दिल्लीवालो, अब राहत की सांस ले लो, मुंबई ने छीन लिया दिल्ली का 'दर्द वाला ताज', हार में भी है खुशी की बात

Most Polluted City in India: दिल्लीवालों के लिए राहत की खबर आई है. जहरीले नवंबर से ठीक पहले साल-दर साल राजधानी को दर्द देने वाले ‘सबसे प्रदूषित शहर’ का ताज अब मुंबई के माथे पर सज गया है. देश की आर्थिक राजधानी मुंबई अब दिल्ली को पछाड़कर भारत का सबसे प्रदूषित शहर बन गई है. अमेरिकी एजेंसी आईक्यूएयर की ताजा रैंकिंग में मुंबई दुनिया के सबसे प्रदूषित शहरों में पांचवें स्थान पर है, जबकि भारतीय शहरों में वह पहले स्थान पर काबिज हो गई है.

हालांकि इस रैंकिंग में दिल्ली की स्थिति इतनी भी अच्छी नहीं है कि उस पर खुश हुआ जाए, क्योंकि मुंबई से ठीक नीचे दिल्ली का ही नाम दर्ज किया गया है. दुनियाभर के शहरों में दिल्ली छठे सबसे प्रदूषित शहर के रूप में बनी हुई है.

मुंबई के दिल्ली को पछाड़ने के पीछे उसका एक्यूआई है जो लगातार अनहेल्दी या खराब श्रेणी में बना हुआ है. गुरुवार को ही सामने आए आंकड़ों में मुंबई का एयर क्वालिटी इंडेक्स (एक्यूआई) 152 दर्ज किया गया, जिसे ‘अस्वास्थ्यकर’ श्रेणी में रखा गया है. वहीं दिल्ली से एक अलग बात ये भी है कि मुंबई में मुख्य प्रदूषक पीएम 10 या 2.5 नहीं है बल्कि ग्राउंड-लेवल ओजोन बताया गया है.

मॉनसून की कमी और कम बारिश ने बिगाड़ी हवा
मुंबई को सबसे बड़ा नुकसान मॉनसून की कमी का झेलना पड़ रहा है. इस साल मानसून में बारिश कम हुई और मौसमी बारिश जल्दी खत्म हो गई. इसके साथ ही शहर में लगातार गर्मी और नमी बनी हुई है. इन परिस्थितियों ने प्रदूषण को और बढ़ा दिया है. इस महीने मुंबई में पिछले कम से कम एक दशक के तीन सबसे गर्म दिन रहे हैं. कई दिनों तक अधिकतम तापमान सामान्य से 4 से 5 डिग्री ज्यादा दर्ज किया गया.

गर्मी और कमजोर हवाओं का असर
वायुमंडलीय वैज्ञानिक गुफरान बेग, जो नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ एडवांस्ड स्टडीज (एनआईएएस) और इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ साइंस (आईआईएससी) से जुड़े हैं, ने इस स्थिति को एल नीनो जैसी जलवायु पैटर्न, ऊंचे तापमान और हवा की रफ्तार में भारी गिरावट से जोड़ा है. उन्होंने बताया कि कमजोर हवाएं और गर्म-नम मौसम हवा के संचार को रोक रहे हैं. नतीजतन प्रदूषक ऊपर नहीं उड़ पा रहे और जमीन के पास जमा हो रहे हैं.

एल नीनो से कैसे अलग ओजोन
एल नीनो प्रशांत महासागर के मध्य और पूर्वी हिस्सों में समुद्री पानी के तापमान के बढ़ने की स्थिति को कहते हैं. इसका असर दुनिया के अलग-अलग क्षेत्रों के मौसम पर पड़ता है. ग्राउंड-लेवल ओजोन ऊपरी वायुमंडल के ओजोन परत से अलग होता है. ऊपरी परत पृथ्वी को हानिकारक पराबैंगनी किरणों से बचाती है, जबकि जमीन के पास ओजोन नाइट्रोजन ऑक्साइड और वाष्पशील कार्बनिक यौगिकों के सूरज की रोशनी में प्रतिक्रिया करने से बनता है. गर्म और धूप वाले मौसम में यह प्रक्रिया तेज हो जाती है.

