'दिल्ली को भारत-पाकिस्तान बॉर्डर बना दिया', CJP प्रदर्शन पर एक्शन को लेकर केंद्र पर बरसे अभिजीत दिपके

CJP Abhijeet Dipke: कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के संस्थापक अभिजीत दिपके ने 15 अक्टूबर को केंद्र सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि 10 अक्टूबर के विरोध प्रदर्शनों के दौरान पुलिस की कार्रवाई का मकसद सिर्फ एक व्यक्ति मुख्य चुनाव आयुक्त (सीईसी) ज्ञानेश कुमार को बचाना था. दिपके ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए कहा, “जब से चुनाव आयोग के भीतर मतभेदों को लेकर मीडिया रिपोर्ट छपी है, तब से सरकार अपने पूरे तंत्र और मशीनरी का इस्तेमाल ज्ञानेश कुमार को बचाने के लिए कर रही है. पिछले कुछ दिनों से सभी छात्र संगठन और युवा दिल्ली की सड़कों पर संघर्ष कर रहे हैं. उन्हें सिर्फ एक व्यक्ति ज्ञानेश कुमार को बचाने के लिए सड़कों पर घसीटा जा रहा है.”

अभिजीत दिपके ने इस बात की ओर भी इशारा किया कि विपक्षी नेताओं को भी नहीं बख्शा गया. उन्होंने कहा, “ज्ञानेश कुमार को बचाने के लिए विपक्ष के नेता (राहुल गांधी) और पूर्व मुख्यमंत्रियों ममता बनर्जी, अरविंद केजरीवाल और पिनाराई विजयन तक को हिरासत में ले लिया गया.” 10 अक्टूबर को सीजेपी के नेतृत्व में हुए विरोध प्रदर्शनों पर की गई कार्रवाई का जिक्र करते हुए दिपके ने कहा, “शायद देश में यह पहली बार था जब रेलवे को बंद कर दिया गया और यह भी सिर्फ ज्ञानेश कुमार के लिए. रेलवे बंद करने से भी उनका मन नहीं भरा, तो उन्होंने पूरी दिल्ली में मेट्रो और मेट्रो स्टेशनों को भी बंद कर दिया. किसके लिए? ज्ञानेश कुमार के लिए. इतने पर भी जब उनका मन नहीं भरा तो उन्होंने जम्मू-कश्मीर से सुरक्षा बलों को बुला लिया.”

उन्होंने टिप्पणी की, “और तो और अब तो सरकार अपने ही देशवासियों के खिलाफ जंग छेड़ रही है.” सीजेपी नेताओं सौरव दास और आशुतोष रांका की न्यायिक हिरासत का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा, “आपने तिरंगा फहराने को भी कानून का उल्लंघन बता दिया. सिर्फ ज्ञानेश कुमार के लिए? आपने दिल्ली को ठप कर दिया है. शहर को भारत-पाकिस्तान सीमा की तरह एक बॉर्डर में बदल दिया है. आपने दिल्ली में तमाम सुरक्षा बलों को बुला लिया है. क्या यह सब सिर्फ एक ज्ञानेश कुमार के लिए है? सरकार के लिए ज्ञानेश कुमार इतने महत्वपूर्ण क्यों हैं? अगर वह भाजपा को चुनाव जीतने में मदद नहीं कर रहे हैं, तो उन्हें इतनी सुरक्षा क्यों दे रहे हैं?”

सीजेपी प्रमुख ने आगे कहा, “‘एक देश, एक चुनाव’ तो बस एक नारा है, असल मकसद ‘एक देश, एक पार्टी’ है. अगर आप छात्र नेताओं, कार्यकर्ताओं और विपक्षी नेताओं को इस तरह हिरासत में रखना चाहते हैं, तो आधिकारिक तौर पर आपातकाल (इमरजेंसी) घोषित कर दीजिए, आप किस बात से डर रहे हैं?” दिपके ने ‘तिरंगा सभा’ ​​के लिए अपनी अपील दोहराई और लोगों से आग्रह किया कि वे 16 अक्टूबर की शाम 5 बजे नई दिल्ली के कनॉट प्लेस स्थित सेंट्रल पार्क में इकट्ठा हों. यह सभा उनकी पार्टी के सह-संयोजकों, सौरव दास और आशुतोष रांका की गिरफ्तारी के विरोध में तिरंगा लहराने के लिए आयोजित की जा रही है.

उन्होंने सभी राजनीतिक दलों, नागरिक समाज के सदस्यों, मजदूर और किसान यूनियनों से अपील की कि वे अपनी राजनीतिक विचारधाराओं को एक तरफ रखकर इस सभा में शामिल हों. अभिजीत दिपके ने कहा, “हमें अपने लोकतंत्र को बचाने के लिए एकजुट होना होगा. अगर हमारा वोट सुरक्षित रहेगा, तभी लोकतंत्र बचेगा. आशुतोष और सौरव को तिरंगा लहराने के लिए जेल में डाल दिया गया है. राष्ट्रीय ध्वज लहराना कोई अपराध नहीं हो सकता. तिरंगे से बढ़कर कुछ भी नहीं है और ज्ञानेश कुमार तो बिल्कुल भी नहीं.”

पत्रकारों के साथ छीना झपटी
प्रेस कॉन्फ्रेंस में मौजूद AISA की प्रेसिडेंट नेहा बोरा ने प्रदर्शन के दौरान पत्रकारों के साथ हुए दुर्व्यवहार का जिक्र किया. उन्होंने कहा, “पत्रकार कहते रह गए कि हमारे हाथों में प्रेस कार्ड हैं. लेकिन फिर भी डिटेन कर कैमरा छीन लिया गया. ACP विवेक भगत ने जिस महिला पत्रकार के साथ उत्पीड़न किया, उल्टा उसके खिलाफ ही मुकदमा हो गया. ज्यूडिशियल कस्टडी में सिर्फ सौरभ दास और आशुतोष रंका को नहीं भेजा गया, बल्कि उन 13 करोड़ लोगों को भेजा गया जिनका SIR में वोट कटा और जिन्हें प्रदर्शन में घसीटा गया.”

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