नई दिल्ली. दिल्ली के जंतर-मंतर पर कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के प्रदर्शन के दौरान एक ऐसा शख्स नजर आया, जो अमूमन भारत में रहकर अभी तक राजनीतिक गतिविधियों से दूर रहा है. लेकिन, इस बार सीजेपी के प्रोटेस्ट को समर्थन देने जंतर-मंतर पहुंच गया. ऐसे में सवाल यह है कि दिल्ली पुलिस की नाकेबंदी के बीच यह शख्स दिल्ली के जंतर-मंतर पर कैसे पहुंच गया? इस अंग्रेज शख्स का नाम ज्यां द्रेज (Jean Drèze) है, जिन्हें अक्सर अंग्रेज समझ लिया जाता है. लेकिन वह अंग्रेज नहीं, बल्कि बेल्जियम में जन्मे अर्थशास्त्री हैं, जिन्होंने भारत की नागरिकता भी हासिल की है. बीते कई सालों से झारखंड में गरीबी, भूख, शिक्षा और सामाजिक सुरक्षा जैसे मुद्दों पर वह मुखबर आवाज बनकर उभरे हैं. शनिवार को जब आईजीआई एयरपोर्ट पर सेजीपी संस्थापक अभिजीत दीपके सहित तमाम नेताओं को हिरासत में ले लिया गया तो ज्यां द्रेज जंतर-मंतर पर पहुंच कर सीजेपी के इस प्रोटेस्ट को समर्थन किया.
मूल रूप से बेल्जियम यूरोप में जन्मे ज्यां द्रेज पिछले कई दशकों से भारत में रह रहे हैं और उन्होंने साल 2002 में आधिकारिक तौर पर भारत की नागरिकता स्वीकार कर ली थी. इसके लिए उन्होंने अपनी बेल्जियम की नागरिकता छोड़ दी थी. वह दिल्ली स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स और रांची यूनिवर्सिटी में प्रोफेसर रह चुके हैं. उन्होंने नोबेल पुरस्कार विजेता अर्थशास्त्री अमर्त्य सेन के साथ मिलकर भूख, गरीबी, शिक्षा और सामाजिक सुरक्षा जैसे विषयों पर कई महत्वपूर्ण किताबें लिखी हैं.
कौन हैं ज्यां द्रेज, जो जंतर-मंतर पर पहुंचे?
भारत की महत्वाकांक्षी ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना के शुरुआती प्रारूप और वैचारिक अवधारणा तैयार करने में उनका बहुत बड़ा योगदान माना जाता है. इसके अलावा वह केंद्र सरकार की पूर्ववर्ती राष्ट्रीय सलाहकार परिषद के भी सदस्य रहे हैं. जंतर-मंतर पर पुलिस के कड़े पहरे और भारी पुलिस बल की तैनाती के बीच उन्होंने लोकतांत्रिक अधिकारों, नागरिकों के मतदान के हक और विरोध प्रदर्शन की स्वतंत्रता के समर्थन में ये टिप्पणियां की थीं.
ज्यां द्रेज के इस कदम के मायने क्या हैं?
जंतर-मंतर पर उन्होंने प्रदर्शनकारियों को संबोधित करते हुए पुलिस की भारी तैनाती को जरूरत से ज्यादा बताया. उनका आरोप था कि सरकार को हिंसा या सुरक्षा का डर नहीं, बल्कि इस बात की चिंता है कि लोगों को अपने वोट देने के अधिकार पर उठ रहे सवालों का अहसास हो जाएगा. यह ज्यां द्रेज का राजनीतिक वक्तव्य और सरकार पर उनका आरोप है, कोई स्वतंत्र रूप से स्थापित तथ्य नहीं.
जंतर-मंतर पर पुहंच कर ज्यां द्रेज ने क्या कहा?
जंतर-मंतर पर CJP का प्रदर्शन मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग और मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर उठाए गए सवालों से जुड़ा है. द्रेज का वहां पहुंचना उनके लंबे समय से चले आ रहे सामाजिक अधिकारों और लोकतांत्रिक जवाबदेही से जुड़े सार्वजनिक काम के संदर्भ में देखा जा सकता है. उनके बयान का मुख्य संदेश यह था कि भारी पुलिस तैनाती के कारण जो लोग प्रदर्शन स्थल तक नहीं पहुंच पाए, उनकी आवाज भी उठाई जानी चाहिए. जंतर-मंतर पर उनकी मौजूदगी ने CJP के प्रदर्शन को एक व्यापक नागरिक अधिकार और चुनावी जवाबदेही की बहस से जोड़ दिया है.
