DU PhD Admission 2026: दिल्ली यूनिवर्सिटी से पीएचडी करने का सपना देख रहे छात्रों के लिए बड़ी खबर है.अब चार साल की ग्रेजुएशन पूरी करने वाले विद्यार्थी भी सीधे पीएचडी में दाखिले के लिए आवेदन कर सकते हैं हालांकि इसके लिए केवल ग्रेजुएशन की डिग्री होना काफी नहीं है.छात्रों के पास निर्धारित सीजीपीए के साथ चौथे साल में किया गया रिसर्च प्रोजेक्ट या एंटरप्रेन्योरशिप से जुड़ा काम भी होना चाहिए.दिल्ली यूनिवर्सिटी ने ऐसे विद्यार्थियों के लिए पीएचडी प्रवेश परीक्षा का पैटर्न और सिलेबस जारी कर दिया है.परीक्षा दो घंटे की होगी और इसमें कुल 100 अंकों के सवाल पूछे जाएंगे.खास बात यह है कि रिसर्च मेथडोलॉजी के साथ छात्रों से उनके अपने रिसर्च प्रोजेक्ट से जुड़े सवाल भी पूछे जाएंगे.वहीं, गलत जवाब देने पर नंबर भी कटेंगे.आइए जानते हैं कि चार साल की ग्रेजुएशन के बाद सीधे पीएचडी में एडमिशन कैसे मिलेगा, कौन आवेदन कर सकता है और चयन किस आधार पर होगा?
14 अक्टूबर को जारी हुआ पीएचडी एंट्रेंस का नया पैटर्न
दिल्ली यूनिवर्सिटी (DU) ने 14 अक्टूबर 2026 को पीएचडी प्रवेश परीक्षा से जुड़ी अधिसूचना जारी की है. इसमें चार साल की अंडरग्रेजुएट डिग्री पूरी करने वाले विद्यार्थियों के लिए प्रवेश परीक्षा का पैटर्न, पात्रता और चयन प्रक्रिया की जानकारी दी गई है. यह व्यवस्था उन विद्यार्थियों के लिए है जिन्होंने रिसर्च या एंटरप्रेन्योरशिप के साथ चार साल का अंडरग्रेजुएट प्रोग्राम पूरा किया है.यूनिवर्सिटी ने यह भी स्पष्ट किया है कि ऐसे विद्यार्थियों को पीएचडी में प्रवेश के लिए निर्धारित पात्रता पूरी करनी होगी और प्रवेश परीक्षा में शामिल होना होगा. इसका मतलब है कि चार साल की ग्रेजुएशन पूरी करने के बाद पीएचडी में आवेदन करने का रास्ता उपलब्ध है लेकिन दाखिला अपने आप नहीं मिलेगा.
किन छात्रों को मिलेगा सीधे PhD में आवेदन का मौका?
दिल्ली यूनिवर्सिटी के मुताबिक जिन विद्यार्थियों ने अंडरग्रेजुएट करिकुलम फ्रेमवर्क 2022 यानी UGCF 2022 के तहत चार साल या आठ सेमेस्टर का अंडरग्रेजुएट प्रोग्राम पूरा किया है. वे इस प्रवेश परीक्षा के लिए पात्र हो सकते हैं.इसके लिए छात्रों को अपनी ग्रेजुएशन में निर्धारित न्यूनतम सीजीपीए हासिल करना जरूरी है. इसके अलावा उनके चौथे साल की पढ़ाई में रिसर्च या एंटरप्रेन्योरशिप से जुड़ा काम भी शामिल होना चाहिए यानी केवल चार साल की सामान्य ग्रेजुएशन पूरी कर लेना पर्याप्त नहीं होगा. यूनिवर्सिटी की ओर से तय की गई सभी शर्तें पूरी करनी होंगी.
जनरल कैटेगरी के छात्रों के लिए कितनी CGPA जरूरी?
दिल्ली यूनिवर्सिटी ने चार साल की ग्रेजुएशन के आधार पर पीएचडी प्रवेश परीक्षा में शामिल होने के लिए न्यूनतम सीजीपीए निर्धारित की है. सामान्य श्रेणी के विद्यार्थियों के लिए कम से कम 7.5 CGPA होना जरूरी है.यह सीजीपीए चार साल या आठ सेमेस्टर के अंडरग्रेजुएट प्रोग्राम में प्राप्त होना चाहिए. इससे कम सीजीपीए वाले सामान्य श्रेणी के विद्यार्थी इस विशेष प्रवेश परीक्षा की पात्रता पूरी नहीं करेंगे इसलिए आवेदन करने से पहले छात्रों को अपनी मार्कशीट और सीजीपीए की जांच कर लेनी चाहिए.
