नई दिल्ली. बैडमिंटन की दुनिया में एक बार फिर भारत का डंका बजा है. जर्मनी में खेले गए रोमांचक हाइलो ओपन सुपर 500 बैडमिंटन टूर्नामेंट के फाइनल मुकाबलों में भारतीय शटलरों ने अपने बेहतरीन खेल का प्रदर्शन करते हुए देश को ऐतिहासिक और दोहरी सफलता दिलाई. टूर्नामेंट के खिताबी मुकाबलों में देश की स्टार शटलर और दो बार की ओलंपिक पदक विजेता पीवी सिंधू तथा युवा पुरुष खिलाड़ी लक्ष्य सेन ने अपने-अपने वर्ग में सीधे गेमों में शानदार जीत दर्ज कर तिरंगा फहराया. इस प्रदर्शन से न केवल भारतीय बैडमिंटन का गौरव बढ़ा है, बल्कि वैश्विक स्तर पर देश की मजबूत दावेदारी भी फिर से साबित हुई है.
महिला एकल वर्ग के फाइनल मुकाबले में दो बार की ओलंपिक पदक विजेता पीवी सिंधू (PV Sindhu) ने डेनमार्क की मजबूत खिलाड़ी और विश्व रैंकिंग में 25वें स्थान पर काबिज लाइन होजमार्क केयर्सफेल्ड को आमने-सामने की भिड़ंत में करारी शिकस्त दी. पांच लाख डॉलर की कुल इनामी राशि वाले इस प्रतिष्ठित टूर्नामेंट का खिताबी मुकाबला महज 39 मिनट तक चला. आठवीं वरीयता प्राप्त केयर्सफेल्ड को सिंधू ने 21-12, 21-14 के सीधे सेटों में पराजित कर मौजूदा सत्र का अपना दूसरा खिताब अपने नाम किया.
लक्ष्य सेन की शानदार सफलता
महिला वर्ग की इस ऐतिहासिक सफलता के ठीक बाद युवा भारतीय शटलर लक्ष्य सेन ने भी कमाल कर दिखाया. पुरुष एकल के फाइनल मुकाबले में लक्ष्य सेन ने अपने शानदार और आक्रामक खेल का प्रदर्शन करते हुए जोनाथन क्रिस्टी को सीधे गेमों में 21-17, 21-10 से मात दी. लक्ष्य की इस शानदार जीत ने जर्मनी में चल रहे इस टूर्नामेंट में भारत की दोहरी सफलता पर मुहर लगा दी. लक्ष्य के लिए साल का यह पहला खिताब है.
पीवी सिंधू का शानदार सफर और खिताबी जीत
इस खिताबी जीत के साथ ही सिंधू ने सत्र के अंत में आयोजित होने वाले प्रतिष्ठित विश्व टूर फाइनल्स में अपनी जगह पक्की करने की अपनी उम्मीदों और दावेदारी को बेहद मजबूत कर लिया है. इस शानदार जीत से उन्हें महत्वपूर्ण 9,200 रैंकिंग अंक भी मिले हैं. मुकाबले से पहले सिंधू और केयर्सफेल्ड के बीच हेड-टू-हेड रिकॉर्ड 6-1 का था, जिसमें डेनमार्क की खिलाड़ी को एकमात्र जीत वर्ष 2025 के सुदीरमन कप फाइनल्स में मिली थी. सिंधू ने इस बार भी अपने बेहतरीन अनुभव का इस्तेमाल करते हुए उस बढ़त को और मजबूत किया.
कोर्ट पर सिंधू का रणनीतिक दबदबा
मैच की शुरुआत से ही सिंधू ने कोर्ट पर अपना आक्रामक और नियंत्रित रुख बनाए रखा. हालांकि, शुरुआती पलों में सिंधू की कुछ छोटी गलतियों का फायदा उठाकर डेनमार्क की खिलाड़ी ने स्कोर 3-3 से बराबर कर लिया था. केयर्सफेल्ड ने लंबी रैलियां खेलकर सिंधू को थकाने की रणनीति अपनाई, लेकिन भारतीय खिलाड़ी ने अपने चतुराई भरे शॉट और नेट प्ले के दम पर स्कोर 8-5 कर लिया और ब्रेक तक तीन अंकों की महत्वपूर्ण बढ़त हासिल कर ली.
पहला गेम अपने नाम करना
पहला गेम जीतने के लिए सिंधू ने कोर्ट के पिछले हिस्से से सटीक पुश शॉट लगाकर स्कोर 14-11 किया और फिर एक बेहतरीन बैकहैंड विनर के साथ स्कोर 17-12 तक पहुंचा दिया. इसके बाद केयर्सफेल्ड का एक शॉट नेट में उलझ गया, जिससे सिंधू ने आसानी से आठ गेम प्वाइंट हासिल किए और पहले ही मौके को भुनाकर पहला गेम अपने नाम कर लिया.
दूसरा गेम और निर्णायक बढ़त
दूसरा गेम भी पूरी तरह से सिंधू के नियंत्रण में रहा. उन्होंने शुरुआत से ही 4-2 की बढ़त बना ली और कुछ शानदार विनर शॉट खेलते हुए स्कोर 6-3 कर दिया. हालांकि केयर्सफेल्ड ने एक बार फिर वापसी की कोशिश करते हुए स्कोर 7-6 तक पहुंचाया, लेकिन इसके तुरंत बाद वह लगातार दो शॉट बाहर मार बैठीं. सिंधू ने इसका पूरा फायदा उठाते हुए स्कोर 10-6 कर लिया और अपनी बढ़त को अंत तक बनाए रखा. अंत में, आक्रामक रिटर्न शॉट के जरिए छह चैंपियनशिप प्वाइंट हासिल करने के बाद, सिंधू ने केयर्सफेल्ड की एक और गलती का लाभ उठाया और मैच अपने नाम कर लिया.
उत्कृष्ट फॉर्म और भविष्य की योजनाएं
जुलाई महीने में जापान ओपन का खिताब अपने नाम करने वाली और उसके पिछले सप्ताह फ्रेंच ओपन में उपविजेता रही सिंधू ने इस टूर्नामेंट में अपने मानसिक संतुलन और शानदार फॉर्म का अनूठा उदाहरण पेश किया. मैच के बाद अपनी फॉर्म और वापसी को लेकर पूछे गए सवाल पर सिंधू ने कहा, ‘बिल्कुल, मेरी पूरी टीम को इसका श्रेय जाता है. हम इसी के अनुसार योजना बना रहे हैं. जैसे-जैसे आप आगे बढ़ते हैं, यह जरूरी हो जाता है कि आप अपने खेल को बेहतर बनाएं और फैसले लेने में अधिक समझदारी दिखाएं.’
मानसिक संतुलन और सुधार की गुंजाइश
उन्होंने आगे कहा कि उनके लिए शांतचित्त बने रहना बेहद महत्वपूर्ण था. उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि अभी भी उनके खेल में सुधार की थोड़ी गुंजाइश है, लेकिन जिस तरह से चीजें आगे बढ़ रही हैं, उससे वह बेहद खुश हैं. सिंधू के अनुसार, प्रतिद्वंद्वी चाहे कोई भी हो, उनके लिए हर अंक पर ध्यान केंद्रित करना और अपना शत-प्रतिशत प्रदर्शन देना ही सबसे बड़ी प्राथमिकता थी.
