Delhi Earth Hour: दिल्ली सरकार के पर्यावरण विभाग ने शनिवार 28 मार्च 2026 को ‘अर्थ आवर’ (Earth Hour:) मनाने के लिए पब्लिक नोटिस जारी किया है. आज शाम 8:30 बजे से 9:30 बजे तक दिल्लीवासियों को अनावश्यक लाइट्स और गैजेट्स बंद रखने की अपील की गई है. यह वैश्विक अभियान WWF (World Wildlife Fund) का है. यह अंधेरा डर का नहीं, बल्कि जागरूकता का प्रतीक होगा. 8:30 बजते ही जब घरों, दुकानों और दफ्तरों की लाइटें एक साथ बंद होंगी तो यह सिर्फ बिजली बचाने का कदम नहीं होगा, बल्कि प्रकृति के प्रति जिम्मेदारी का एक मजबूत संदेश भी होगा . राजधानी जैसे प्रदूषण से जूझते शहर में यह पहल और भी मायने रखती है. यहां हर दिन धुएं, ट्रैफिक और बढ़ती ऊर्जा खपत के बीच पर्यावरण का संतुलन बिगड़ता जा रहा है. ऐसे में यह एक घंटा सिर्फ अंधेरा नहीं, बल्कि एक सामूहिक चेतना का समय होगा, जब लोग खुद से सवाल करेंगे कि क्या हम अपने शहर और पृथ्वी के लिए कुछ कर रहे हैं. यह वह पल होगा जब लाखों लोग एक साथ खड़े होकर बताएंगे कि छोटे-छोटे प्रयास भी बड़े बदलाव ला सकते हैं, और यही छोटे कदम आने वाले समय में बड़े पर्यावरणीय परिवर्तन की नींव बनते हैं.
दरअसल आज 28 मार्च को ‘अर्थ आवर’ मनाया जा रहा है. इसके तहत रात 8:30 से 9:30 बजे तक गैर-जरूरी लाइट्स बंद रखने की अपील की गई है. Department of Environment, GNCTD ने इस अभियान को सफल बनाने के लिए खास तैयारी की है. भारत मंडपम समेत कई प्रमुख स्थानों पर भी लाइटें बंद रहेंगी. बिजली कंपनियां और मेट्रो जैसी संस्थाएं भी इसमें भाग ले रही हैं, ताकि यह पहल सिर्फ अपील तक सीमित न रहकर एक सामूहिक आंदोलन का रूप ले सके.
दिल्ली जैसे शहर में इस अभियान का महत्व और बढ़ जाता है.
क्यों जरूरी है ये अभियान
‘अर्थ आवर’ एक वैश्विक अभियान है, जिसे वर्ल्ड वाइल्ड लाइफ फंड ने शुरू किया था. इसकी शुरुआत 2007 में सिडनी से हुई थी, जब हजारों घरों और कारोबारों ने एक साथ लाइट बंद कर दुनिया को संदेश दिया था. आज यह अभियान 190 से ज्यादा देशों में फैल चुका है और हर साल मार्च के आखिरी शनिवार को मनाया जाता है. इस बार इसकी थीम ‘गिव एन आवर फॉर अर्थ’ रखी गई है, जिसका मतलब है कि हर व्यक्ति का एक घंटा भी पृथ्वी के लिए बहुत अहम हो सकता है.
- दिल्ली जैसे श इस अहर मेंभियान का महत्व और बढ़ जाता है, क्योंकि यहां वायु प्रदूषण, बिजली की अत्यधिक खपत और तेजी से बढ़ता कार्बन उत्सर्जन बड़ी चुनौती बन चुके हैं. ऐसे में एक घंटे के लिए लाइट बंद करना भले ही छोटा कदम लगे, लेकिन इसका असर जागरूकता के रूप में बहुत बड़ा होता है. यह लोगों को यह सोचने पर मजबूर करता है कि रोजमर्रा की जिंदगी में ऊर्जा बचत कैसे की जा सकती है और पर्यावरण को कैसे सुरक्षित रखा जा सकता है.
