस ने सख्त निर्देश जारी किए हैं. अब किसी भी तरह के धरने या प्रदर्शन के लिए कम से कम 10 दिन पहले अनुमति लेना अनिवार्य कर दिया गया है. यह आवेदन नई दिल्ली जिले के पुलिस उपायुक्त यानी डीसीपी के पास जमा करना होगा. पहले से अनुमति लिए बिना अगर कोई भी ग्रुप वहां जुटता है तो उसे सीधे तौर पर नियमों का उल्लंघन माना जाएगा. पुलिस प्रशासन का मकसद संसद और उसके आसपास के संवेदनशील इलाके में सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत रखना है. इस सिस्टम से शहर में ट्रैफिक और कानून व्यवस्था को संभालने में भी आसानी होगी.
जंतर मंतर पर प्रदर्शन के लिए 10 दिन पहले परमिशन क्यों जरूरी है?
सुप्रीम कोर्ट ने मजदूर किसान शक्ति संगठन बनाम भारत सरकार के मामले में स्पष्ट निर्देश दिए थे. अदालत के इसी आदेश के अनुपालन में दिल्ली पुलिस ने अपना स्टैंडिंग ऑर्डर तैयार किया है. पुलिस अधिकारियों का कहना है कि सुरक्षा के लिहाज से 10 दिन का समय बेहद जरूरी होता है. इस दौरान पुलिस खुफिया इनपुट और सुरक्षा के तमाम इंतजामों का पूरा रिव्यू करती है.
नई दिल्ली के डीसीपी ऑफिस में आवेदन मिलने के बाद ही कार्यक्रम की गहराई से जांच होती है. अगर आवेदन तय समय सीमा के भीतर नहीं दिया गया तो अनुमति खारिज हो सकती है. आयोजकों को अपने आवेदन पत्र में कार्यक्रम का मकसद और आने वाले लोगों की संभावित संख्या भी स्पष्ट लिखनी होगी.
सेंट्रल विस्टा और इंडिया गेट के आसपास विरोध पर रोक क्यों लगी?
यह इलाका देश का सबसे महत्वपूर्ण प्रशासनिक केंद्र माना जाता है. यहां रोजाना विदेशी मेहमानों और वीवीआईपी का मूवमेंट बना रहता है. सुरक्षा एजेंसियों के मुताबिक यहां किसी भी धरने से पूरे लुटियंस जोन का ट्रैफिक ठप हो सकता है. इसी वजह से इन सभी संवेदनशील जगहों पर धरने और रैलियों पर पूरी पाबंदी लगाई गई है.
भीड़ के हिसाब से प्रदर्शन की जगह कैसे तय करेगी दिल्ली पुलिस?
दिल्ली पुलिस के वर्ष 2022 के स्टैंडिंग ऑर्डर में प्रदर्शनकारियों की संख्या के आधार पर जगह तय की गई है.
- यदि किसी कार्यक्रम में 1000 तक लोग शामिल होने वाले हैं तो उन्हें जंतर मंतर जाने की अनुमति मिलती है.
- जब प्रदर्शनकारियों की संख्या 1000 से लेकर 50000 के बीच होती है तो उन्हें रामलीला मैदान भेजा जाता है.
- 50000 से ज्यादा लोगों के बड़े जमावड़े के लिए बुराड़ी का ग्राउंड तय किया गया है.
इस वर्गीकरण से पुलिस को भीड़ को नियंत्रित करने में सीधी मदद मिलती है. इससे शहर के आम नागरिकों को जाम और असुविधा से आसानी से बचाया जा सकता है. आयोजकों को अपनी संभावित संख्या की सही जानकारी पुलिस को पहले ही देनी होगी.
नियमों का उल्लंघन करने पर किस तरह का एक्शन होगा?
दिल्ली पुलिस ने साफ कर दिया है कि बिना परमिशन जुटने वालों पर सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी. नियमों की अनदेखी करने पर आयोजकों के खिलाफ सीधे केस दर्ज हो सकता है. गैरकानूनी तरीके से भीड़ जुटाने पर पुलिस को मौके से हिरासत में लेने का पूरा अधिकार है. राजधानी की सुरक्षा और शांति बनाए रखने के लिए पुलिस बल पूरी तरह मुस्तैद है. सभी संगठनों को सलाह दी गई है कि वे तय गाइडलाइंस का पालन करें.
