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Delhi Riots Case: उत्तर-पूर्वी दिल्ली हिंसा के दौरान करावल नगर स्थित ‘अल्लाह वाली मस्जिद’ में कथित तोड़फोड़ और आगजनी के मामले में दिल्ली की एक अदालत ने बड़ा फैसला सुनाते हुए सभी पांचों आरोपियों को बरी कर दिया है. अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश प्रवीण सिंह की अदालत ने दिल्ली पुलिस की जांच और पेश किए गए साक्ष्यों पर गंभीर सवाल खड़े किए.
दिल्ली की अदालत ने आरोपियों को बरी कर दिया. (फाइल फोटो)
Delhi Riots Case: उत्तर-पूर्वी दिल्ली में 2023 में हुए दंगों के दौरान एक मस्जिद में तोड़फोड़ और आगजनी करने के आरोपी पांच लोगों को राष्ट्रीय राजधानी की एक अदालत ने बरी करते हुए कहा कि पुलिस की ओर से पेश किये गए गवाह भरोसेमंद नहीं थे और अभियोजन पक्ष द्वारा सौंपी गई फुटेज को सबूत के तौर पर स्वीकार नहीं किया जा सकता. अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश प्रवीण सिंह आरोपियों — अंकित, सौरभ शर्मा, रोहित, राहुल कुमार और सचिन — के खिलाफ मामले की सुनवाई कर रहे थे. इन सभी पर दंगा करने, गैर-कानूनी तरीके से एकत्र होने, संपत्ति को नुकसान पहुंचाने और आगजनी करने का आरोप था.
न्यायाधीश सिंह ने 31 अक्टूबर के अपने आदेश में कहा, “मुझे लगता है कि ये गवाह भरोसेमंद नहीं हैं. अल्लाह वाली मस्जिद में हुए दंगों, तोड़फोड़ और आगजनी के मामलों में, इन गवाहों के आधार पर आरोपियों का दोष साबित नहीं किया जा सका तथा न ही इन (गवाहों) पर भरोसा किया जा सकता है.” इन पांच लोगों को शहीद भगत सिंह कॉलोनी में हुई हिंसा से जुड़े एक मामले में गिरफ्तार किया गया था. फरवरी 2020 के सांप्रदायिक दंगों के दौरान, भीड़ ने मस्जिद में तोड़फोड़ की थी और उसमें आग लगा दी थी.
अदालत ने कहा कि संभवत: 25 फरवरी 2020 को करावल नगर स्थित अल्लाह वाली मस्जिद में कोई आगजनी या तोड़फोड़ नहीं हुई थी, जैसा कि अभियोजन पक्ष ने दावा किया था. साथ ही, अदालत ने कहा कि इस घटना के संबंध में पुलिसकर्मियों की गवाही पर भरोसा नहीं किया जा सकता.
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राकेश रंजन कुमार को डिजिटल पत्रकारिता में 10 साल से अधिक का अनुभव है. न्यूज़18 के साथ जुड़ने से पहले उन्होंने लाइव हिन्दुस्तान, दैनिक जागरण, ज़ी न्यूज़, जनसत्ता और दैनिक भास्कर में काम किया है. वर्तमान में वह h…
