Vermicompost: यूरिया को कहें अलविदा, मिर्जापुर के योगेंद्र से जानें घर पर कम खर्च में वर्मी कंपोस्ट बनाने का आसान तरीका

Vermicompost Making at Home: खेतों में अच्छी पैदावार लेने के लिए ज्यादातर किसान यूरिया खाद का इस्तेमाल करते हैं. हालांकि, जरूरत से ज्यादा यूरिया का इस्तेमाल मिट्टी की सेहत पर बुरा असर डाल सकता है. ऐसे में किसान गोबर और दूसरे जैविक पदार्थों की मदद से घर पर ही वर्मी कंपोस्ट खाद तैयार कर सकते हैं. इस खाद को खेतों में इस्तेमाल करने से मिट्टी की गुणवत्ता सुधारने और फसल की पैदावार बढ़ाने में मदद मिलती है, साथ ही इससे खेती की लागत भी कम होती है.

मिर्ज़ापुर के रहने वाले जैविक खेती एक्सपर्ट योगेंद्र कुमार सिंह ने लोकल 18 को बताया कि वर्मी कंपोस्ट खाद तैयार करने के लिए करीब पांच से छह तरीके हैं. इनमें ईंटों की दीवार से बना साधारण टैंक, चक्रीय टैंक, षट्कोणीय टैंक, बेड सिस्टम और प्लास्टिक बैग में खाद तैयार करने की विधि शामिल हैं. हालांकि, कम खर्च में खाद तैयार करने के लिए ढेर विधि भी अपनाई जा सकती है. इसमें मोटी प्लास्टिक की पॉलिथीन बिछाकर गोबर, खरपतवार और पशुओं के बचे हुए चारे की मदद से खाद तैयार की जाती है.

कम खर्च में ऐसे शुरू करें वर्मी कंपोस्ट बनाना

योगेंद्र कुमार सिंह ने बताया कि वर्मी कंपोस्ट बनाने के लिए सबसे पहले जमीन पर मोटी प्लास्टिक की पॉलिथीन बिछा दें. इसके ऊपर खरपतवार की एक परत डालकर अच्छी तरह भिगो दें. इसके बाद गोबर डालना शुरू करें. गोबर में मिथेन गैस होती है, इसलिए उसे इस्तेमाल करने से पहले कम से कम 12 से 15 दिन तक बाहर रखकर पुराना होने दें. गोबर डालने के साथ बीच-बीच में खरपतवार और पशुओं के चारे का बचा हुआ हिस्सा भी डालते रहें. इस तरह खाद के लिए ढेर तैयार करें. योगेंद्र कुमार सिंह के मुताबिक, इस ढेर की ऊंचाई कम से कम डेढ़ फीट और चौड़ाई करीब साढ़े तीन फीट रखनी चाहिए. इसकी लंबाई किसान अपनी जरूरत और उपलब्ध जगह के हिसाब से रख सकते हैं.

एक वर्ग मीटर जगह में डालें एक किलो केंचुआ

योगेंद्र कुमार सिंह ने बताया कि ढेर तैयार होने के बाद इसकी ऊपरी सतह पर एक वर्ग मीटर लंबाई और एक वर्ग मीटर चौड़ाई के हिसाब से करीब एक किलो केंचुए डालें. इसके बाद ऊपर से खरपतवार डालकर ढक दें. उनके मुताबिक, पेड़-पौधों के नीचे इस तरीके से वर्मी कंपोस्ट तैयार करना बेहतर रहता है. उन्होंने बताया कि ठंड के मौसम में केंचुओं के लिए परिस्थितियां अनुकूल रहती हैं और नमी भी बनी रहती है. वहीं, गर्मी और बरसात के मौसम में केंचुओं की देखभाल पर ज्यादा ध्यान देना पड़ता है. बारिश में अधिक पानी भरने से केंचुए बाहर निकल सकते हैं. दूसरी ओर, गर्मी में तापमान ज्यादा होने पर केंचुए मर भी सकते हैं.

खाद बनाने के लिए 40 प्रतिशत नमी जरूरी

योगेंद्र कुमार सिंह के मुताबिक, वर्मी कंपोस्ट तैयार करते समय नमी का ध्यान रखना जरूरी है. इसमें नमी की मात्रा करीब 40 प्रतिशत होनी चाहिए. नमी की जांच करने के लिए खाद में मौजूद सामग्री को हाथ में लेकर मुट्ठी बांधें. अगर पानी नहीं निकलता है और सामग्री लड्डू जैसी बन जाती है, तो समझ लीजिए नमी का स्तर बिल्कुल सही है. इसके बाद ढेर को ऊपर से ढक दें और उसमें नमी बनाए रखें. उन्होंने बताया कि खाद बनने में लगने वाला समय इस्तेमाल किए गए केंचुओं की प्रजाति पर भी निर्भर करता है. उनके मुताबिक, इसिनिया फोटिडा प्रजाति के केंचुए वर्मी कंपोस्ट बनाने के लिए बेहतर माने जाते हैं.

ढाई से तीन महीने में तैयार हो जाती है खाद

योगेंद्र कुमार सिंह ने बताया कि केंचुए काफी नाजुक होते हैं, इसलिए उनकी देखभाल जरूरी है. एक बेड में वर्मी कंपोस्ट तैयार होने में करीब ढाई से तीन महीने लग सकते हैं. इस दौरान केंचुए ऊपर मौजूद जैविक पदार्थों को खाते हुए नीचे की ओर चले जाते हैं. ऐसे में ऊपर की तरफ तैयार खाद को धीरे-धीरे निकाला जा सकता है. खाद तैयार होने के बाद किसान इसे अपने खेतों में इस्तेमाल कर सकते हैं. इस तरह गोबर, खरपतवार और पशुओं के बचे हुए चारे की मदद से कम खर्च में जैविक खाद तैयार की जा सकती है.

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