SC, ST और दिव्यांग छात्रों को मिलेगी छूट
दिल्ली यूनिवर्सिटी ने आरक्षित श्रेणियों के विद्यार्थियों के लिए न्यूनतम सीजीपीए में राहत दी है.अनुसूचित जाति (SC), अनुसूचित जनजाति (ST) और दिव्यांगजन (PwBD) श्रेणी के उम्मीदवारों के लिए न्यूनतम 7 CGPA निर्धारित की गई है यानी इन श्रेणियों के विद्यार्थियों को चार साल की ग्रेजुएशन में कम से कम 7 सीजीपीए हासिल करनी होगी हालांकि उन्हें भी चौथे साल में रिसर्च या एंटरप्रेन्योरशिप से संबंधित काम पूरा करने की शर्त पूरी करनी होगी.
चौथे साल का रिसर्च प्रोजेक्ट क्यों है जरूरी?
दिल्ली यूनिवर्सिटी की इस प्रवेश प्रक्रिया में चौथे साल के रिसर्च या एंटरप्रेन्योरशिप से जुड़े काम को विशेष महत्व दिया गया है. आवेदन करने वाले विद्यार्थियों के पास अपने चार साल के अंडरग्रेजुएट प्रोग्राम के अंतिम वर्ष में पूरा किया गया डिसर्टेशन, अकादमिक प्रोजेक्ट या एंटरप्रेन्योरशिप वर्क होना चाहिए.डिसर्टेशन का मतलब किसी विषय पर किया गया विस्तृत शोध कार्य है. इसी तरह अकादमिक प्रोजेक्ट में छात्र अपने विषय से संबंधित किसी समस्या या विषय पर अध्ययन और विश्लेषण करते हैं. एंटरप्रेन्योरशिप वर्क में उद्यमिता या कारोबार से जुड़े विचार और परियोजनाएं शामिल हो सकती हैं. यूनिवर्सिटी ने स्पष्ट किया है कि प्रवेश प्रक्रिया में विद्यार्थियों के चौथे साल के इस काम को ध्यान में रखा जाएगा.
दो घंटे की होगी PhD प्रवेश परीक्षा
दिल्ली यूनिवर्सिटी ने पीएचडी प्रवेश परीक्षा का समय और कुल अंक भी तय कर दिए हैं. प्रवेश परीक्षा दो घंटे की होगी.इसमें कुल 100 अंकों के प्रश्न पूछे जाएंगे.प्रश्नपत्र को दो हिस्सों में बांटा गया है. पहला हिस्सा रिसर्च मेथडोलॉजी का होगा जबकि दूसरा हिस्सा उम्मीदवार के संबंधित विषय से जुड़ा होगा. दोनों हिस्सों के लिए 50-50 अंक निर्धारित किए गए हैं.इस तरह छात्रों को रिसर्च से जुड़ी सामान्य समझ के साथ अपने विषय और प्रोजेक्ट की भी तैयारी करनी होगी.
रिसर्च मेथडोलॉजी से पूछे जाएंगे 50 अंकों के सवाल
प्रवेश परीक्षा का पहला सेक्शन रिसर्च मेथडोलॉजी यानी शोध पद्धति पर आधारित होगा.इस हिस्से में कुल 50 अंकों के बहुविकल्पीय प्रश्न यानी MCQ पूछे जाएंगे. इन सवालों में उम्मीदवारों की रिसर्च से जुड़ी समझ का मूल्यांकन किया जाएगा.छात्रों को निर्धारित विकल्पों में से सही उत्तर चुनना होगा. रिसर्च मेथडोलॉजी का कॉमन सिलेबस दिल्ली यूनिवर्सिटी ने अपने आधिकारिक एडमिशन पोर्टल पर उपलब्ध कराया है इसलिए परीक्षा की तैयारी करने वाले उम्मीदवारों को सबसे पहले आधिकारिक सिलेबस देखना चाहिए.
अपने विषय और रिसर्च प्रोजेक्ट से भी पूछे जाएंगे सवाल
प्रवेश परीक्षा का दूसरा हिस्सा उम्मीदवार के संबंधित विषय पर आधारित होगा.इस सेक्शन के लिए भी 50 अंक निर्धारित किए गए हैं. इसमें वर्णनात्मक यानी डिस्क्रिप्टिव प्रश्न शामिल होंगे. खास बात यह है कि इन सवालों का संबंध उम्मीदवार के रिसर्च या एंटरप्रेन्योरशिप से जुड़े काम से भी होगा यानी जिन विद्यार्थियों ने चौथे साल में कोई रिसर्च प्रोजेक्ट, डिसर्टेशन या उद्यमिता से जुड़ी परियोजना पूरी की है. उन्हें उसकी अच्छी तैयारी करनी होगी.छात्रों को अपने प्रोजेक्ट के विषय, उद्देश्य और किए गए काम को स्पष्ट तरीके से समझाने की तैयारी रखनी चाहिए.
