अस्ताना. सुजीत कलकल को वर्ल्ड रेसलिंं चैंपियनशिप में क्वार्टरफाइनल में दिल तोड़ने वाली हार का सामना करना पड़ा. जबकि मनीषा भानवाला ने महिलाओं 59 किलोग्राम वर्ग के फाइनल में जगह बनाकर विश्व चैंपियन बनने की भारत की उम्मीदों को जीवंत रखा. मनीषा ने दो मुकाबले ‘पिनफॉल’ से जीते और एक अन्य मुकाबले में एक भी अंक नहीं गंवाया.
मनीषा भानवाला (Manisha Bhanwala) ने कजाकिस्तान की अल्टीन शागायेवा को ‘पिनफॉल’ करने से पहले 10-0 की बढ़त बना ली थी. स्वर्ण पदक के मुकाबले में उनका सामना पैन अमेरिकन चैंपियन अबीगैल एलिजाबेथ नेट से होगा.
नीलम सिरोही और काजल धोचक के रजत पदक से संतोष करने के एक दिन बाद मनीषा मौजूदा चैंपियनशिप में स्वर्ण पदक के मुकाबले में पहुंचने वाली तीसरी भारतीय पहलवान बन गईं. इससे भारत की विश्व चैंपियन के लिए लंबे इंतजार को खत्म करने की उम्मीद बंध गई है.
मनीषा ने गैर ओलंपिक 59 किलोग्राम वर्ग में प्रतिस्पर्धा करने का विकल्प चुना. वह हालांकि अतीत में 57 किलोग्राम और 62 किलोग्राम वर्गों में प्रतिस्पर्धा कर चुकी थी. अनुभवी भारतीय खिलाड़ी ने सेमीफाइनल में अपना दबदबा बनाए रखा और पहले पीरियड के अंत तक 3-0 की बढ़त हासिल कर ली. उनके मजबूत रक्षात्मक खेल ने शागायेवा को पूरी तरह से निराश कर दिया, जो भारतीय खिलाड़ी के खिलाफ एक भी हमला नहीं कर सकीं.
दूसरे पीरियड में मनीषा ने कजाख पहलवान को मैट पर पटक दिया और चार अंकों की बढ़त हासिल करने के बाद उसे मजबूती से जकड़ लिया. मुकाबला समाप्त होने पर स्कोर 10-0 था. इससे पहले मनीषा ने क्वार्टरफाइनल में मंगोलिया की बोलोर्तुया खुरेलखुउ पर 6-0 की आसान जीत दर्ज की. उससे पहले उन्होंने कनाडा की लॉरेंस ब्यूरेगार्ड को पिनफॉल से हराया था.
मनीषा एशियाई खेलों में पदक नहीं जीत पाई थी लेकिन अब वह इतिहास रचने के करीब है. उन्होंने कहा, ‘मुझे एशियाई खेलों में जीत का पूरा भरोसा था, लेकिन अच्छी कुश्ती लड़ने के बावजूद मैं हार गई और मुझे खाली हाथ लौटना पड़ा. मैं सोमवार सुबह रोहतक पहुंची और मैंने उसी दिन से विश्व चैंपियनशिप की तैयारी शुरू कर दी थी.’
मनीषा ने कहा कि वह संभावित विश्व खिताब के दबाव को अपने खेल पर हावी नहीं होने देंगी. उन्होंने कहा, ‘मुझ पर किसी तरह का दबाव नहीं है. मैं अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करूंगी. कुश्ती मेरे लिए सब कुछ है. मैं किसी पारिवारिक समारोह हमें नहीं जाती हूं और मुझे यह नहीं पता कि त्योहारों के दौरान मेरे घर में क्या होता है. मैं हर समय केवल कुश्ती के बारे में सोचती हूं.’
इस बीच तनु ने महिलाओं के 72 किलोग्राम वर्ग में कांस्य पदक के मुकाबले में अमेरिका की प्रेशियस रोसन्ना बेल को 9-5 से हराकर कांस्य पदक जीता. पिछले एक साल से शानदार प्रदर्शन कर रहे सुजीत पुरूषों के 65 किलो वर्ग के क्वार्टर फाइनल में ताजिकिस्तान के अब्दुल मजीद कुदियेव से हार गए. पिछले बारह महीने में अंडर 23 विश्व चैम्पियनशिप, 2026 एशियाई चैम्पियनशिप और एशियाई खेलों समेत सात खिताब जीत चुके सुजीत पिछले साल जगरेब में विश्व चैम्पियनशिप के रेपेशाज दौर के बाद से पहली बार हारे हैं.
सुजीत ने एशियाई खेलों के फाइनल में इसी प्रतिद्वंद्वी के खिलाफ 2-9 से पिछड़ने के बाद लगातार आठ अंक बनाकर स्वर्ण पदक जीता था. लेकिन उस प्रदर्शन को यहां दोहरा नहीं सके. सुजीत ने सक्रिय नहीं होने के कारण पहला अंक गंवा दिया लेकिन पहले पीरियड के खत्म होने से पांच सेकंड पहले कुदियेव को गिराकर 2 -1 की बढत बनाई.
इसके बाद कुदियेव को निष्क्रियता का खामियाजा भुगतना पड़ा और सुजीत की बढत 3 . 1 की हो गई । आखिरी 30 सेकंड में मैच का रूख पलट गया. सुजीत ने कुदियेव को चित करने की कोशिश की लेकिन नाकाम रहे. जवाबी हमले में कुदियेव ने भी यही रणनीति अपनाई. मैट रैफरी ने सुजीत को दो अंक नहीं दिये लेकिन चेयर अंपायर ने यह अंक दिये. कुदियेव को बाहर कदम निकालने पर एक अंक मिला जिससे सुजीत की बढत 5 . 2 की हो गई. कुदियेव ने इस फैसले को चुनौती दी और जीते जिससे सुजीत के दो अंक रद्द हुए और कुदियेव को दो अंक मिले. स्कोर अब 3-3 था. निर्णायक मूव में सुजीत कुछ कर नहीं पाये और आखिरी अंक बनाने के मानदंड के आधार पर कुदियेव को जीत मिली. अन्य मुकाबलों में सृष्टि महिलाओं के 68 किलो रेपेशाज में अमेरिका की कैनेडी ब्लेड्स से हारकर बाहर हो गई.
महिलाओं के 55 किलोवर्ग में अहिल्या शिंदे ने क्यूबा की येनेलिस सांज वर्डेसिया को 8 -1 से हराया लेकिन तुर्की की तूबा देमिर से 6 -9 से हार गई. पुरूषों के 97 किलो वर्ग में विकी ने सार्को कोलमेनारेज को 8 -2 से हराकर अंतिम आठ में जगह बनाई लेकिन जापान के अराश योशिडा से तकनीकी श्रेष्ठता पर 2 -12 से हार गए.
