मम्मी-पापा डॉक्टर, बेटे ने ठुकरा दी एम्स दिल्ली की सीट, नीट यूजी में किया था टॉप

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MBBS Admission 2026: नीट यूजी 2026 में 12वीं रैंक हासिल करने वाले वेंकटपति वेलायुथम को एम्स दिल्ली में एडमिशन मिल रहा था. लेकिन उन्होंने देश के नंबर 1 मेडिकल कॉलेज की एमबीबीएस सीट ठुकरा दी है. वेंकटपति वेलायुथम जिपमर पुडुचेरी में एडमिशन ले रहे हैं. जानिए उन्होंने यह फैसला क्यों लिया.

MBBS Admission 2026: तमिलनाडु के नीट यूजी टॉपर ने एम्स दिल्ली में एडमिशन नहीं लिया

नई दिल्ली (MBBS Admission). नीट यूजी पास करके डॉक्टर बनने का सपना देख रहा हर अभ्यर्थी देश के नंबर 1 मेडिकल कॉलेज यानी एम्स दिल्ली में एडमिशन का सपना देखता है. देश के टॉप रैंकर्स बिना एक पल गंवाए AIIMS Delhi की एमबीबीएस सीट को अपनी पहली पसंद बनाते हैं. एम्स दिल्ली का मेडिकल एक्सपोजर और नाम पूरी दुनिया में मशहूर है. लेकिन क्या आपने कभी सुना है कि किसी टॉपर ने एम्स दिल्ली की सीट ठुकरा दी हो? तमिलनाडु के वेंकटपति वेलायुथम ने अपने फैसले से सबको चौंका दिया है.

तमिलनाडु के विल्लुपुरम के रहने वाले वेंकटपति वेलायुथम ने नीट यूजी 2026 में 12वीं रैंक हासिल की है. नीट यूजी 2026 परीक्षा में 720 में से 705 अंकों के साथ वह अपने राज्य यानी तमिलनाडु के टॉपर थे. इसके दम पर वह आसानी से एम्स दिल्ली में सीट हासिल कर सकते थे. लेकिन उन्होंने देश के टॉप मेडिकल कॉलेज को छोड़कर जिपमर पुडुचेरी (JIPMER Puducherry) में एडमिशन लेना बेहतर समझा. नीट यूजी 2026 के टॉप 25 रैंकर्स में वेंकटपति वेलायुथम एकमात्र ऐसे हैं, जिन्होंने एम्स दिल्ली में एडमिशन नहीं लिया.

नीट यूजी टॉपर ने क्यों छोड़ा एम्स दिल्ली?

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, जिपमर का बेहतरीन क्लिनिकल एक्सपोजर, दक्षिण भारत में होने की सुविधा और पारिवारिक प्राथमिकताओं ने वेंकटपति वेलायुथम के इस फैसले में अहम भूमिका निभाई. वह भविष्य में कार्डियोलॉजी के क्षेत्र में स्पेशलाइजेशन करना चाहते हैं. इसके लिए जिपमर के एकेडमिक और रिसर्च माहौल को उन्होंने अपने लिए ज्यादा परफेक्ट पाया. उनका फैसला इस बात की मिसाल है कि हर स्टूडेंट के लिए सफलता के मायने और उसकी प्राथमिकताएं अलग हो सकती हैं.

डॉक्टर माता-पिता का साथ और तैयारी की खास स्ट्रैटेजी

वेंकटपति की ऐतिहासिक सफलता के पीछे उनके परिवार का बहुत बड़ा योगदान रहा है. उनके घर में मेडिकल का माहौल पहले से ही था. उनके पिता डॉ. वीवी अनसन रामचंद्रनाथ विल्लुपुरम में जाने-माने ऑर्थोपेडिक सर्जन हैं, जबकि मां डॉ. टी. पुनीथावती प्रतिष्ठित मनोचिकित्सक हैं. वेंकटपति ने सिर्फ किताबी ज्ञान पर जोर नहीं दिया. उन्होंने हर हफ्ते 2 से 3 नीट मॉक टेस्ट दिए. इससे उनका एग्जाम स्ट्रेस कम हुआ और पैटर्न समझने में मदद मिली.

MCC के नए नियमों से काउंसलिंग में ट्रांसपेरेंसी

नीट काउंसलिंग के दौर में बड़ा बदलाव देखने को मिला है. कुछ स्टूडेंट्स ऑल इंडिया कोटा (AIQ) और स्टेट कोटा, दोनों में सीटें ब्लॉक कर लेते थे. इससे योग्य छात्रों को मौका नहीं मिल पाता था. इसे रोकने के लिए मेडिकल काउंसलिंग कमेटी (MCC) ने सख्त कदम उठाए हैं. एमसीसी ने उन छात्रों का डेटा जारी कर दिया है, जिन्होंने पहले ही राउंड्स में सीटें ले ली हैं और राज्यों को उन्हें काउंसलिंग से बाहर करने का निर्देश दिया है. खाली बची सीटें भरने के लिए स्ट्रे वैकेंसी राउंड के रजिस्ट्रेशन शुरू हो चुके हैं.

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दीपाली पोरवालSenior Sub Editor

Deepali Porwal is a seasoned bilingual journalist with 11 years of experience in the media industry. She currently works with News18 Hindi, focusing on the Education and Career desk. She is kno…

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