नई दिल्ली: मुंबई के दा हैबिटेट के बारे में तो आपने बहुत सुना होगा, जहां पर सारे बड़े कॉमेडी कलाकार अपने कॉमेडी शो को करते हैं. लाइफ परफॉर्मेंस होती है, लेकिन ठीक उसी तरह दिल्ली में भी एक हैबिटेट सेंटर है. जो कि लोधी रोड पर स्थित है. इसका नाम सुनते ही लोगों को लगता है कि शायद यहां पर भी इसी तरह कॉमेडी शो होते होंगे, लेकिन असल में आपको बता दें कि लाल रंग के सुंदर पत्थरों से बना हुआ और हरियाली से घिरा हुआ यह हैबिटेट सेंटर दिल्ली में अपने सांस्कृतिक कार्यक्रमों और प्रदर्शनियों के साथ ही अपने माहौल के लिए जाना जाता है.
दिल्ली के लोधी रोड पर स्थित इंडिया हैबिटेट सेंटर राजधानी की प्रमुख सांस्कृतिक, बौद्धिक और व्यावसायिक जगहों में से एक है. यह सिर्फ एक इमारत नहीं, बल्कि ऐसा परिसर है. जहां पर्यावरण, शहरी विकास, कला, साहित्य, सिनेमा, फोटोग्राफी, सम्मेलन और विभिन्न सामाजिक विषयों पर कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं. आइये जानते हैं इस हैबिटेट सेंटर के बारे में.
जानें कब बनकर हुआ था तैयार
आपको बता दें कि इंडिया हैबिटेट सेंटर सोसायटी की स्थापना 21 अक्टूबर 1987 को हुई. 1988 में इसके लिए जमीन आवंटित की गई थी. 1993 में परिसर का निर्माण पूरा होने और इसके शुरू होने का साल माना जाता है. इस परियोजना की परिकल्पना हाउसिंग एंड अर्बन डेवलपमेंट कॉरपोरेशन के जरिए की गई थी. इसके तत्कालीन अध्यक्ष संतोष शर्मा का इसमें अहम योगदान था.
इस परिसर का वास्तुशिल्पीय डिजाइन अमेरिकी वास्तुकार जोसेफ एलन स्टीन ने तैयार किया था. डिजाइन और निर्माण कार्य में डोशी और भल्ला का भी योगदान था. यह किसी एक व्यक्ति का निजी भवन नहीं है, बल्कि एक संस्थागत परिसर है, जिसे अलग-अलग संस्थाओं के साझा उपयोग के लिए विकसित किया गया था.
इतना कुछ है यहां खास
यहां पर स्टीन ऑडिटोरियम, नाटक, व्याख्यान, संगीत कार्यक्रम और बड़े आयोजनों के लिए प्रमुख सभागार हैं.
विजुअल आर्ट्स गैलरी, चित्रकला, फोटोग्राफी और कला प्रदर्शनियों के लिए उपयोगी जगह है. खुला रंगमंच (एम्फीथिएटर) है. इसके अलावा यहां पर कैफेटेरिया भी है जो बहुत सुंदर है जिसमें एक बार में 100 लोग बैठ सकते हैं. इसमें हर वैरायटी का खाना मिलता है. इसके अलावा यहां पर लोगों के बैठने के लिए बहुत बड़ी सुविधा है. यहां पर प्रदर्शनी अक्सर लगता रहती है. ओपन रेस्टोरेंट भी है. तमाम हॉल हैं. जहां पर कॉन्फ्रेंस होती है, समय-समय पर और बड़ी संख्या में लोग यहां पर आते हैं.
