नोएडा: दिवाली के मौके पर अगर आप अपना आशियाना खरीदने या प्रॉपर्टी में निवेश करने की योजना बना रहे हैं, तो नोएडा के कुछ इलाके आपके लिए बेहतर विकल्प हो सकते हैं. हालांकि, अब नोएडा एक्सटेंशन को एक्सपर्ट पहले की तरह बजट हाउसिंग का सस्ता विकल्प नहीं मानते हैं. रियल एस्टेट क्षेत्र से जुड़े एक्सपर्ट पवन शर्मा ने बताया कि नोएडा में सेक्टर-45 के आसपास के सेंट्रल सेक्टर और नोएडा-ग्रेटर नोएडा एक्सप्रेसवे से जुड़े सेक्टर बेहतर कनेक्टिविटी के लिहाज से देखे जा सकते हैं.
उन्होंने कहा कि सेक्टर-45 के आसपास कई आवासीय परियोजनाएं विकसित हुई हैं, जबकि एक्सप्रेसवे के आसपास भी आवागमन की सुविधाओं के कारण खरीदारों की दिलचस्पी बढ़ी है. ऐसे में घर खरीदने से पहले बजट, ऑफिस से दूरी, स्कूल, अस्पताल और रोजमर्रा की जरूरतों को इस रिपोर्ट में खास ध्यान रखा है.
बुक करने से पहले जांच लें ये चीजें
TRG ग्रुप के मैनेजिंग डायरेक्टर पवन शर्मा लोकल 18 से बात करते हुए बताया कि नोएडा एक्सटेंशन में भी कुछ ऐसे प्रोजेक्ट हैं, जो पहले अटके हुए थे और बाद में एनसीएलटी प्रक्रिया के तहत दूसरे डेवलपर्स या एनबीसीसी को सौंपे गए. ऐसे प्रोजेक्ट में कुछ खरीदारों को कम कीमत पर घर मिलने की संभावना बनी है. किसी भी परियोजना में निवेश करने से पहले उसके वर्तमान निर्माण की स्थिति, नक्शे, कब्जे की समयसीमा और कानूनी स्थिति की जांच कर लें. एक्सपर्ट के अनुसार, नोएडा और आसपास के इलाकों में डेवलपर्स की कीमतों में पहले के मुकाबले बढ़ोतरी हुई है, इसलिए अब कम बजट में बेहतर लोकेशन पर घर तलाशना चुनौतीपूर्ण हो गया है.
कमर्शियल में 5-9 प्रतिशत तक का रिटर्न
औद्योगिक और रेजिडेंशियल के बारे में बात करते हुए पवन शर्मा ने बताया कि आवासीय प्रॉपर्टी में किराये से मिलने वाला सालाना रिटर्न करीब 2 से 3 प्रतिशत के आसपास है, जबकि कमर्शियल प्रॉपर्टी में यह 5 से 9 प्रतिशत या कुछ मामलों में इससे अधिक होने का है. कमर्शियल प्रॉपर्टी में निवेश के लिए ऐसी जगह चुननी चाहिए, जहां पहले से पर्याप्त आबादी और ग्राहकों की आवाजाही हो. नोएडा में अधिकांश स्थापित सेक्टर पहले से विकसित हो चुके हैं. सेक्टर-150 में कुछ कमर्शियल संभावनाएं हैं, लेकिन वहां निवेश से पहले आसपास की आबादी, बाजार की मांग और परियोजना समझना चाहिए.
इन प्रॉपर्टी में दें प्राथमिकता
कमर्शियल प्रॉपर्टी खरीदने वालों के लिए ऐसी संपत्ति को प्राथमिकता दें, जिसमें पहले से किरायेदार या प्री-लीज की व्यवस्था हो. इससे कब्जा मिलने के बाद किरायेदार तलाशने की परेशानी कम होगी. पवन शर्मा ने ग्रेटर नोएडा वेस्ट, गौर सिटी और क्रॉसिंग रिपब्लिक जैसे घनी आबादी वाले क्षेत्रों का उदाहरण देते हुए कहा कि यहां बड़ी आबादी के कारण संगठित कमर्शियल प्रोजेक्ट की मांग बढ़ी है. उन्होंने बताया कि TRG में भी 6 से 12 प्रतिशत तक रिटर्न है.
रेरा की वजह से आई ट्रांसपेरेंसी
पवन शर्म ने बताया कि पिछले कुछ वर्षों में रियल एस्टेट क्षेत्र में पारदर्शिता बढ़ाने में रेरा की भूमिका है. रेरा में रजिस्टर परियोजनाओं में डेवलपर को निर्धारित नियमों के तहत परियोजना की राशि का 70 प्रतिशत अलग खाते में रखना होता है और उसका इस्तेमाल निर्माण कार्य के लिए किया जाता है. परियोजनाओं को समय-समय पर जरूरी अनुपालन भी पूरे करने होते हैं. इससे खरीदारों को पहले के मुकाबले अधिक ट्रांसप्रेरेंसी मिलती है. उन्होंने बताया कि घर खरीदने या कमर्शियल प्रॉपर्टी में पैसा लगाने से पहले रेरा की वेबसाइट पर परियोजना का पंजीकरण, स्वीकृत दस्तावेज और निर्माण की प्रगति जरूर चेक कर लें.