- सरकार का मानना है कि अगर दिल्ली के करोड़ों लोग इसमें हिस्सा लेते हैं, तो लाखों यूनिट बिजली बचाई जा सकती है. इससे कार्बन उत्सर्जन कम होगा और पर्यावरण को राहत मिलेगी. पिछले साल भी इंडिया गेट और लाल किला जैसे कई लैंडमार्क इस दौरान अंधेरे में डूबे थे, जिसने पूरे देश को एक मजबूत संदेश दिया था.
अर्थ आवर क्या होता है?
अर्थ आवर एक वैश्विक पहल है, इसमें हर साल एक घंटे के लिए गैर-जरूरी लाइट्स और गैजेट्स बंद किए जाते हैं. इसका मकसद जलवायु परिवर्तन के खिलाफ जागरूकता फैलाना और ऊर्जा बचत को बढ़ावा देना है. यह सिर्फ बिजली बचाने का कार्यक्रम नहीं है, बल्कि यह लोगों को अपनी आदतों में बदलाव लाने और पर्यावरण के प्रति जिम्मेदारी निभाने के लिए प्रेरित करता है.
आज दिल्ली में इसे कैसे मनाया जाएगा?
दिल्ली में आज रात 8:30 से 9:30 बजे तक लोगों से अपील की गई है कि वे अपने घर, दुकान और दफ्तर की अनावश्यक लाइट्स बंद रखें. सार्वजनिक स्थानों, सरकारी भवनों और प्रमुख स्थलों पर भी लाइटें बंद रहेंगी. सोशल मीडिया के जरिए भी लोगों को इस अभियान से जोड़ने की कोशिश की जा रही है, ताकि ज्यादा से ज्यादा लोग इसमें भाग लें.
क्या इससे सच में बिजली बचेगी?
हां, अगर बड़े पैमाने पर लोग इसमें शामिल होते हैं तो लाखों यूनिट बिजली की बचत संभव है. हालांकि यह एक प्रतीकात्मक कदम है, लेकिन इसका असली फायदा जागरूकता बढ़ाने में होता है. यह लोगों को ऊर्जा के बेहतर उपयोग के लिए प्रेरित करता है, जिससे लंबे समय में बिजली की खपत कम हो सकती है.
किन चीजों को बंद करना जरूरी है?
सिर्फ अनावश्यक लाइट्स और उपकरण जैसे टीवी, एसी, कंप्यूटर आदि बंद करने हैं. जरूरी चीजें जैसे फ्रिज, सुरक्षा लाइट्स और मेडिकल उपकरण चालू रखे जा सकते हैं. इस पहल का उद्देश्य लोगों को असुविधा देना नहीं, बल्कि उन्हें जिम्मेदार बनाना है.
इसका पर्यावरण पर क्या असर पड़ेगा?
अर्थ आवर सीधे तौर पर कार्बन उत्सर्जन कम करने का संदेश देता है. लंबे समय में यह लोगों की आदतों में बदलाव लाकर पर्यावरण संरक्षण में मदद करता है. इसके जरिए यह भी समझाया जाता है कि छोटी-छोटी आदतें, जैसे अनावश्यक बिजली बंद करना, बड़े पर्यावरणीय बदलाव ला सकती हैं.
क्यों खास है इस बार का अर्थ आवर?
इस साल अर्थ आवर अपनी 20वीं वर्षगांठ मना रहा है, इसलिए इसका महत्व और बढ़ गया है. WWF India, दिल्ली सरकार, BSES, दिल्ली मेट्रो और कई एनजीओ मिलकर इसे बड़े स्तर पर सफल बनाने में जुटे हैं. यह सिर्फ एक घंटे की बात नहीं है, बल्कि एक सोच को बदलने की पहल है. जहां हर व्यक्ति अपने स्तर पर पर्यावरण के लिए जिम्मेदारी निभाए और आने वाली पीढ़ियों के लिए एक बेहतर भविष्य तैयार करे.
