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दिल्ली-एनसीआर में मौसम ने अचानक करवट ली है. 15 अक्टूबर को कई इलाकों में तेज गरज के साथ झमाझम बारिश हुई. भारत मौसम विज्ञान विभाग ने राजधानी में तेज हवाओं और आकाशीय बिजली की चेतावनी देते हुए ऑरेंज अलर्ट जारी किया है. उत्तर और उत्तर-पश्चिम दिल्ली में साठ किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से हवाएं चलने का अनुमान है. शुक्रवार (16 अक्टूबर) को भी बारिश का दौर जारी रहेगा, जिससे तापमान में भारी गिरावट आएगी. (All Photos : PTI)
राजधानी दिल्ली और उससे सटे एनसीआर के इलाकों में मौसम ने अचानक यू-टर्न ले लिया है. गुरुवार की दोपहर बाद आसमान में घने काले बादल छा गए और कई इलाकों में तेज आंधी के साथ भारी बारिश शुरू हो गई. तेज बारिश और बादलों की भयंकर गड़गड़ाहट को देखते हुए मौसम विभाग ने तुरंत ऑरेंज अलर्ट जारी कर दिया है. मौसम विभाग ने साफ चेतावनी दी है कि अगले कुछ घंटों में मौसम और ज्यादा बिगड़ सकता है. उत्तर और उत्तर-पश्चिम दिल्ली के कई हिस्सों में साठ किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चलने की आशंका है. अचानक हुई इस बारिश से लोगों को उमस भरी गर्मी से बड़ी राहत मिली है. तापमान में अचानक गिरावट दर्ज की गई है और अधिकतम तापमान लुढ़ककर 29 डिग्री सेल्सियस पर आ गया है. मौसम विभाग के मुताबिक शुक्रवार को भी दिल्ली और आसपास के शहरों में ऐसा ही गीला मौसम बना रहेगा.
राजधानी में मौसम का यह अचानक बदलाव एक सक्रिय पश्चिमी विक्षोभ के कारण देखने को मिला है. पश्चिमी विक्षोभ भारत के पश्चिमी इलाकों से पूर्व की ओर बढ़ने वाला एक मजबूत वेदर सिस्टम है. यह सिस्टम उत्तर भारत के मैदानी इलाकों में तेज बारिश और गरज के साथ बौछारें लेकर आता है. मौसम विभाग ने इसी सिस्टम के असर को देखते हुए ऑरेंज अलर्ट जारी किया है. उत्तर और उत्तर-पश्चिम दिल्ली के कुछ हिस्सों में मध्यम से भारी बारिश का अनुमान जताया गया है. इस दौरान 40 से 50 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चल सकती हैं. हवा के झोंकों की रफ्तार 60 किलोमीटर प्रति घंटे तक भी पहुंच सकती है. दिल्ली के अलावा नोएडा और ग्रेटर नोएडा में भी दोपहर के समय तेज बारिश दर्ज की गई. गुरुग्राम और फरीदाबाद के इलाकों में भी घने बादलों के साथ रुक-रुक कर बारिश का दौर जारी है.
मौसम विभाग के पूर्वानुमान के अनुसार यह गीला मौसम अभी एक दिन और जारी रहने वाला है. शुक्रवार यानी 16 अक्टूबर को भी दिल्ली-एनसीआर के कई इलाकों में गरज के साथ बारिश होने का अनुमान है. दिन भर आसमान में घने बादल छाए रह सकते हैं और कुछ इलाकों में मध्यम दर्जे की बारिश होगी. लगातार हो रही बारिश की वजह से अधिकतम तापमान 29 डिग्री सेल्सियस के आसपास ही बना रहेगा. शनिवार यानी 17 अक्टूबर से मौसम में फिर से बदलाव देखने को मिलेगा और हवाएं शुष्क होने लगेंगी. शनिवार को दिल्ली में आंशिक रूप से बादल छाए रहेंगे और अधिकतम तापमान बढ़कर 32 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच सकता है. रविवार तक आसमान पूरी तरह साफ हो जाएगा और धूप निकलने के कारण दिन के तापमान में और बढ़ोतरी दर्ज की जाएगी.
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बारिश के कारण दिल्ली की सड़कों पर जगह-जगह पानी भरने की शिकायतें सामने आने लगी हैं. पीक आवर्स के दौरान सड़कों पर जलभराव होने से गाड़ियों की रफ्तार काफी धीमी हो गई है. कई व्यस्त चौराहों पर लंबा ट्रैफिक जाम देखने को मिला है. इस तेज बारिश का एक सकारात्मक असर हवा की गुणवत्ता पर देखने को मिल सकता है. बारिश की बूंदें हवा में तैर रहे धूल के कणों को नीचे बैठा देती हैं. हालांकि जानकारों का कहना है कि वायु गुणवत्ता में कितना सुधार होगा यह आने वाले दिनों की हवा की रफ्तार पर निर्भर करेगा. अगर हवा की दिशा और गति अनुकूल नहीं रही तो बारिश का यह फायदा कुछ ही घंटों में खत्म हो सकता है.
मौसम विभाग ने गुरुवार को एक और बड़ा आधिकारिक ऐलान किया है. विभाग के अनुसार दक्षिण-पश्चिम मानसून अब पूरे देश से पूरी तरह विदा हो चुका है. दिलचस्प बात यह है कि जिस दिन दक्षिण-पश्चिम मानसून की विदाई हुई उसी दिन दक्षिण भारत में पूर्वोत्तर मानसून की एंट्री हो गई. तमिलनाडु और पुडुचेरी के साथ कराईकल और तटीय आंध्र प्रदेश में पूर्वोत्तर मानसून की बारिश शुरू हो चुकी है. इसके अलावा रायलसीमा और केरल के इलाकों में भी जोरदार मानसूनी गतिविधियां दर्ज की गई हैं. मौसम विभाग ने अपने बुलेटिन में बताया कि 21 अक्टूबर तक दक्षिण भारत के कई राज्यों में भारी बारिश का दौर जारी रह सकता है. हमारे देश में दक्षिण-पश्चिम मानसून खरीफ की फसलों के लिए जीवन रेखा माना जाता है जबकि पूर्वोत्तर मानसून रबी फसलों के लिए बहुत महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है.
मौसम विभाग के आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक इस साल दक्षिण-पश्चिम मानसून काफी कमजोर साबित हुआ है. पूरे सीजन के दौरान देश में केवल 759.4 मिलीमीटर बारिश ही रिकॉर्ड की गई. यह आंकड़ा 868.6 मिलीमीटर के सामान्य औसत से करीब 12.6 प्रतिशत कम रहा है. बारिश में इस बड़ी कमी के पीछे सबसे मुख्य वजह प्रशांत महासागर में सक्रिय अल नीनो रहा है. अल नीनो की स्थिति जून के महीने में उभरी थी और इसके बाद से यह लगातार ताकतवर होता गया है. विश्व मौसम विज्ञान संगठन के अनुसार अल नीनो की यह स्थिति दिसंबर 2026 में अपने सबसे चरम स्तर पर पहुंच सकती है. मौसम वैज्ञानिकों का मानना है कि यह साल 1950 के बाद से अब तक का सबसे शक्तिशाली अल नीनो साबित हो सकता है. इस मौसमी प्रभाव के फरवरी 2027 तक बने रहने की संभावना जताई गई है.