दिल्ली और कोलकाता भी सूची में
आईक्यूएयर की रैंकिंग में दुनिया के 122 शहर शामिल किए गए थे. इसमें दिल्ली और कोलकाता का नाम भी है जो टॉप टेन में बने हुए हैं. इस लिस्ट में टॉप 10 में 3 शहर भारत के ही हैं. जहां दिल्ली छठे स्थान पर है, जहां एक्यूआई 151 दर्ज किया गया वहीं कोलकाता दसवें स्थान पर है, जहां एक्यूआई 124 है. इस तरह मुंबई ने भारतीय शहरों में सबसे खराब हवा दर्ज की है.

हालांकि आईक्यूएयर के आंकड़े केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) के आंकड़ों से अलग हैं. सीपीसीबी के डैशबोर्ड पर मुंबई का शहर-स्तरीय एक्यूआई 98 दिखाया गया है, जिसे ‘संतोषजनक’ श्रेणी में रखा गया है. जबकि यहां दिल्ली का ज्यादा है.

अलग-अलग इलाकों में अलग स्थिति
सीपीसीबी के स्टेशन-स्तर के आंकड़ों से पता चलता है कि मुंबई के अलग-अलग इलाकों में प्रदूषण की स्थिति काफी अलग है. शहर के 23 सक्रिय निगरानी स्टेशनों में से 12 जगहों पर हवा संतोषजनक पाई गई. लेकिन कुछ इलाकों में स्थिति खराब है. देवनार में एक्यूआई 156, बांद्रा कुर्ला कॉम्प्लेक्स (बीकेसी) में 145 और भांडुप के खिंडीपाड़ा में 129 दर्ज किया गया. इन जगहों पर मुख्य प्रदूषक पीएम2.5 और पीएम10 बताए गए हैं.

दोनों प्लेटफॉर्म के आंकड़ों में अंतर इसलिए है क्योंकि उनकी निगरानी प्रणाली, गणना का तरीका, औसत निकालने की अवधि और इस्तेमाल किए गए डेटा अलग-अलग होते हैं. शहर-स्तरीय औसत और अलग-अलग स्टेशनों के आंकड़े naturally अलग हो सकते हैं.

कचरा जलाने से फैल रहा प्रदूषण
महाराष्ट्र प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (एमपीसीबी) के एक अधिकारी ने बताया कि कचरा या प्लास्टिक जलाने से पैदा होने वाला प्रदूषण सिर्फ उसी जगह तक सीमित नहीं रहता. उन्होंने कहा कि अगर देवनार में कचरा जलाया जा रहा है, तो वहां की हवा आसपास के इलाकों में भी फैल जाती है. चेम्बूर और कुर्ला जैसे इलाकों में भी अस्वास्थ्यकर एक्यूआई दर्ज किया जा रहा है. यह बात कचरा और प्लास्टिक जलाने के असर को रेखांकित करती है, जो आसपास के आवासीय और व्यावसायिक क्षेत्रों की हवा को भी प्रभावित कर रहा है.

बीएमसी का एक्शन
बृहन्मुंबई नगर निगम (बीएमसी) ने 26 वार्डों में प्रदूषण हॉटस्पॉट की जांच के आदेश दिए हैं. प्रशासन प्रदूषण के स्रोतों की पहचान कर कार्रवाई करने की तैयारी में है.
विशेषज्ञों का कहना है कि गर्मी, कम बारिश और कमजोर हवाओं के मेल ने मुंबई की हवा को तेजी से खराब कर दिया है. नागरिकों को सलाह दी गई है कि वे हवा की गुणवत्ता पर नजर रखें और जरूरी सावधानियां बरतें.

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