गलत जवाब देने पर कितने नंबर कटेंगे?
दिल्ली यूनिवर्सिटी की पीएचडी प्रवेश परीक्षा में निगेटिव मार्किंग का नियम भी लागू होगा. यह नियम बहुविकल्पीय प्रश्नों यानी MCQ वाले सेक्शन के लिए निर्धारित किया गया है. हर गलत जवाब पर संबंधित प्रश्न के लिए तय अंकों का 25 प्रतिशत काट लिया जाएगा. उदाहरण के लिए अगर किसी MCQ के लिए चार अंक निर्धारित हैं तो उसका गलत जवाब देने पर एक अंक कटेगा हालांकि यह केवल निगेटिव मार्किंग समझाने के लिए उदाहरण है. यूनिवर्सिटी ने दिए गए विवरण में हर MCQ के अंक अलग से नहीं बताए हैं इसलिए उम्मीदवारों को बिना सोचे-समझे जवाब देने के बजाय सवालों को ध्यान से पढ़कर उत्तर देना चाहिए.
एंट्रेंस में कितने नंबर लाने पर मिलेगा इंटरव्यू का मौका?
दिल्ली यूनिवर्सिटी ने पीएचडी प्रवेश परीक्षा के बाद इंटरव्यू के लिए न्यूनतम क्वालिफाइंग मार्क्स भी तय किए हैं.सामान्य श्रेणी के उम्मीदवारों को इंटरव्यू के लिए योग्य होने के लिए प्रवेश परीक्षा में कम से कम 50 प्रतिशत अंक हासिल करने होंगे चूंकि परीक्षा कुल 100 अंकों की होगी इसलिए सामान्य श्रेणी के उम्मीदवारों के लिए न्यूनतम 50 अंक जरूरी होंगे वहीं, SC, ST और PwBD श्रेणी के उम्मीदवारों के लिए न्यूनतम क्वालिफाइंग मार्क्स 45 प्रतिशत रखे गए हैं. इसका मतलब है कि इन श्रेणियों के उम्मीदवार कम से कम 45 अंक हासिल करके इंटरव्यू के लिए पात्र हो सकते हैं हालांकि निर्धारित अंक हासिल करना अंतिम प्रवेश की गारंटी नहीं होगा.
इंटरव्यू से पहले जमा करना होगा रिसर्च प्रोजेक्ट
प्रवेश परीक्षा में सफल होकर इंटरव्यू के लिए शॉर्टलिस्ट होने वाले उम्मीदवारों को एक और महत्वपूर्ण प्रक्रिया पूरी करनी होगी. उन्हें अपने चौथे साल के अंडरग्रेजुएट प्रोग्राम के दौरान किए गए रिसर्च या एंटरप्रेन्योरशिप वर्क से संबंधित रिपोर्ट जमा करनी होगी. इसमें डिसर्टेशन, अकादमिक प्रोजेक्ट रिपोर्ट या एंटरप्रेन्योरशिप रिपोर्ट शामिल हो सकती है.यह वही काम होना चाहिए जिसका इस्तेमाल उम्मीदवार के चौथे साल के मूल्यांकन में किया गया था. यूनिवर्सिटी ने स्पष्ट किया है कि इंटरव्यू की प्रक्रिया शुरू होने से पहले शॉर्टलिस्ट उम्मीदवारों को यह रिपोर्ट जमा करनी होगी इसलिए छात्रों को अपने चौथे साल के प्रोजेक्ट से जुड़े दस्तावेज अभी से सुरक्षित रखने चाहिए.
फाइनल मेरिट लिस्ट कैसे तैयार होगी?
दिल्ली यूनिवर्सिटी में इस प्रवेश प्रक्रिया के तहत अंतिम चयन केवल लिखित परीक्षा के आधार पर नहीं होगा. इसके लिए प्रवेश परीक्षा और इंटरव्यू, दोनों के प्रदर्शन को महत्व दिया जाएगा. फाइनल मेरिट तैयार करते समय प्रवेश परीक्षा के अंकों को 70 प्रतिशत वेटेज दिया जाएगा. वहीं इंटरव्यू के प्रदर्शन को 30 प्रतिशत वेटेज मिलेगा.उदाहरण के लिए अगर किसी उम्मीदवार ने प्रवेश परीक्षा में 80 अंक हासिल किए हैं तो 70 प्रतिशत वेटेज के हिसाब से उसके 56 अंक बनेंगे. इसी तरह इंटरव्यू में प्राप्त अंकों को निर्धारित 30 प्रतिशत वेटेज के अनुसार जोड़ा जाएगा. दोनों के आधार पर उम्मीदवार की अंतिम मेरिट तय होगी इसलिए केवल लिखित परीक्षा में अच्छे अंक हासिल करना पर्याप्त नहीं होगा. इंटरव्यू में भी बेहतर प्रदर्शन करना जरूरी होगा.
