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Delhi News Today: दिल्ली हाईकोर्ट ने चेक बाउंस मामले में एक कंपनी पर लगाया गया 50,000 रुपये का जुर्माना माफ करते हुए एक अनोखा निर्देश दिया है. अदालत ने कहा कि कंपनी के वकील को सजा के तौर पर दिल्ली हाईकोर्ट बार एसोसिएशन के सभी कर्मचारियों को एक हफ्ते के भीतर चाय और समोसे खिलाने होंगे. यह आदेश कंपनी द्वारा निचली अदालत के आदेश को छुपाने के मामले में सुनवाई के दौरान दिया गया.
हाईकोर्ट ने नरमी बरती.
दिल्ली हाईकोर्ट में इन दिनों एक ऐसा ही अजब-गजब मामला चर्चा का विषय बना हुआ है, जिसने कोर्ट रूम के माहौल को पूरी तरह बदल कर रख दिया. मामला एक चेक बाउंस विवाद से जुड़ा था, जहां एक कंपनी ने अदालत से राहत पाने के लिए निचली अदालत के आदेश को ही छुपाने की चालाकी दिखाने की कोशिश की थी. कोर्ट की नजरों से यह चालाकी छुप नहीं पाई और जस्टिस सौरभ बनर्जी की बेंच ने कंपनी पर सीधा पचास हजार रुपये का भारी-भरकम जुर्माना ठोक दिया. जब अपनी गलती का अहसास हुआ, तो कंपनी इस कॉस्ट को माफ करवाने के लिए हाथ-पैर जोड़ने लगी और हाईकोर्ट जा पहुंची. लेकिन इसके बाद अदालत ने जो सजा सुनाई, उसने हर किसी को हैरान भी किया और चेहरे पर मुस्कान भी ले आए.
चेक बाउंस मामले में छुपाई थी सच्चाई
यह पूरा विवाद तब शुरू हुआ जब इंदुस बीररा बेवरेजेज नाम की कंपनी ने चेक बाउंस मामले को रद्द कराने के लिए दिल्ली हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया था. सुनवाई के दौरान अदालत के सामने यह बात खुलकर सामने आ गई कि कंपनी ने इस मामले से जुड़े निचली अदालत के एक अहम आदेश को जानबूझकर छिपाया था.
हाईकोर्ट ने लगाई थी पचास हजार की चपत
अदालत ने इस तरह की चालाकी और अलग-अलग मंचों पर दिए जा रहे बयानों के विरोधाभास को बेहद गंभीरता से लिया. जस्टिस सौरभ बनर्जी की बेंच ने स्पष्ट रूप से कहा कि कंपनी अदालत से किसी भी तरह का अनुचित आदेश झपटने के लिए जानकारी छिपाने और गुमराह करने का रास्ता अपना रही है. इसी कड़ी कार्रवाई के तहत कोर्ट ने कंपनी पर 50,000 रुपये का जुर्माना ठोक दिया था, जिसे दिल्ली हाईकोर्ट बार एसोसिएशन के सोशल सिक्योरिटी एंड वेलफेयर फंड में जमा कराने का आदेश दिया गया था.
जुर्माने के बदले मिला अनोखा समोसा फरमान
जब कंपनी ने इस जुर्माने को माफ करवाने के लिए हाईकोर्ट में नई अर्जी दाखिल की तो अदालत ने नरमी तो बरती लेकिन एक बेहद दिलचस्प शर्त रख दी. कोर्ट ने जुर्माना माफ करने की एप्लीकेशन को तो मंजूर कर लिया, लेकिन साथ ही यह आदेश भी दे दिया कि याचिकाकर्ता कंपनी के वकील को दिल्ली हाईकोर्ट बार एसोसिएशन (DHCBA) के सभी कर्मचारियों को अपने हाथों से चाय और समोसे खिलाने होंगे. अदालत ने इस अनोखे काम को एक हफ्ते के भीतर पूरा करने का सख्त निर्देश दिया है.
इस दिलचस्प फैसले ने साबित कर दिया कि न्याय की देवी की आंख भले ही पट्टी से ढकी हो, लेकिन कभी-कभी अदालतें ऐसे अनोखे और मानवीय नुस्खे अपना लेती हैं जो गंभीर कानूनी लड़ाइयों को भी अचानक मजेदार बना देते हैं. अब इस अनोखे ‘समोसा ऑर्डर’ की चर्चा हर तरफ जोरों पर है और लीगल गलियारों में लोग इस पर खूब चुटकियां ले रहे हैं.
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पत्रकारिता में 16 वर्षों से अधिक का सुदीर्घ अनुभव रखने वाले संदीप गुप्ता वर्तमान में News18 इंडिया में बतौर चीफ सब-एडिटर होम पेज पर जिम्मेदारी संभाल रहे हैं. जटिल और सामरिक विषयों को बेहद सरल भाषा में पाठकों त…
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