दिल्ली पुलिस की इंटेलिजेंस फ्यूजन एंड स्ट्रैटेजिक ऑपरेशंस (IFSO) यूनिट ने डिजिटल अरेस्ट और निवेश के नाम पर ठगी करने वाले एक बड़े अंतरराष्ट्रीय साइबर गिरोह का भंडाफोड़ करते हुए 11 आरोपियों को गिरफ्तार किया है. इस कार्रवाई के दौरान पुलिस ने डिजिटल अरेस्ट के एक मामले में 7.25 करोड़ रुपये बचा लिए हैं, जबकि HDFC और SBI के खातों में कुल 1.96 करोड़ रुपये होल्ड कराए गए हैं. पुलिस जांच में सामने आया है कि इस अंतरराष्ट्रीय गिरोह के तार कंबोडिया और दक्षिण-पूर्व एशिया के अन्य देशों में बैठे साइबर ठगों से जुड़े हैं.
खुद को आरोपी पुलिस, एटीएस और एनआईए जैसे जांच एजेंसियों का अधिकारी बताकर लोगों को डराते थे और डिजिटल अरेस्ट के जाल में फंसाते थे. इसके अलावा, शेयर बाजार या अन्य योजनाओं में भारी मुनाफे का लालच देकर भी लोगों से करोड़ों रुपये ऐंठे जाते थे. टेलीग्राम और व्हाट्सऐप चैट की तकनीकी जांच से पता चला है कि यह गिरोह देश भर में सक्रिय था और नेशनल साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल (NCRP) पर दर्ज 78 शिकायतों से इनका सीधा संबंध मिला है. इन सभी मामलों में कुल 73 करोड़ रुपये की ठगी की रकम शामिल है.
इस तरह हुआ मामलों का खुलासा
इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय में पूर्व डायरेक्टर रह चुके प्रदीप कुमार दास को 14 अगस्त 2026 को एक अज्ञात नंबर से कॉल आया. कॉलर ने उनके आधार कार्ड का इस्तेमाल मनी लॉन्ड्रिंग में होने का डर दिखाया और गिरफ्तारी की धमकी दी. इसके बाद फंड की जांच के बहाने वीडियो कॉल पर निगरानी रखते हुए उनसे RTGS के माध्यम से 1 करोड़ 25 लाख 9 हजार रुपये ट्रांसफर करवा लिए गए. इस मामले में स्पेशल सेल थाने में FIR दर्ज की गई.
जांच को आगे बढ़ाते हुए पुलिस ने द्वारका के सेक्टर-7 स्थित महामाया अपार्टमेंट में छापा मारा और पांच मुख्य आरोपी अनिश खान, मोहम्मद महफूजार रहमान, इजहार आलम, अल्ताफ हुसैन और इंतखाब को धर दबोचा. मुख्य हैंडलर अनिश खान टेलीग्राम के जरिए विदेश में बैठे ठगों के संपर्क में था और 5.5 प्रतिशत कमीशन पर बैंक खातों का संचालन करता था. उसे यह कमीशन क्रिप्टोकरेंसी (USDT) के रूप में मिलता था. इसके अलावा, पुलिस ने अन्य छह आरोपी नीरज कुमार मित्तल, कंवर पाल, सैफ अली खान, रणबीर, प्रभात राय और अनिल सागू को भी दबोच लिया है.
अन्य राज्यों में बड़ी कार्यवाहियां
विजयवाड़ा (आंध्र प्रदेश): 79 वर्षीय बोप्पना बापाराव को डिजिटल अरेस्ट कर 10.25 करोड़ रुपये की ठगी का शिकार बनाया गया था. दिल्ली और आंध्र प्रदेश पुलिस के संयुक्त समन्वय से इनमें से 7.25 करोड़ रुपये सुरक्षित बचा लिए गए. पूर्वी मेदिनीपुर (पश्चिम बंगाल): अनुपम जाना से निवेश के नाम पर 21 लाख रुपये की ठगी की गई, जो HDFC बैंक के ‘M/s MR Traders’ खाते में आए थे. पुलिस ने बैंक खाता फ्रीज कराकर रकम की रिकवरी तेज कर दी है. दिल्ली के सुरेंद्र प्रकाश से डिजिटल अरेस्ट के नाम पर 77 लाख रुपये ठगे जाने के मामले में भी जांच जारी है.
सवाल-जवाब
IFSO यूनिट ने किस बड़े अंतरराष्ट्रीय गिरोह का पर्दाफाश किया है?
IFSO यूनिट ने डिजिटल अरेस्ट और निवेश के नाम पर ठगी करने वाले अंतरराष्ट्रीय साइबर गिरोह का पर्दाफाश किया है, जिसके तार कंबोडिया और दक्षिण-पूर्व एशिया से जुड़े हैं.
कार्रवाई के दौरान कुल कितने आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है?
इस कार्रवाई के दौरान पुलिस ने कुल 11 आरोपियों को गिरफ्तार किया है, जिनमें से पांच को द्वारका से पकड़ा गया.
ठगी की रकम को किस रूप में कमीशन के तौर पर लिया जाता था?
गिरोह का मुख्य हैंडलर अनिश खान साइबर ठगी की रकम का 5.5 प्रतिशत कमीशन क्रिप्टोकरेंसी यानी USDT के रूप में लेता था.
