दिल्ली-NCR में 15 नवंबर तक स्कूल बंद रहेंगे? सर्वे में 53% पेरेंट्स की डिमांड- बच्चों को दें स्मॉग ब्रेक

नई दिल्ली (Delhi NCR Smog Break in Schools). दिवाली के करीब आते ही दिल्ली-एनसीआर की हवा बेहद जहरीली हो गई है. लोगों के लिए सांस ले पाना मुश्किल हो रहा है. हवा में पसरी यह धुंध बड़ों के साथ ही छोटे-छोटे बच्चों की सेहत पर भी भारी पड़ रही है. सुबह स्कूल बस का इंतजार करते या असेंबली में खड़े बच्चे अपनी क्षमता से कई गुना ज्यादा जहरीले कण शरीर के अंदर खींच रहे हैं. हालात देखते हुए अब पेरेंट्स का सब्र जवाब देने लगा है.

दिल्ली-एनसीआर में हवा का स्तर जानलेवा श्रेणी में पहुंच चुका है. राजधानी और आस-पास के शहरों में ‘स्मॉग ब्रेक’ की मांग उठने लगी है. लोकलसर्कल्स (LocalCircles) के सर्वे में दिल्ली, नोएडा, गाजियाबाद, गुरुग्राम और फरीदाबाद के 38 हजार से ज्यादा लोगों की राय सामने आई है. इस सर्वे के नतीजे बेहद चौंकाने वाले हैं. 53% पेरेंट्स ने 10 से 15 नवंबर के बीच स्मॉग ब्रेक का ऐलान करने की मांग की है. 47% लोगों का मानना है कि हवा की गुणवत्ता गंभीर श्रेणी में बने रहने पर स्कूलों में छुट्टियां अनिवार्य रूप से दी जाएं.

दिल्ली-एनसीआर में स्मॉग ब्रेक की मांग: जानिए सर्वे और सेहत से जुड़े 5 पहलू

इस सर्वे की सबसे बड़ी बात रही कि एक भी पेरेंट ने स्कूल को सामान्य रूप से चालू रखने की वकालत नहीं की. माता-पिता का स्पष्ट कहना है कि हर बार इमर्जेंसी स्थिति बनने के बाद देर रात फैसला लेने के बजाय इस बार सरकार को पहले से ठोस कदम उठाने चाहिए.

1. जहरीली हवा का शिकार बन रहे बच्चे: PM 1 का खतरनाक स्तर

4 नवंबर को दिल्ली-NCR का औसत AQI 555 दर्ज किया गया. यह ‘गंभीर’ श्रेणी में आता है. हवा में PM 2.5 और उससे भी सूक्ष्म PM 1 कणों का स्तर सेफ लिमिट्स से दर्जनों गुना अधिक बना हुआ है. एक्सपर्ट्स के मुताबिक, ये सूक्ष्म कण फेफड़ों से होते हुए सीधे ब्लडस्ट्रीम तक पहुंच जाते हैं. बच्चों की सांस लेने की दर बड़ों से ज्यादा होती है. इसलिए उनके डेवलपिंग फेफड़ों पर इसका स्थायी और बुरा असर पड़ता है.

2. ऑनलाइन क्लास के पक्ष में 49% पेरेंट्स, 25% चाहते हैं छुट्टी

सर्वे में पूछा गया कि स्मॉग ब्रेक के दौरान स्कूलों को क्या करना चाहिए. इस पर 49% अभिभावकों ने कहा कि फिजिकल क्लास बंद करके ऑनलाइन पढ़ाई कराई जानी चाहिए. वहीं 25% अभिभावक पूरी तरह से स्कूल बंद रखने के पक्ष में दिखे. कुल मिलाकर 74% अभिभावक चाहते हैं कि बच्चे इस दौरान किसी भी हाल में स्कूल की बिल्डिंग तक न जाएं और जहरीली हवा के संपर्क में आने से बचें.

3. बड़ों के लिए वर्क फ्रॉम होम तो बच्चों के लिए देरी क्यों?

प्रशासन और CAQM ने बढ़ते प्रदूषण को देखते हुए ऑफिस में 50% कर्मचारियों के लिए वर्क फ्रॉम होम की गाइडलाइन जारी की है. अभिभावकों का सवाल है कि जिस जहरीली हवा से बड़ों को बचाने के लिए पॉलिसी बन रही हैं, उसी हवा में हर सुबह बच्चों को स्कूल क्यों भेजा जा रहा है? जब 8 सालों का डेटा दिखाता है कि नवंबर के दूसरे हफ्ते में प्रदूषण चरम पर होता है तो स्कूलों के लिए कोई फैसला क्यों नहीं लिया जा रहा?

4. अध्ययन के डराने वाले आंकड़े: दिल्ली के 43.5% बच्चों के फेफड़े प्रभावित

केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) और चित्तरंजन राष्ट्रीय कैंसर संस्थान के पुराने अध्ययन का हवाला देते हुए रिपोर्ट में बताया गया है कि दिल्ली के 43.5% बच्चों में फेफड़ों की कार्यक्षमता घटी हुई पाई गई है. ग्रामीण इलाकों के मुकाबले दिल्ली के बच्चों में सांस की समस्याएं और ध्यान न लगा पाने (ADHD) के लक्षण काफी ज्यादा देखे गए हैं. बचपन में फेफड़ों को हुआ नुकसान उम्र बढ़ने के साथ कभी 100% ठीक नहीं हो पाता.

5. एक समान पॉलिसी और एडवांस प्लान की सख्त जरूरत

मौजूदा नियमों में बड़ी खामी है कि दिल्ली, नोएडा, गुरुग्राम या गाजियाबाद- सब जगह स्कूल बंद करने के फैसले अलग-अलग अधिकारी और अलग-अलग समय पर लेते हैं. पेरेंट्स की मांग है कि CAQM और सभी NCR राज्य मिलकर एक जैसी पॉलिसी बनाएं. 10-15 नवंबर के बीच जब पराली का धुआं और दिवाली के बाद का स्मॉग चरम पर रहने की आशंका है, तब पहले से ही स्मॉग ब्रेक लागू कर दिया जाए.

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