Last Updated:
बॉलीवुड के मशहूर संगीतकार अनु मलिक को बचपन से ही घर में संगीतमय माहौल मिला, जिसके चलते उनका झुकाव कम उम्र में ही संगीत की तरफ हो गया था. महज 16 साल की उम्र में उन्होंने कंपोजिंग की दुनिया में कदम रखा और उनके पहले ही गाने को मशहूर गायिका आशा भोसले ने अपनी आवाज दी. हालांकि, उनके करियर को असली पहचान और नई ऊंचाइयां फिल्म ‘बाजीगर’ के ब्लॉकबस्टर संगीत से मिलीं. ‘बाजीगर’, ‘बॉर्डर’ और ‘रिफ्यूजी’ जैसे गानों से इतिहास रचने वाले अनु मलिक का यह संगीतमय सफर बेहद दिलचस्प रहा है.
नई दिल्ली. हिंदी सिनेमा के मशहूर संगीतकार अनु मलिक आज अपना जन्मदिन मना रहे हैं. सरदार मलिक के घर जन्मे और गीतकार हसरत जयपुरी के भांजे अनु मलिक पर बचपन से ही संगीत का गहरा रंग चढ़ा था. महज 16-17 साल की उम्र में उन्होंने कंपोजिंग की दुनिया में कदम रख दिया था और फिल्म ‘हंटरवाली 77’ से अपने करियर की शुरुआत की थी. उनके पहले गाने को आशा भोसले ने अपनी आवाज से सजाया था और फिर इसके बाद उन्होंने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा.
2 नवंबर 1960 को जन्मे अनु मलिक के घर में संगीतमय माहौल रहता था, जिसका गहरा असर बचपन से ही उन पर रहा. उन पर शंकर-जयकिशन के गानों ने गहरा असर छोड़ा. उन्होंने एक इंटरव्यू में कहा था, ‘मैं खुशनसीब हूं कि सरदार मलिक (संगीत निर्देशक) का बेटा हूं और मेरे मामा हसरत जयपुरी (गीतकार) हैं. मैं बचपन से उस माहौल में पला-बढ़ा हूं.’ (फोटो साभार: Instagram@anumalikmusic)
जब अनु मलिक ने एक मराठी कविता को कंपोज किया था, जिसे बाद में अपने पिता सरदार मलिक को सुनाया तो वह हैरान थे. इसके बाद उन्होंने बेटे का इम्तिहान लिया और बहुत सारे अलग-अलग गाने उनके सामने रख दिए. अनु मलिक को उन गानों की धुन बनाने को कहा गया था. (फोटो साभार: Instagram@anumalikmusic)
Add News18 as
Preferred Source on Google
फिर अनु मलिक ने धुन बनाना शुरू कर दिया और एक के बाद एक अलग-अलग धुन बना डाली. उन धुनों को सुनकर पिता बेहद खुश हुए और अनु मलिक को गले लगा लिया. बहुत ही कम उम्र में अनु मलिक गानों को कंपोज करने लगे थे. मामा हसरत जयपुरी के लिखे गाने को जब उन्होंने कंपोज किया, तब उसे सुनकर सब दीवाने हो गए. (फोटो साभार: Instagram@anumalikmusic)
16 साल की उम्र में अनु मलिक को बतौर म्यूजिक कंपोजर काम करने का अवसर मिला. अपने जमाने के कॉमेडियन मोहन चोटी की 1978 में फिल्म ‘हंटरवाली 77’ आई, जिसमें पिता सरदार मलिक की जगह अनु मलिक को काम करने का मौका मिला. (फोटो साभार: Instagram@anumalikmusic)
‘जुल्मों सितम पर इतराने वाले, तू भी तो इक दिन मिट जाएगा. तेरा जमाना है मैंने माना, मेरा भी एक दिन आ जाएगा.’ इस गाने को मशहूर गायिका आशा भोसले ने गाया था, जिसे संगीत अनु मलिक ने दिया. यह उनका पहला गाना था. इस गाने के बोल हसरत जयपुरी ने लिखे थे. एफसी मेहरा की फिल्म ‘एक जान हैं हम’ से अनु मलिक को सही शुरुआत मिली और फिर एक फिल्म मिली ‘सोनी महिवाल’, जिसके बाद उन्होंने कभी पीछे पलटकर नहीं देखा. (फोटो साभार: Instagram@anumalikmusic)
फिल्म ‘बाजीगर’ में दिए गए संगीत ने अनु मलिक को नई पहचान दिलाई. फिर फिल्म ‘बॉर्डर’ में अनु मलिक के कंपोज किए गए सभी गाने हिट रहे. फिल्म ‘रिफ्यूजी’ के लिए उन्हें राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार से भी नवाजा गया था. वैसे शोहरत की बुलंदियों पर पहुंचने के बाद अनु मलिक पर अंतरराष्ट्रीय और भारतीय गानों की धुनें चुराने के आरोप भी लगते रहे हैं. (फोटो साभार: Instagram@anumalikmusic)
साल 2017 में ‘एंटरटेनमेंट की रात’ शो के दौरान ‘रोडीज’ फेम रघु राम ने उनसे सीधे तौर पर धुनें चुराने के बारे में सवाल किया. इसके जवाब में मलिक ने अपना बचाव करते हुए कहा कि ‘ईश्वर के अलावा कोई भी ओरिजिनल नहीं है’ और प्रेरणा लेना, चोरी करने से बिल्कुल अलग बात है. उन्होंने इस संदर्भ में ‘बॉर्डर’, ‘एलओसी कारगिल’ और ‘मैं हूं ना’ जैसी फिल्मों के अपने काम का उदाहरण दिया था. (फोटो साभार: Instagram@anumalikmusic)