PhD एंट्रेंस का सिलेबस कहां मिलेगा?
दिल्ली यूनिवर्सिटी ने अलग-अलग विषयों की पीएचडी प्रवेश परीक्षाओं के लिए रिसर्च मेथडोलॉजी का कॉमन सिलेबस जारी कर दिया है. उम्मीदवार इसे यूनिवर्सिटी के आधिकारिक एडमिशन पोर्टल पर देख सकते हैं. इसके लिए दिल्ली यूनिवर्सिटी एडमिशन पोर्टल admission.uod.ac.in पर जाना होगा. यहां पीएचडी एडमिशन से संबंधित नोटिस और सिलेबस की जानकारी उपलब्ध कराई जाती है. उम्मीदवारों को सलाह है कि वे अपने संबंधित विषय का सिलेबस और परीक्षा से जुड़े निर्देश ध्यान से पढ़ें. इससे उन्हें यह समझने में मदद मिलेगी कि रिसर्च मेथडोलॉजी और विषय आधारित सेक्शन की तैयारी कैसे करनी है.
PhD प्रवेश परीक्षा कब होगी?
दिल्ली यूनिवर्सिटी ने फिलहाल चार साल की ग्रेजुएशन के आधार पर पीएचडी में दाखिले के लिए प्रवेश परीक्षा का पैटर्न और सिलेबस जारी किया है हालांकि दिए गए नोटिस में प्रवेश परीक्षा की तारीख घोषित नहीं की गई है. यूनिवर्सिटी ने बताया है कि परीक्षा की तारीख और अन्य जानकारी उचित समय पर जारी की जाएगी इसलिए उम्मीदवारों को परीक्षा की तारीख से संबंधित किसी भी अपडेट के लिए आधिकारिक एडमिशन पोर्टल पर नजर रखनी चाहिए.
UGC NET, CSIR NET और GATE पास छात्रों के लिए अलग नियम
दिल्ली यूनिवर्सिटी ने राष्ट्रीय स्तर की प्रवेश परीक्षाएं पास कर चुके उम्मीदवारों के लिए भी महत्वपूर्ण जानकारी दी है. जिन उम्मीदवारों ने पहले से UGC NET, CSIR NET, GATE, CEED या इसके बराबर किसी राष्ट्रीय स्तर की परीक्षा में क्वालिफाई किया है वे चार साल की ग्रेजुएशन वाले विद्यार्थियों के लिए आयोजित इस विशेष पीएचडी प्रवेश परीक्षा में शामिल होने के पात्र नहीं होंगे. ऐसे उम्मीदवारों को दिल्ली यूनिवर्सिटी के आधिकारिक एडमिशन पोर्टल के माध्यम से आवेदन करना होगा यानी राष्ट्रीय स्तर की संबंधित परीक्षा पास कर चुके उम्मीदवारों के लिए प्रवेश का रास्ता अलग रखा गया है इसलिए आवेदन करने से पहले उम्मीदवारों को अपनी योग्यता के अनुसार सही प्रवेश प्रक्रिया का चयन करना चाहिए.
20 अक्टूबर तक बढ़ाई गई आवेदन की तारीख
दिल्ली यूनिवर्सिटी ने पीएचडी प्रोग्राम में दाखिले के लिए आवेदन जमा करने की अंतिम तारीख भी बढ़ाई है.यूनिवर्सिटी ने आवेदन की समय सीमा बढ़ाकर 20 अक्टूबर 2026 कर दी है.यह जानकारी उन उम्मीदवारों के लिए महत्वपूर्ण है जो NET स्कोर के आधार पर पीएचडी एडमिशन के लिए आवेदन करना चाहते हैं.ऐसे उम्मीदवार दिल्ली यूनिवर्सिटी के आधिकारिक एडमिशन पोर्टल पर जाकर आवेदन प्रक्रिया पूरी कर सकते हैं.ध्यान रहे कि यह बढ़ाई गई अंतिम तारीख NET स्कोर के आधार पर चल रही प्रवेश प्रक्रिया के संदर्भ में बताई गई है.इसे चार साल की ग्रेजुएशन वाले उम्मीदवारों की विशेष प्रवेश परीक्षा की अंतिम तारीख नहीं समझना चाहिए.
